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सेमीकंडक्‍टर मिशन 2.0 और मोबाइल निर्माण स्‍कीम को सरकार की मंजूरी, 2 लाख करोड़ रुपये से बदलेगी भारत की सूरत

केंद्रीय कैबिनेट ने 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM) के दूसरे चरण के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट को मंज़ूरी दे दी है.

सेमीकंडक्‍टर मिशन 2.0 और मोबाइल निर्माण स्‍कीम को सरकार की मंजूरी, 2 लाख करोड़ रुपये से बदलेगी भारत की सूरत
अश्विनी वैष्णव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM) के दूसरे चरण के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है. साथ ही मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को भी मंजूरी दी है. सरकार ने इसके लिए 62,500 करोड़ रुपये के फंड को भी मंजूरी दी है. कैबिनेट के फैसलों के बारे में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को बताया कि 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM) की अवधि को 5 साल से बढ़ाकर 12 साल कर दिया है. इस कदम से भारत में एक मजबूत घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने की कोशिशों को बल मिलने की उम्मीद है.  

सेमीकंडक्‍टर मिशन का क्या है मकसद?

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस नए आवंटन का मकसद भारत के सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को तेज़ी देना है. साथ ही घरेलू चिप उत्पादन को मज़बूत करना है. इसके अलावा ग्लोबल निवेश को आकर्षित करना और सेमीकंडक्टर के आयात पर देश की निर्भरता को कम करना है. समय-सीमा बढ़ाने का मकसद चिप डिज़ाइन, फैब्रिकेशन और पैकेजिंग यूनिट्स में निवेश करने वालों को ज़्यादा पॉलिसी स्टेबिलिटी देना है.

ISM 1.0 के तहत, सरकार ने सेमीकंडक्टर बनाने के 12 प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी थी, जिनमें कुल मिलाकर लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये का निवेश होना था. इन प्रोजेक्ट्स में एक सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट, दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट और नौ पैकेजिंग फैसिलिटीज़ शामिल थीं.

ISM 2.0, जिसकी घोषणा सबसे पहले 2026-27 के केंद्रीय बजट में की गई थी, का फोकस पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन (चिप डिज़ाइन, फैब्रिकेशन और पैकेजिंग) पर रहने की उम्मीद है. साथ ही, यह सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट, मटीरियल और घरेलू इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के घरेलू उत्पादन को भी बढ़ावा देगा.

सूत्रों के मुताबिक, मिशन की समय-सीमा को बढ़ाकर 12 साल करने का मकसद ग्लोबल और घरेलू निवेशकों को लंबे समय के लिए पॉलिसी से जुड़ी निश्चितता देना है, क्योंकि भारत ग्लोबल चिप सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मज़बूत करना चाहता है.

मोबाइल निर्माण और एक्‍सपोर्ट का 'बादशाह' बन सकता है भारत 

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम की चर्चा करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. 2014 की तुलना में उत्पादन में सात गुना और निर्यात में 11 गुना की वृद्धि हुई है. आज 62,500 करोड़ रुपये की MPMS स्‍कीम को मंजूरी मिली है.   

उन्‍होंने कहा, 'भारत मोबाइल फोन के आयातक (इंपोर्टर) देश से बदलकर अब एक निर्यातक (नेट एक्सपोर्टर) बन गया है और वैश्विक स्तर पर मोबाइल फोन का दूसरा सबसे बड़ा निर्माता बन चुका है.  निर्यात में भी काफी बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले साल 4.24 लाख करोड़ तक पहुंच गया.ये अन्य कई सेक्‍टर्स के लिए भी एक ड्राइवर के रूप में काम करता है. निर्यात रैंकिंग के मामले में, इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र 9वें स्थान से चढ़कर तीसरे स्थान पर आ गया है. इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्‍युफैक्‍चरिंग में मोबाइल फोन मैन्‍युफैक्‍चरिंग की हिस्सेदारी 10% से बढ़कर 48% हो गई, और निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 4% से बढ़कर 61% पर पहुंच गई है.'  आज, इस MPMS को मंजूरी मिल गई है, तो इसे और रफ्तार मिलेगी.'   

कैबिनेट के अन्य फैसले

कैबिनेट ने 62,500 करोड़ रुपये के बजट वाली एक नई मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को भी मंज़ूरी दी है.

कैबिनेट ने यूरिया सेक्टर के लिए एक नई निवेश नीति को मंज़ूरी दी है और साथ ही FY26 के लिए यूरिया सब्सिडी जारी रखने का फ़ैसला भी किया है.

इन फैसलों का मकसद घरेलू यूरिया उत्पादन क्षमता को बढ़ाना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को चालू वित्त वर्ष में सब्सिडी वाली दरों पर खाद मिलती रहे.

ISM 2.0 के लिए तय की गई रकम, मिशन के पहले चरण (जिसे दिसंबर 2021 में कैबिनेट ने मंज़ूरी दी थी) में आवंटित 76,000 करोड़ रुपये से काफी ज़्यादा है.

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