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Crude Oil Price: लगातार दूसरे दिन गिरे कच्चे तेल के दाम, ब्रेंट क्रूड $88 के नीचे पहुंचा, ये है बड़ी वजह

भले ही अभी कीमतें कम हुई हैं, लेकिन दुनिया का 20% तेल Strait of Hormuz के रास्ते से गुजरता है, जो फिलहाल युद्ध के कारण लगभग बंद है. जानकारों का कहना है कि जब तक यह रास्ता सुरक्षित नहीं होता, तेल की कीमतों में फिर से उछाल आने का खतरा बना रहेगा.

Crude Oil Price: लगातार दूसरे दिन गिरे कच्चे तेल के दाम, ब्रेंट क्रूड $88 के नीचे पहुंचा, ये है बड़ी वजह
Crude Oil Price Crash: ब्रेंट क्रूड $120 के स्तर को छू लिया था जो अब गिरकर $88 पर आ गया है.
नई दिल्ली:

दुनियाभर में मचे युद्ध के शोर के बीच आम आदमी के लिए राहत भरी खबर आई है. कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतों पर अब लगाम लगती दिख रही है. बुधवार, 13 मार्च को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम नीचे गिरे हैं, जिससे भारत जैसे देशों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के उस बड़े प्लान के बाद आई है, जिसमें इतिहास का सबसे बड़ा 'तेल भंडार' (Oil Reserves) खोलने का प्रस्ताव रखा गया है.

क्यों गिरे कच्चे तेल के दाम?

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह Wall Street Journal की एक रिपोर्ट है. रिपोर्ट के मुताबिक, IEA ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा इमरजेंसी ऑयल रिजर्व मार्केट में उतारने का प्रस्ताव दिया है. यह 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान जारी किए गए 18.2 करोड़ बैरल से भी ज्यादा होगा. 

इस खबर के आते ही बुधवार को ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) के दाम 0.26% गिरकर $87.57 और अमेरिकी क्रूड (WTI) 0.44% गिरकर $83.08 पर आ गए.

 $120 से $88 तक का सफर

अभी सोमवार को ही मिडिल ईस्ट वॉर की चिंताओं के कारण ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के पार चला गया था और यह $120 के स्तर को छू लिया था. लेकिन मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान ने तेल मार्केट में लगी आग को ठंडा कर दिया कि  जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान के साथ युद्ध जल्द खत्म होगा. साथ ही, G7 देशों द्वारा अपने स्टॉक से तेल निकालने की चर्चा ने भी कीमतों को नीचे धकेल दिया है.

Strait of Hormuz की टेंशन

भले ही अभी कीमतें कम हुई हैं, लेकिन बाजार अब भी डरा हुआ है. दुनिया का 20% तेल Strait of Hormuz के रास्ते से गुजरता है, जो फिलहाल युद्ध के कारण लगभग बंद है. जानकारों का कहना है कि जब तक यह रास्ता सुरक्षित नहीं होता, तेल की कीमतों में फिर से उछाल आने का खतरा बना रहेगा. साल की शुरुआत से अब तक तेल के दाम करीब 50% तक बढ़ चुके हैं.

भारत के लिए क्यों जरूरी है यह गिरावट?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है. जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं, भारत का आयात बिल (Import Bill) बढ़ जाता है और सीधा असर आपकी जेब पर पेट्रोल-डीजल के रेट के रूप में पड़ता है. फरवरी 2026 में भारतीय बास्केट के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत $69.01 थी, जो अब काफी बढ़ चुकी है. ऐसे में IEA का तेल छोड़ना भारत के लिए बड़ी राहत होगी.
 

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