सैलरीड लोगों के लिए खुशखबरी है. साल 2026 में आपकी सैलरी में अच्छी बढ़ोतरी होने वाली है. फरवरी का महीना खत्म होने को है और अब हर कर्मचारी की नजर अपने अप्रेजल (Appraisal) पर टिकी है. ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म Aon की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल भारतीय कंपनियों का मूड काफी पॉजिटिव नजर आ रहा है और कंपनियां अपने टैलेंट को रोककर रखने के लिए दिल खोलकर पैसा खर्च करने को तैयार हैं.
सैलरी में पिछले साल के मुकाबले ज्यादा इजाफा
Aon के 'एनुअल सैलरी इंक्रीज एंड टर्नओवर सर्वे 2025-26' के मुताबिक, भारत में इस साल एवरेज सैलरी हाईक 9.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है. यह पिछले साल यानी 2025 में मिली 8.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी से थोड़ा ज्यादा है. यह सर्वे देश की 45 अलग-अलग इंडस्ट्रीज की 1,400 से ज्यादा कंपनियों के डेटा पर आधारित है, जो यह संकेत देता है कि बाजार में तेजी बनी हुई है.
किस सेक्टर को मिलेगा सबसे ज्यादा सैलरी हाईक?
इस साल रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर (Real Estate & Infrastructure) सेक्टर के कर्मचारियों की चांदी होने वाली है, क्योंकि यहाँ सबसे ज्यादा 10.2 प्रतिशत की औसत बढ़ोतरी की उम्मीद है. इसके बाद नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) का नंबर आता है, जहां कर्मचारियों को 10.1 प्रतिशत का हाईक मिल सकता है.
ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग डिजाइन सर्विसेज में 9.9 प्रतिशत, जबकि मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल सेक्टर में 9.5 प्रतिशत तक सैलरी बढ़ने का अनुमान लगाया गया है.

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वर्कफोर्स में स्टेबिलिटी और गिरता एट्रिशन रेट
कंपनियों के लिए एक अच्छी खबर यह भी है कि अब कर्मचारी नौकरी कम छोड़ रहे हैं. सर्वे के अनुसार, एट्रिशन रेट यानी नौकरी छोड़ने की दर साल 2025 में गिरकर 16.2 प्रतिशत पर आ गई है, जो कोरोना से पहले के स्तर के करीब है. यह रेट 2023 में 18.7 प्रतिशत और 2024 में 17.7 प्रतिशत थी. इसका मतलब है कि कंपनियों में वर्कफोर्स स्टेबिलिटी बढ़ रही है और कर्मचारी अपने संस्थानों पर ज्यादा ट्रस्ट जता रहे हैं.
न्यू लेबर कोड और कंपनसेशन स्ट्रक्चर
आने वाले समय में न्यू लेबर कोड (New Labour Code) के लागू होने से सैलरी और कंपनसेशन (Compensation) के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. नए नियमों की वजह से कंपनियां अपने सैलरी स्ट्रक्चर को फिर से रीस्ट्रक्चर कर रही हैं ताकि सोशल सिक्योरिटी के नियमों का पालन किया जा सके.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंपनियों को अपने कर्मचारियों के साथ इन बदलावों को लेकर खुलकर बात करनी चाहिए ताकि वर्कफोर्स में स्टेबिलिटी और भरोसा बना रहे.
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