क्या भारत आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी AI की रेस में अमेरिका और चीन से पीछे रह गया है? दावोस (Davos) में हुई एक अहम चर्चा के दौरान यह सवाल उठा और इसका जवाब भी सामने आ गया. IBM के CEO अरविंद कृष्णा और भारत के IT मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने इस बात को साफ तौर पर खारिज किया कि भारत टेक और AI इनोवेशन में पीछे है. उन्होंने बताया कि भारत का AI फोकस अलग है और आने वाले समय में यही मॉडल सबसे ज्यादा काम आने वाला है.
दावोस में NDTV के CEO और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान IBM CEO अरविंद कृष्णा ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि भारत सिर्फ पुराने सिस्टम संभालता है और नया काम नहीं करता. उन्होंने साफ कहा कि भारत में जो काम हो रहा है, वह बिजनेस और एंटरप्राइज लेवल पर AI को बेहतर बनाने का है, जो दिखता भले कम है, लेकिन बेहद जरूरी है.
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Watch LIVE | IT Minister Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) and Arvind Krishna (@ArvindKrishna), chairman and CEO, IBM speak exclusively to NDTV editor-in-chief @rahulkanwal on what's next big thing for Indian tech
— NDTV (@ndtv) January 20, 2026
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कैसे बदलती है टेक की वैल्यू ?
अरविंद कृष्णा ने समझाया कि हर टेक बदलाव में पहले वैल्यू हार्डवेयर जैसे चिप्स में होती है, फिर ऑपरेटिंग सिस्टम में जाती है और आखिर में ऐप्स में शिफ्ट हो जाती है. उनका कहना था कि दस साल के अंदर करीब 90 फीसदी वैल्यू नए और स्मार्ट ऐप्स में चली जाती है. अगर भारत इस बदलाव को सही समय पर पकड़ ले, तो यहां इनोवेशन और निवेश दोनों तेजी से बढ़ सकते हैं.
बड़े AI मॉडल नहीं, स्मार्ट और छोटे मॉडल पर जोर
AI मॉडल को लेकर अरविंद कृष्णा ने कहा कि बहुत बड़े और भारी मॉडल आगे चलकर आम हो जाएंगे. उनकी कीमत कम हो जाएगी और उनमें ज्यादा फर्क नहीं रहेगा. ऐसे में भारत को छोटे लेकिन असरदार AI मॉडल बनाने चाहिए, जिनमें देश का अपना डेटा हो और जो खास जरूरतों के हिसाब से तैयार किए जाएं.
Sovereign AI पर सरकार का फोकस
आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत ने अपने सॉवरेन एआई मॉडल पहले ही एक बड़े डिफेंस से जुड़े मामले में इस्तेमाल किए हैं और नतीजे काफी अच्छे रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत को अलग-अलग सेक्टर के लिए छोटे AI मॉडल बनाने होंगे. तभी इसका सीधा फायदा इकॉनमी में दिखेगा.
भारतीय स्टार्टअप भी आगे
अश्विनी वैष्णव ने यह भी बताया कि भारत के कई स्टार्टअप नए और अलग तरीके से AI पर काम कर रहे हैं. एक स्टार्टअप ऐसा भी है जो टेक्स्ट की जगह सीधे साउंड से साउंड पर काम करने वाला AI मॉडल बना रहा है. यह दिखाता है कि भारत सिर्फ नकल नहीं कर रहा, बल्कि अपने रास्ते खुद बना रहा है.
AGI को लेकर अलग सोच
अरविंद कृष्णा ने AGI (Artificial General Intelligence) पर कहा कि इसे लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं. उनका मानना है कि सिर्फ ज्यादा डेटा और बड़ा मॉडल बना लेने से AGI नहीं आ जाएगा. अभी तक यह साफ नहीं है कि इंसानी समझ जैसी जानकारी AI में कैसे डाली जाए. यही असली चुनौती है.
सस्ते और असरदार AI मॉडल का फ्यूचर
IBM CEO का कहना है कि करीब 50 बिलियन पैरामीटर वाले AI मॉडल 100 गुना सस्ते होते हैं और इन्हें चलाना भी आसान होता है. ऐसे मॉडल ज्यादा लोगों और कंपनियों के लिए AI को संभव बनाते हैं. यही रास्ता आने वाले समय में इनोवेशन को तेज करेगा.
दावोस की इस चर्चा ने साफ कर दिया कि भारत AI में पीछे नहीं है, बस उसका तरीका अलग है. भारत बड़े दिखने वाले मॉडल की जगह काम के और सस्ते AI पर फोकस कर रहा है. सरकार और कंपनियां दोनों मिलकर ऐसा AI बना रही हैं, जो सीधे देश और इकॉनमी के काम आए.
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