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सीमेंट 30% और स्टील 10% महंगी, घर खरीदारों का सपना अधर में, क्रेडाई ने सरकार से मांगी 6 महीने की मोहलत

एलपीजी यानी कि रसोई गैस की किल्लत की वजह से शहरों से श्रमिक गावों की तरफ वापस जा रहे हैं, जिसकी वजह से रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के कामकाज पर असर पड़ रहा है. काम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है.

सीमेंट 30% और स्टील 10% महंगी, घर खरीदारों का सपना अधर में, क्रेडाई ने सरकार से  मांगी 6 महीने की मोहलत
मिडिल ईस्ट संकट की वजह से रियल एस्टेट सेक्टर के लोग परेशान. (AI फोटो)
  • पश्चिम एशिया संकट के कारण रियल एस्टेट प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं, जिससे सेक्टर के लोग पेरशान हैं
  • क्रेडाई ने आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय को आपातकाल घोषित करने और परियोजना समय बढ़ाने की मांग की है
  • मजदूरों की कमी और बढ़ती लागतों के कारण देशभर में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट की डिलीवरी में देरी हो रही है
नई दिल्ली:

पश्चिम एशिया में चल रहे संकट का असर रियल एस्टेट सेक्टर पर भी पड़ रहा है. वायदे के मुताबिक प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं. जिसकी वजह से इस सेक्टर से जुड़े लोग परेशान हैं. इसे लेकर रियल एस्टेट एसोसिएशन ने आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय को एक पत्र लिखा है. सप्लाई चेन और लेबर संबंधी परेशानियों का जिक्र करते हुए एसोसिएशन क्रेडाई ने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए राहत की मांग की है.उन्होंने कहा है कि इसे अप्रत्याशित आपातकाल घोषित किया जाए. डेवलपर्स ने रेरा अथॉरिटीज से मांग की है कि प्रोजेक्ट पूरा करने का समय 3-6 महीने और बढ़ा दिए जाएं. 

मजदूरों की कमी, कैसे पूरा होगा कंस्ट्रक्शन का काम?

इंडस्ट्री का कहना है कि बढ़ती इनपुट लागत, लॉजिस्टिक्स लागत और श्रमिकों की कमी की वजह से देशभर में प्रोजेक्ट की डिलीवरी में देरी हो रही है. उनका कहना है कि काम पूरा करने के लिए पर्याप्त श्रमिक मौजूद ही नहीं हैं. 

रियल एस्टेट सेक्टर में रुकावट की वजह जानें

एलपीजी यानी कि रसोई गैस की किल्लत की वजह से शहरों से श्रमिक गावों की तरफ वापस जा रहे हैं, जिसकी वजह से प्रोजेक्ट के कामकाज पर असर पड़ रहा है. प्रोजेक्ट के काम पर लगे श्रमिकों की कमी हो गई है इसीलिए काम पूरा होने में देरी हो रही है. बता दें कि ईंधन की कमी की वजह से मोरबी सिरेमिक हब में आई अस्थायी रुकावट से टाइलों की कीमतें 35% तक बढ़ा दी गई हैं.

 सीमेंट, स्टील और एल्युमीनियम सब महंगा हो गया

ऊर्जा संबंधी अनिश्चितताओं की वजह से सीमेंट, स्टील और एल्युमीनियम की सप्लाई चेन पर भी दबाव बढ़ने लगा है. बता दें कि मिडिल ईस्ट संघर्ष शुरू होने के बाद से सीमेंट की कीमतों में 30%, स्टील की कीमतों में 5-10%, एल्युमीनियम की कीमतों में 8-12%, कच्चे तेल की कीमतों में 46-60% और कुल कंस्ट्रक्शन की कीमत 6-10% बढ़ गई है. 


 इनपुट- रिद्धिमा

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