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देश के विकास पर रिकॉर्ड खर्च करेगी सरकार! वित्त वर्ष 2027 में ₹12 लाख करोड़ के पार जा सकता है बजट; SBI की रिपोर्ट में बड़ा दावा

एसबीआई रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आने वाला केंद्रीय बजट 2026 एक ऐसी ग्लोबल स्थिति में आ रहा है जहां दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में काफी उतार-चढ़ाव है.

देश के विकास पर रिकॉर्ड खर्च करेगी सरकार! वित्त वर्ष 2027 में ₹12 लाख करोड़ के पार जा सकता है बजट; SBI की रिपोर्ट में बड़ा दावा
Budget 2026 : एसबीआई ने सलाह दी है कि कुल सरकारी कर्ज में राज्यों की बड़ी हिस्सेदारी होती है.
नई दिल्ली:

भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक बड़ी और पॉजिटिव खबर सामने आई है. देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई (SBI) की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार आने वाले समय में देश के विकास और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर अपनी जेब खोलने वाली है. अनुमान है कि साल 2027 तक सरकार का 'पूंजीगत खर्च' यानी कैपेक्स (Capex) 10% बढ़कर ₹12 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर सकता है.

GDP और महंगाई को लेकर क्या है अनुमान? 

एसबीआई रिसर्च का मानना है कि इस दौरान भारत की नॉमिनल जीडीपी (Nominal GDP) की ग्रोथ रेट 10.5% से 11% के बीच रह सकती है. हालांकि, रिपोर्ट में एक चेतावनी भी दी गई है कि दुनिया भर में धातुओं (Metals) की कीमतों में तेजी आने से थोक महंगाई बढ़ सकती है, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है.

राजकोषीय घाटा और उधारी का गणित 

एसबीआई के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्या कांति घोष के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में सरकार का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) जीडीपी का 4.2% रह सकता है. वहीं, देश को अपनी जरूरतों के लिए बाजार से लगभग 11.7 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध उधारी (Net Borrowing) लेनी पड़ सकती है. उधारी की लागत भी 6.8% से 7% के बीच रहने का अनुमान है.

बजट 2026 और ग्लोबल मार्केट का असर 

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आने वाला केंद्रीय बजट 2026 एक ऐसी ग्लोबल स्थिति में आ रहा है जहां दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में काफी उतार-चढ़ाव है. ग्लोबल स्तर पर देशों के बीच तालमेल की कमी की वजह से शेयर बाजार और बॉन्ड मार्केट में गिरावट देखी जा रही है. ऐसे में भारत को अपने खर्चों का नियोजन (Planning) बहुत सोच-समझकर करना होगा.

राज्यों की भूमिका पर विशेष जोर 

एसबीआई ने सलाह दी है कि कुल सरकारी कर्ज में राज्यों की बड़ी हिस्सेदारी होती है. इसलिए राज्यों को सिर्फ सालाना घाटे के टारगेट पर निर्भर रहने के बजाय, लंबे समय के विकास को ध्यान में रखकर अपने कर्ज का प्रबंधन करना चाहिए. बजट में इस बात को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं ताकि देश की आर्थिक नींव और मजबूत हो सके.

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