दिवाली पर अमेजन (Amazon), फ्लिपकार्ट (Flipkart) और दूसरे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सेल के दौरान बंपर डिस्काउंट के विज्ञापन दिखाई देते हैं. कहीं 50 फीसदी डिस्काउंट का दावा होता है तो कहीं बैंक ऑफर और कैशबैक के जरिए हजारों रुपये बचाने का मौका दिया जाता है. ऐसे में कस्टमर्स के मन में सवाल उठता है कि क्या ऑनलाइन शॉपिंग वास्तव में सस्ती पड़ती है या छूट के नाम पर सिर्फ बचत का भ्रम पैदा किया जाता है? आइए समझते हैं कि दिवाली सेल में किन सामानों की सबसे ज्यादा खरीदारी हुई और डिस्काउंट का असली गणित क्या है?
स्मार्टफोन से लेकर फैशन तक की खूब हुई खरीदारी
दिवाली 2026 की फेस्टिव सेल में स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन और होम अप्लायंसेज जैसी कैटेगरी ग्राहकों की पसंद में शामिल रहीं. रेडसीर की रिपोर्ट के मुताबिक, फेस्टिव सेल के शुरुआती दो दिनों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर करीब 24,000 करोड़ रुपये की खरीदारी हुई. इसमें स्मार्टफोन की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 38-40 फीसदी रही. इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की हिस्सेदारी 25-27 फीसदी और फैशन की हिस्सेदारी 15-18 फीसदी रही. स्मार्टफोन के अलावा लैपटॉप, टीवी, फ्रिज और एसी की भी अच्छी मांग रही. यूनिकॉमर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 6 अक्टूबर से 4 नवंबर के बीच फेस्टिव सीजन में ई-कॉमर्स ऑर्डर की संख्या सालाना आधार पर 21 फीसदी बढ़ी. इनमें 85 फीसदी ऑर्डर 1,000 रुपये से कम कीमत के थे. फैशन एक्सेसरीज, ऑर्गेनिक फूड, पर्सनल केयर और रोजमर्रा के इस्तेमाल के सामान की भी खूब खरीदारी हुई.
MRP से कैशबैक तक समझिए छूट का गणित
ऑनलाइन शॉपिंग में असली बचत जानने के लिए सिर्फ एमआरपी और सेल प्राइस देखना काफी नहीं है. बैंक डिस्काउंट, कैशबैक और दूसरे ऑफर को जोड़कर अंतिम कीमत निकालनी चाहिए. उदाहरण के लिए, किसी स्मार्टफोन की एमआरपी 30 हजार रुपये है और सेल में इसकी कीमत 25 हजार रुपये दिखाई जा रही है. इस पर बैंक कार्ड से भुगतान करने पर 1,500 रुपये की एडिशनल डिस्काउंट और 500 रुपये का कैशबैक मिलता है. ऐसे में फोन की प्रभावी कीमत 23 हजार रुपये होगी. इस तरह ग्राहक को एमआरपी के मुकाबले 7 हजार रुपये या करीब 23.3 फीसदी की बचत होगी.
शॉपिंग से पहले जरूर करें तुलना
सेल में सिर्फ एमआरपी नहीं देखनी चाहिए. ग्राहकों को यह भी देखना चाहिए कि सेल से पहले उसी प्रोडक्ट की कीमत कितनी थी. कई बार एमआरपी काफी ज्यादा रखी जाती है और उस पर बड़ी छूट दिखाकर सामान सस्ता होने का दावा किया जाता है. इसलिए खरीदारी से पहले दूसरे प्लेटफॉर्म और ऑफलाइन दुकानों पर भी कीमत की तुलना करें. डिलीवरी चार्ज, नो-कॉस्ट ईएमआई की शर्तें और कैशबैक की कैपिंग यानी मैक्सिमम कैशबैक भी जांचें. कस्टमर्स को यह बात ध्यान में रख बड़ी छूट का विज्ञापन हमेशा बड़ी बचत की गारंटी नहीं होता.
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