दिल्ली में 10 अक्टूबर को होने वाले CJP के विरोध प्रदर्शन देखते हुए प्रशासन ने सख्त पाबंदियां लगाई हैं. जंतर मंतर पर प्रदर्शन के चलते कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, जनपथ समेत पूरी सेंट्रल दिल्ली में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती से छावनी में बदल चुकी है. अक्सर गुलजार दिखने वाले कनॉट प्लेस में ग्राहकों की आवाजाही पहले की तुलना में कम हुई है. वहीं वीकेंड पर ग्राहकों की संख्या काफी हद तक कम होने की आशंका है. कारण कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सबसे अहम माध्यम दिल्ली मेट्रो बाधित रहने की आशंका है. 57 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद रहेंगे. ऐसे में कारोबारियों ने करोड़ों के नुकसान की आशंका जताई है.
आंदोलनों को जंतर-मंतर से कहीं और शिफ्ट किया जाए
कारोबारियों की इस चिंता के पीछे बड़ी वजह भी है. पिछली बार जब सीजेपी का ही प्रदर्शन हुआ था तो 4 दिन के भीतर व्यापारिक संगठनों ने 50 फीसदी कारोबार प्रभावित होने की बात कही थी. नुकसान का ये आंकड़ा 200 से 400 करोड़ के बीच आंका गया था. कारोबारी संगठन इसके पीदे बड़ी वजह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बीच प्रशासनिक पाबंदियों को मानते हैं. उनका मानना है कि आंदोलन स्थल कहीं और होता तो कारोबार इस हद तक प्रभावित नहीं होता. नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) अब जंतर-मंतर के धरना स्थल को दूसरी जगह शिफ्ट करने की मांग उठाने की तैयारी में है.

पिछली बार भी हुआ था करोड़ों का नुकसान
पिछली बार के दौरान कनॉट प्लेस, जनपथ और बंगाली मार्केट के कारोबारियों ने चार दिनों में करीब 200-400 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका जताई थी. ये कारोबारियों का अनुमान था. NDTA के महासचिव विक्रम बधवार ने तब कहा था कि सुरक्षा चिंताओं के कारण दिल्ली पुलिस के लगाए गए प्रतिबंधों से पूरे कनॉट प्लेस में सन्नाटा पसर जाता है. इस नुकसान से उबरने में कारोबारियों को काफी समय लगेगा.
कारोबारियों के मुताबिक, ग्राहकों की आवाजाही कम होने से होटल, रेस्तरां और कैफे के कारोबार पर बहुत बुरा असर पड़ा था. कुछ कारोबारियों ने तो बिक्री में 80% तक गिरावट की बात कही थी.
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