केंद्र सरकार ने संसद में कहा है कि E20 पेट्रोल को लेकर उसे वाहनों की परफॉर्मेंस से जुड़ी कोई व्यापक या पुष्ट शिकायत नहीं मिली है. सरकार ने इसके लिए देशभर में 23 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों के असल इस्तेमाल के अनुभव और कई स्टडीज़ का हवाला दिया. संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन सोमवार को राज्यसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में पेट्रोलियम मंत्रालय ने ये बातें कही.
मंत्रालय ने कहा, 'E20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों को को नुकसान नहीं होता. इससे इंजन खराब होने, असामान्य घिसावट या परफॉर्मेंस में बड़े पैमाने पर गिरावट के वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले हैं.'
मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर उठी चिंताओं का वैज्ञानिक आकलन कराया गया. लंबे समय तक चली प्रयोगशाला जांच, फील्ड वेलिडेशन और वास्तविक उपयोग के अनुभवों के आधार पर ये निष्कर्ष निकाला गया कि E20 से वाहन प्रदर्शन पर कोई व्यापक प्रतिकूल असर साबित नहीं हुआ है.
जवाब में कहा गया कि देश में E15+ ब्लेंड पेट्रोल पिछले साढ़े तीन साल से और E19-E20 ईंधन ढाई साल से ज्यादा समय से इस्तेमाल हो रहा है, जबकि 20 करोड़ से ज्यादा दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इन मिश्रणों पर चल रही हैं.
23 करोड़ से ज्यादा गाड़ियां सड़क पर, कोई खराबी नहीं
सरकार ने संसद में आंकड़ों के साथ बताया कि देश में पिछले साढ़े तीन साल से अधिक समय से E15+ (15% से ज्यादा एथेनॉल) और पिछले ढाई साल से E19-E20 पेट्रोल की सप्लाई व्यापक रूप से की जा रही है.
वर्तमान में देश भर में 20 करोड़ से अधिक दो-पहिया वाहन (Two-Wheelers) और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इसी एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर बिना किसी इंजन फेलियर की शिकायत के चल रही हैं.
वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े देते हुए सरकार ने बताया कि देश की एक प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी (OEM) ने
- करीब 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें से 1.5 करोड़ गाड़ियां ऐसी थीं जो मूल रूप से E20 कंपैटिबल (अनुकूल) प्रमाणित नहीं थीं.
- इसके बावजूद, इन गाड़ियों के इंजनों में E20 ईंधन के कारण जंग, असामान्य घिसावट या कलपुर्जों की उम्र घटने का कोई मामला सामने नहीं आया.
यही अनुभव एक प्रमुख टू-व्हीलर कंपनी का भी रहा है.
ये रहा सरकार का पूरा जवाब
पुरानी गाड़ियों पर क्या कहती है वैज्ञानिक स्टडी?
क्या पुरानी गाड़ियां भी E20 पेट्रोल झेल सकती हैं? इस सवाल पर सरकार ने बताया कि नीति आयोग के तहत गठित अंतर-मंत्रालयी समिति (IMC) ने इसका गहन अध्ययन किया है. इस मूल्यांकन में इंडियन ऑयल (IOCL), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) देहरादून और सियाम (SIAM) जैसी शीर्ष संस्थाओं की रिसर्च शामिल थी.
वैज्ञानिक प्रयोगशाला परीक्षणों और फील्ड ट्रायल्स में यह प्रमाणित हुआ है कि पुरानी गाड़ियों के परफॉर्मेंस, गाड़ी स्टार्ट होने की क्षमता, चलाने की सुगमता और इंजन के मेटल व प्लास्टिक पार्ट्स पर E20 ईंधन का कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता है.
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