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Budget 2026: हर साल बजट के लिए सरकार को कहां से आता है पैसा, 1-1 पाई का हिसाब ये रहा

बजट को लेकर एक सवाल जो लोगों के मन में होता है, वो ये कि सरकार के पास इतना पैसा आता कहां से है. और आने के बाद सरकार इन पैसों को कहां-कहां खर्च करती है. यानी बजट की सबसे 'असल' कहानी यहीं से शुरू होती है. हम भी इसे समझने की कोशिश करेंगे.

Budget 2026: हर साल बजट के लिए सरकार को कहां से आता है पैसा, 1-1 पाई का हिसाब ये रहा
Budget 2026: सरकार की कमाई और खर्चे का पूरा हिसाब

देश का बजट (Budget 2026) आने में अब कुछ ही दिन रह गए हैं. हर साल हर वर्ग के लोगों को बजट से बड़ी-बड़ी उम्‍मीदें होती हैं. इस बार किस पर टैक्स बढ़ेगा, किसे राहत मिलेगी, सरकार कौन-सी नई योजनाएं लाएगी, शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य वगैरह पर कितना खर्च करेगी... ऐसे तमाम सवाल हमारे और आपके भी मन में होते हैं. बजट में कई-कई लाख करोड़ रुपये का प्रावधान और आवंटन किया जाता है. ऐसे में एक और सवाल जो लोगों के मन में होता है, वो ये कि सरकार के पास इतना पैसा आता कहां से है. और आने के बाद सरकार इन पैसों को कहां-कहां खर्च करती है.

यानी बजट की सबसे 'असल' कहानी यहीं से शुरू होती है. हम भी इसे समझने की कोशिश करेंगे. इसे एक रुपये के आंकड़े से समझते हैं कि रुपया सरकार के पास आता कहां से है और फिर जाता कहां है. 

सरकार के पास कहां से आता है कितना पैसा?

पहले कमाई की बात कर लेते हैं. सरकार के पास आने वाला हर 1 रुपया कई रास्तों से बनता है. सबसे बड़ा हिस्सा आता है उधार और अन्य प्राप्तियों से, करीब 24%.  यानी सरकार के कुल पैसों का एक बड़ा भाग लोन/उधार से जुटता है. 1 रुपये में बात करें तो 24 पैसे यहीं से आते हैं. 

इसके बाद इनकम टैक्स/आयकर से 22% और जीएसटी से 18% हिस्सा आता है. कॉरपोरेट टैक्स भी आय का बड़ा स्रोत है, जहां से 17% पैसे आते हैं. 

इसके अलावा उत्पाद शुल्क (5%), कस्टम ड्यूटी/सीमा शुल्क (4%) और नॉन-टैक्स प्राप्तियां (9%) जैसी मदें हैं. पूंजीगत प्राप्तियां सिर्फ 1% रहती हैं.

नीचे दिए गए ग्राफिक्‍स में समझिए. 

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सरकार कहां-कहां कितने पैसे खर्च करती है?

ये सिक्‍के का दूसरा पहलू है, यानी खर्च. केंद्र सरकार के हर 1 रुपये में से सबसे बड़ा 'पहला दावेदार' होता है पुराना कर्ज, यानी वर्ल्‍ड बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक वगैरह से जो देश के विकास कार्यों में लगाने के लिए कर्ज लिए जाते हैं, उनका ब्‍याज चुकाने में बड़ा हिस्‍सा खर्च होता है. ये आंकड़ा 20% है. यानी 1 रुपये में बात करें तो ये 20 पैसे होगा. 

इसके बाद बड़ा हिस्सा राज्यों को ट्रांसफर में जाता है. टैक्स और आयात शुल्क में राज्यों का हिस्सा अकेले 22% है. साथ ही वित्त आयोग और अन्य मद में भी 8% जाता है. यानी 1 रुपये में कुल 30 पैसे राज्‍यों को उनकी हिस्‍सेदारी के तौर पर जाते हैं. 

फिर आता है विकास और सुरक्षा वाला हिस्सा, केंद्र सरकार की योजनाएं 16%, केंद्र प्रायोजित योजनाएं 8%, और डिफेंस 8%. सब्सिडी में 6%, पेंशन में 4%, और अन्य मदों में 8% खर्च होते हैं.

इसे भी आप ग्राफिक्‍स में देख-समझ सकते हैं. 

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बजट की असली तस्वीर कुल मिलाकर यही है. सरकार का रुपया जितना आता है, खर्च भी कम नहीं होता. इसलिए बजट में घोषणाएं जितनी अहम हैं, उतना ही अहम है ये समझना कि रुपये का भार किन कंधों पर है, और उसका लाभ किन तक पहुंचता है.

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