केंद्रीय बैंक RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों भारतीयों को राहत देने वाली बड़ी घोषणा की है. अगर आपके साथ ऑनलाइन बैंकिंग या डिजिटल पेमेंट के दौरान 5,000 रुपये तक का छोटा फ्रॉड होता है, तो आपको ये राशि मुआवजे के तौर पर वापस मिल जाएगी. RBI ने इसके लिए लिमिटेड लायबिलिटी फ्रेमवर्क लागू किया है. ये कब से लागू होगा, इस बारे में RBI गवर्नर ने 17 जुलाई को दूरदर्शन को दिए गए एक इंटरव्यू में बताया है. उन्होंने कहा कि ये प्रावधान, 1 जनवरी 2027 से पूरे देश में प्रभावी हो जाएगा.
...ताकि UPI पर बना रहे लोगों का भरोसा
गवर्नर ने स्पष्ट किया कि RBI का प्रयास धोखाधड़ी को रोकना (प्रिवेंशन) है, लेकिन फिर भी कोई गलती हो जाती है, तो इस नियम के तहत पीड़ित को तुरंत मुआवजा दिया जाएगा. इस कदम का उद्देश्य डिजिटल बैंकिंग और यूपीआई (UPI) जैसे प्लेटफॉर्म पर लोगों का विश्वास बनाए रखना है. गवर्नर ने बताया कि इसके अलावा RBI गांव-गांव तक ‘डिजिटल पेमेंट अवेयरनेस वीक' और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को ऑनलाइन ठगी से बचने की लगातार शिक्षा भी दे रहा है.
गवर्नर के मुताबिक, 'गलती से या अनजाने में यदि ग्राहकों के साथ छोटे ऑनलाइन फ्रॉड होते हैं, तो उन्हें 5,000 रुपये तक का मुआवजा देने का प्रावधान रखा गया है. इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल पेमेंट्स और डिजिटल बैंकिंग के ऊपर आम जनता और ग्राहकों का भरोसा हर हाल में बनाए रखना है.
फ्रॉड रोकने के लिए RBI का थ्री-स्टेप एक्शन प्लान
प्रिवेंशन (बचाव): आरबीआई का सबसे पहला प्रयास यह है कि बैंकों का सुरक्षा तंत्र इतना मजबूत हो कि फ्रॉड की नौबत ही न आए.
प्रोएक्टिव अप्रोच: अगर कोई गड़बड़ी होती है, तो आरबीआई का सुपरवाइज़री फ्रेमवर्क पुराना रिएक्टिव तरीका छोड़कर प्रोएक्टिवली (पहले से सक्रिय होकर) जोखिम की पहचान करेगा और उसे तुरंत रोकेगा.
अवेयरनेस : ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक डिजिटल पेमेंट अवेयरनेस वीक और सोशल मीडिया के जरिए 'आरबीआई कहता है' अभियान को और तेज किया जाएगा ताकि सीनियर सिटीजन और युवा लुभावने फ्रॉड मैसेज के जाल में न फंसें.
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