- बजट 2026 में पार्ट-B अब केवल टैक्स नहीं, बल्कि विकसित भारत के दीर्घकालिक आर्थिक विजन का रोडमैप होगा.
- मुख्य फोकस सेक्टर्स- इंफ्रास्ट्रक्चर, मेन्युफैक्चरिंग, एफडीआई, रोजगार, कौशल और ग्लोबल सप्लाई चेन.
- यह 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने का गाइडलाइन देगा. इसमें नीति, निवेश व संरचनात्मक सुधार होंगे.
रविवार की सुबह 11 बजे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम बजट 2026 पेश करेंगी. बजट 2026-27 सिर्फ वित्तीय अनुमान नहीं, बल्कि 'विकसित भारत 2047' का एक विजन डॉक्यूमेंट भी बनने जा रहा है. इस बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए पार्ट-B पर पूरा ध्यान केंद्रित किया है, जो देश के दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्य और स्ट्रैटेजिक रोडमैप को परिभाषित करेगा. सूत्रों के मुताबिक इस बार पार्ट-B का फोकस विकसित भारत के विजन 2047 पर होगा, जिसमें लोकल पावर को विश्व स्तर पर खड़ा करना, ग्लोबल सप्लाई चेन में भागीदारी, कौशल, रोजगार और दीर्घकालिक आर्थिक रणनीतियां शामिल होंगी.
इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपेक्स
इसमें भारत की बुनियादी ढांचा क्षमता को मजबूत करना प्राथमिकता होगा. जहां सड़कों, रेलवे, एयरपोर्ट, और डिजिटल नेटवर्क तक निवेश बढ़ाने पर जोर होगा जिससे आर्थिक गति को लंबे समय तक और लास्ट माइल पीपल तक पहुंचाया जा सके.
मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट्स
भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने पर जोर रहेगा. मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता और एक्सपोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सहायता और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) उपायों का विस्तार अपेक्षित है. साथ ही अहम फोकस लॉजिस्टिक्स सेक्टर की चुनौतियों पर होगा. जिसे दूर करके निर्यात क्षमता को बढ़ाने पर जोर देने की बात खुद प्रधानमंत्री करते रहे हैं.
स्वदेशी और ग्लोबल इंटीग्रेशन
स्थानीय उत्पादों और सेवाओं को ग्लोबल सप्लाई चेन में शामिल करने की रणनीति तैयार करने पर भी खासा जोर होगा. भारत ने यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया जिसकी चर्चा खूब हुई. इसके अलावा भी कई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं.
इससे पहले स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और आइसलैंड से मिलकर बने चार देशों के EFTA ब्लॉक, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के साथ भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए गए हैं. जल्द ही चिली के साथ भी समझौता होने वाला है. जिससे वहां रेयर मिनरल तक भारत की पहुंच बनेगी.
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इतना ही नहीं, मुक्त व्यापार समझौता के तहत न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्ष में भारत में 20 बिलियन डॉलर का निवेश करने का आश्वासन दिया है, जबकि बीते 25 वर्ष में उसका कुल निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था में सिर्फ 70 मिलियन डॉलर रहा है.
भारत के वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए भारत में बड़े स्तर पर भारत में विदेशी निवेश का रास्ता खुला है.
रोजगार, कौशल और मानव संसाधन विकास
एक दिन पहले ही पीयूष गोयल ने बताया कि EFTA देशों के साथ हुए समझौते के तहत भारत में 100 बिलियन डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की प्रतिबद्धता शामिल है, जिसका उद्देश्य इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण, नवाचार और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करना है. इस निवेश से लगभग 50 लाख रोजगार पैदा होने की संभावना है.
इसके साथ ही देश की मानव पूंजी को विकसित करना और युवाओं के स्किल डेवलपमेंट पर बड़ा जोर रहेगा. रोजगार और कौशल कार्यक्रमों के जरिए आउटपुट-ड्रिवन वृद्धि सुनिश्चित करने की योजना है.
एफडीआई और निवेश आकर्षण
खुली नीतियों के माध्यम से विदेशी निवेशकों को आकर्षित करना और प्रमुख क्षेत्रों में निवेश को आसान बनाना भी बजट का लक्ष्य है. उदाहरण के तौर पर, EFTA समझौते के तहत लगभग 100 बिलियन डॉलर FDI और 50 लाख रोजगार सृजन की संभावना देखी जा रही है.
लॉन्ग-टर्म विजन: 2047
पार्ट-B में मीडियम और लॉन्ग-टर्म लक्ष्य तय होंगे, ताकि भारत 2047 तक विकसित देश के लक्ष्य की दिशा में मार्ग तय कर सके- जैसे कि सतत आर्थिक विकास, स्थिरता और टेक्नोलॉजी आदि.
भारत ने FTA और वैश्विक साझेदारियों को मजबूती दी है, जिससे निर्यात और निवेश के नए अवसर मिल रहे हैं. लॉजिस्टिक्स, इन्फ्रास्ट्रक्चर और क्लाइमेट टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स में नीतिगत मांगें उभर रही हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि बजट 2026 स्थिर आर्थिक वृद्धि और 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तक पहुंचने में बड़ा योगदान देगा.
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