दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को हुई महारैली का असर अब राजधानी के कारोबार पर भी सामने आया है. चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के मुताबिक, इस एक दिन की महारैली से दिल्ली के व्यापार को करीब 11,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. CTI का दावा है कि रैली और ट्रैफिक प्रतिबंधों के चलते करीब 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं. इसका असर सिर्फ बाजारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ट्रांसपोर्ट, होटल, रेस्टोरेंट और टूरिज्म जैसे सेक्टर भी प्रभावित हुए. CTI ने सवाल उठाया है कि व्यापारियों, फैक्ट्री मालिकों और दुकानदारों को हुए इस नुकसान का मुआवजा कौन देगा?
एक दिन में ₹8,800 करोड़ का नुकसान
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, महारैली के चलते दिल्ली के रिटेल और थोक कारोबार को करीब 8,800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर के दायरे में कश्मीरी गेट, मोरी गेट, चांदनी चौक, चावड़ी बाजार, खारी बावली, नया बाजार, सदर बाजार, अजमेरी गेट, दरियागंज, पहाड़गंज, कमला मार्केट, जामा मस्जिद, भागीरथ पैलेस, लाजपत राय मार्केट, किनारी बाजार, दरीबा कलां, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाजार, कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, गफ्फार मार्केट और करोल बाग जैसे बड़े बाजार आते हैं.
CTI के अनुसार, इन इलाकों में करीब 3 लाख दुकानें हैं. इनमें से 2.5 लाख दुकानें पूरी तरह बंद रहीं और करीब 80 फीसदी कारोबार ठप रहा. यह नुकसान ऐसे समय हुआ, जब बाजारों में धनतेरस (6 नवंबर) और दिवाली (8 नवंबर) की तैयारियां चल रही थीं. यह त्योहारों से पहले कारोबार का पीक सीजन है.
बाहर से आने वाले 3-4 लाख ग्राहक नहीं पहुंचे
CTI का कहना है कि सोनीपत, पानीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, बहादुरगढ़ और झज्जर समेत आसपास के करीब 100 शहरों और कस्बों से रोजाना 3-4 लाख ग्राहक दिल्ली के बाजारों में खरीदारी करने आते हैं. लेकिन महारैली के दिन ट्रैफिक और आवाजाही की दिक्कतों के कारण लोगों में घबराहट रही और वे खरीदारी के लिए दिल्ली नहीं पहुंचे.
ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स को ₹1,500 करोड़ का नुकसान
महारैली का सबसे बड़ा असर ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स पर पड़ा. CTI के मुताबिक, रामलीला मैदान के 10 किलोमीटर के दायरे में ट्रांसपोर्ट व्यवस्था प्रभावित रही. लोडिंग-अनलोडिंग और माल की आवाजाही ठप हो गई.दिल्ली के नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका और उद्योग नगर समेत 56 इंडस्ट्रियल एरिया से रोजाना करीब 5,000 ट्रक और टेम्पो माल लेकर बाजारों में आते हैं. वहीं, इन बाजारों से करीब 3,000 ट्रक NCR और देश के दूसरे हिस्सों में माल लेकर जाते हैं. महारैली के दिन यह पूरी सप्लाई चेन प्रभावित हुई.
होटल, रेस्टोरेंट और टूरिज्म को ₹500 करोड़ की चपत
महारैली का असर होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन कारोबार पर भी पड़ा. CTI के मुताबिक, कनॉट प्लेस, करोल बाग, पहाड़गंज, चांदनी चौक और दरियागंज में 2,000 से ज्यादा होटल, रेस्टोरेंट, गेस्ट हाउस और ढाबों की बुकिंग कैंसिल हुई. घरेलू और विदेशी पर्यटक भी लाल किला, जामा मस्जिद और चांदनी चौक जैसे पर्यटन स्थलों पर नहीं पहुंच पाए. इस सेक्टर को करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
दिहाड़ी मजदूरों की कमाई पर भी असर
इस एक दिन की बंदी का असर छोटे कामगारों और दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ा. CTI के अनुसार, इन बाजारों में काम करने वाले करीब 20 लाख कर्मचारियों, लोडर, ऑटो-ई-रिक्शा चालकों, रेहड़ी-पटरी वालों, पोर्टर और कुलियों की एक दिन की कमाई प्रभावित हुई. इस अनौपचारिक क्षेत्र को करीब 200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. CTI का कहना है कि इस नुकसान की सबसे ज्यादा मार गरीब मजदूरों पर पड़ी है.
CTI ने उठाया मुआवजे का सवाल
CTI ने महारैली के कारण कारोबारियों, फैक्ट्री मालिकों और दुकानदारों को हुए नुकसान पर सवाल उठाया है. संगठन का कहना है कि जब एक दिन में दिल्ली के कारोबार को करीब 11,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, तो इसकी भरपाई कौन करेगा? व्यापारियों का सवाल है कि इस नुकसान के लिए उन्हें मुआवजा कौन देगा?
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