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Bank Strike: बैंकों में 11 सितंबर ही नहीं, इन तारीखों को भी हड़ताल, जानिए 5-डे बैंकिंग समेत क्‍या हैं बैंककर्मियों की मांगे

Bank Unions Strike: बैंक कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग है कि बैंकों में हर शनिवार को छुट्टी (5-Day Banking) घोषित की जाए.दो साल से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी वित्त मंत्रालय से इसे हरी झंडी नहीं मिली है.

Bank Strike: बैंकों में 11 सितंबर ही नहीं, इन तारीखों को भी हड़ताल, जानिए 5-डे बैंकिंग समेत क्‍या हैं बैंककर्मियों की मांगे
Bank Strike in september 2026: हड़ताल पर जा रहे हैं 8 लाख बैंक कर्मचारी

Bank employees Strike: अगर आप इस महीने बैंक से जुड़े जरूरी काम निपटाने की सोच रहे हैं, तो बिना देर किए फटाफट अपना काम पूरा कर लीजिए. सितंबर और अक्टूबर के महीने में देश के लाखों बैंक कर्मचारी हड़ताल पर जा रहे हैं. इस वजह से एक-दो दिन नहीं, बल्कि कई दिनों तक बैंकों में कामकाज ठप हो सकता है जिससे आपको भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. आइए जानते हैं कि बैंक कर्मचारी कब और क्यों सड़कों पर उतर रहे हैं और उनकी क्या-क्या मांगे हैं.

कब-कब बैंकों में हड़ताल रहेगा?

बैंक कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन 'यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस' (UFBU) ने देशव्यापी आंदोलन का ऐलान करते हुए इसका शेड्यूल भी जारी किया है. बैंक हड़ताल की तरीख को नेट करके पहले से ही  बैकिंग से जुड़े काम निपटा लीजिए.

  • 11 सितंबर: 1 दिन का देशव्यापी हड़ताल.
  • 28 से 30 सितंबर: लगातार 3 दिनों की राष्ट्रव्यापी .
  • 26 अक्टूबर से: अनिश्चितकालीन (Indefinite) हड़ताल.

बैंक यूनियंस का क्या कहना है?

UFBU के मुताबिक 11 सितंबर को बैंकों के कर्मचारी पूरे देश में 1 दिन का  हड़ताल करेंगें. मामला यही खत्म नहीं होने वाला है इसके बाद महीने के आखिर में भी बैंक कर्मचारियों ने लगातार 3 दिनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल करने की बात कही है. 28 सितंबर, 29 सितंबर और 30 सितंबर को बैंक बंद रखकर काम ठप किया जाएगा. 

इतना ही नहीं, अगर इसके बावजूद बात नहीं बनी, यानी बैंक कर्मचारियों की मांग पूरी नहीं हुई तो 26 अक्टूबर से कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे,जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं.

8 लाख बैंक कर्मचारी सड़क पर उतरेंगे, क्या है उनकी डिमांड?

UFBU का दावा है कि इस आंदोलन में सरकारी, प्राइवेट, विदेशी, ग्रामीण और कोऑपरेटिव बैंकों के 90% से ज्यादा कर्मचारी शामिल होने वाले हैं. यानी देश के करीब 8 लाख  बैंक कर्मचारी  हड़ताल पर रहने वाले हैं. यूनियनों का साफ कहना है कि सरकार और बैंक मैनेजमेंट  की लगातार अनदेखी की वजह से उन्हें मजबूरी में यह कड़ा कदम उठाना पड़ रहा है. 

अब जान लीजिए आखिर बैंक कर्मचारी हड़ताल पर जाने पर क्यों अड़े हुए हैं... सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने के पीछे उनकी मांगें क्या-क्या है...

5-डे बैंकिंग तुरंत लागू की जाए

कर्मचारियों की सबसे पुरानी और बड़ी मांग बैंकों में 5-डे वर्क वीक लागू करने की है.  मार्च 2024 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और यूनियनों के बीच यह  समझौता हुआ था कि सभी शनिवार को छुट्टी(5-Day Banking) घोषित की जाएगी. शनिवार की छुट्टी के बदले कर्मचारी सोमवार से शुक्रवार तक रोज 40 मिनट एक्स्ट्रा काम करने को तैयार हैं. इससे ग्राहकों के लिए बैंक का समय बिल्कुल कम नहीं होगा और जिससे उन्हें कोई  परेशानी नहीं होगी. हालांकि, दो साल से ज्यादा का समय  बीत जाने के बाद भी वित्त मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है.

नई PLI स्कीम में भेदभाव का विरोध

बैंक कर्मियों के हड़ताल की दूसरी सबसे बड़ी वजह सरकार द्वारा लाई गई नई परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम है. पुराने 2020 के नियम के तहत बैंक के कुल मुनाफे के आधार पर सभी छोटे-बड़े कर्मचारियों को बराबर इंसेंटिव  1 से 15 दिन का इंसेंटिव मिलता था. लेकिन नए नियम में केवल 5% वरिष्ठ अधिकारियों  (Scale IV to VII)को ही उनकी इंडिविजुअल परफॉर्मेंस के हिसाब से 365 दिन तक के वेतन का भारी इंसेंटिव दिया जाएगा. यूनियनों का कहना है कि बाकी 95% कर्मचारियों को केवल 1 दिन का इंसेंटिव मिलेगा, जबकि 5% अफसरों पर सारा फंड खर्च कर दिया जाएगा.बैंक यूनियन इसी भेदभाव को खत्म करने की मांग कर रही है.

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