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EPFO Rules: नए लेबर कोड में क्या बदल जाएंगे PF के नियम? सरकार ने दिया ये जवाब, करोड़ों कर्मचारियों की टेंशन खत्म

EPFO से जुड़े करोड़ों कर्मचारियों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि नए लेबर कोड की वजह से तुरंत कोई बड़ा बदलाव नहीं होने वाला है.मौजूदा EPF स्कीम पहले की तरह जारी रहेगी और अगर कोई बदलाव होंगे तो वे नए नियम लागू होने के बाद धीरे-धीरे किए जाएंगे.

EPFO Rules: नए लेबर कोड में क्या बदल जाएंगे PF के नियम? सरकार ने दिया ये जवाब, करोड़ों कर्मचारियों की टेंशन खत्म
EPF Rules Change under New Labour Code: नए लेबर कोड लागू होने के बाद भी EPF सिस्टम तुरंत नहीं बदलेगा और बदलाव धीरे-धीरे लागू किए जाएंगे.
नई दिल्ली:

नए लेबर कोड्स (New Labour Codes) को लेकर कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) के नियम बदल जाएंगे. इस मुद्दे पर सरकार ने संसद में साफ जवाब दे दिया है.राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कहा है कि फिलहाल EPFO स्कीम में कोई खास बदलाव करने की योजना नहीं है. सरकार के अनुसार नए लेबर कोड लागू होने के बाद भी मौजूदा EPF सिस्टम कुछ समय तक पहले की तरह ही जारी रहेगी.

संसद में सरकार ने क्या कहा?

राज्यसभा सांसद संदोष कुमार पी ने सरकार से पूछा था कि क्या नए लेबर कोड के तहत EPFO स्कीम में बदलाव किए जाएंगे और क्या EPF जमा पर मिलने वाले ब्याज दर को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है .इस सवाल के लिखित जवाब में श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने सरकार की स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने बताया कि फिलहाल EPFO स्कीम में किसी खास बदलाव की योजना नहीं है.

EPF पर मिलने वाला ब्याज कैसे तय होता है?

इस पर श्रम मंत्रालय ने बताया कि EPF जमा पर ब्याज दर Employees' Provident Funds Scheme, 1952 के नियमों के अनुसार तय की जाती है. EPF स्कीम के पैरा 60(1) के अनुसार EPFO अपने सदस्यों के खातों में ब्याज उसी दर से जमा करता है जिसे केंद्र सरकार सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी (CBT) से सलाह लेकर तय करती है.

श्रम मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ब्याज दर तय करते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी होता है कि EPF का ब्याज खाता वित्तीय रूप से मजबूत बना रहे.EPF स्कीम के पैरा 60(4) के अनुसार सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होता है कि ब्याज देने के दौरान ब्याज खाते से कोई अतिरिक्त निकासी न हो.

इसका मतलब यह है कि ब्याज दर तय करते समय EPFO की निवेश से होने वाली कमाई और उसकी वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखा जाता है.

नए लेबर कोड के तहत क्या बदलाव होंगे?

राज्यसभा में यह भी पूछा गया था कि क्या नए लेबर कोड के तहत EPFO स्कीम में बदलाव किए जाएंगे.इस पर श्रम मंत्रालय ने बताया कि सोशल सिक्योरिटी कोड (Code on Social Security, 2020) लागू होने के बाद भी मौजूदा EPFO स्कीम एक साल तक जारी रहेंगी.

सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 की Section 164(2)(b) के अनुसार नए कानून लागू होने के बाद भी मौजूदा EPFO स्कीम एक साल तक प्रभावी रह सकती हैं, बशर्ते वे नए कानून के प्रावधानों के विपरीत न हों.इसका मतलब है कि नए लेबर कोड लागू होने के बाद भी EPF सिस्टम तुरंत नहीं बदलेगा और बदलाव धीरे-धीरे लागू किए जाएंगे.

Code on Social Security, 2020 क्या है ?

Code on Social Security, 2020 उन चार लेबर कोड में से एक है जिन्हें संसद ने भारत के लेबर लॉ को आसान और इंटीग्रेटेड करने के लिए पारित किया है.इनका उद्देश्य अलग-अलग श्रम कानूनों को एक स्ट्रक्चर में लाना और नियमों को आसान बनाना है.

किन पुराने कानूनों को मिलाकर बनाया गया नया कोड

सोशल सिक्योरिटी कोड को कई पुराने कानूनों को मिलाकर तैयार किया गया है, ताकि कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें. इसमें मुख्य रूप से कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम 1952 (EPF Act), कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948 (ESI Act), ग्रैच्युटी भुगतान अधिनियम 1972 (Payment of Gratuity Act, 1972) और मातृत्व लाभ अधिनियम 1961(Maternity Benefit Act, 1961), जैसे  कानूनों को शामिल किया गया है. इन सबको एक साथ लाने का मकसद यह है कि पीएफ, पेंशन, मेडिकल और मैटरनिटी बेनिफिट जैसे लाभों को पाना कर्मचारियों के लिए और भी आसान हो जाए.

नए कोड में EPF से जुड़े प्रमुख प्रावधान

नए Social Security Code में EPF सिस्टम के बेसिक स्ट्रक्चर को बरकरार रखा गया है. इसके साथ कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान भी शामिल किए गए हैं.

1. EPF के फायदे जारी रहेंगे

जिन संस्थानों और कर्मचारियों पर EPF लागू होता है, उन्हें पहले की तरह प्रोविडेंट फंड का लाभ मिलता रहेगा.

2. स्कीम बनाने का अधिकार सरकार के पास

नए कानून के तहत भी केंद्र सरकार के पास कर्मचारियों और संस्थानों के लिए EPF स्कीम बनाने का अधिकार रहेगा.

3. ज्यादा कर्मचारियों तक सामाजिक सुरक्षा

इस कोड का एक बड़ा उद्देश्य यह भी है कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा बढ़ाकर ज्यादा कर्मचारियों तक पहुंचाया जाए.

4. गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी फायदा

पहली बार गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए भी सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कुछ लाभ देने का प्रावधान किया गया है.

इसके लिए अलग-अलग योजनाएं बनाई जा सकती हैं.

कर्मचारियों को मिलते रहेंगे ये रिटायरमेंट फायदे

नया Social Security Code कई रिटायरमेंट से जुड़े फायदों को एक साथ लाता है, जो अभी अलग-अलग कानूनों के तहत मिलते हैं.इनमें प्रोविडेंड फंड (EPF),पेंशन (EPS),ग्रेच्युटी आदि शामिल हैं:

फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए भी ग्रेच्युटी

कर्मचारी एक निश्चित अवधि तक नौकरी करने के बाद ग्रेच्युटी के हकदार होते हैं.नए कोड में यह प्रावधान भी है कि फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी भी प्रोराटा आधार पर ग्रेच्युटी के पात्र हो सकते हैं, भले ही उन्होंने पांच साल की सेवा पूरी न की हो.

ज्यादा वर्कर्स को कवर करने की तैयारी

नए लेबर कोड का एक और खास मकसद सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा बढ़ाना है.सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत सरकार गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए भी लाइफ इंश्योरेंस,विकलांगता कवर,हेल्थ इंश्योरेंस रिटायरमेंट सिक्योरिटी जैसी योजनाएं बना सकती है.

लेबर कोड के नियमों पर मांगे गए सुझाव

सरकार फिलहाल लेबर कोड को लागू करने के लिए जरूरी नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है.इसी कड़ी में दिसंबर में श्रम मंत्रालय ने चारों लेबर कोड पर आम लोगोम और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे थे.सुझाव देने के लिए 30 से 45 दिन का समय दिया गया था.

EPF सब्सक्राइबर्स के लिए इसका क्या मतलब

फिलहाल EPF से जुड़े करोड़ों कर्मचारियों के लिए सबसे अहम बात यह है कि नए लेबर कोड की वजह से तुरंत कोई बड़ा बदलाव नहीं होने वाला है.सरकार के जवाब से यह साफ है कि मौजूदा EPF स्कीम पहले की तरह जारी रहेगी और अगर कोई बदलाव होंगे तो वे नए नियम लागू होने के बाद धीरे-धीरे किए जाएंगे.
 

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