जिसका डर था वहीं हुआ. कुछ समय पहले ट्रेंडफोर्स की रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें बताया गया था कि साल 2026 में रैम और स्टोरेज की कीमतों में बड़ा उछाल आया है. इस बढ़ती लागत की वजह से कंपनियां अपने आने वाले मॉडल्स की कीमतों को बढ़ा सकती हैं. और अब एप्पल ने ग्लोबली अपने कई बड़े प्रोडक्ट्स की कीमतों में इजाफा कर दिया है. कंपनी की तरफ से इसकी वजह दुनियाभर में मेमोरी चिप और स्टोरेज की किल्लत को ही बताया है. साथ ही ऑनलाइन स्टोर पर कंपनी ने नई कीमतें अपडेट कर दी हैं. हालांकि ग्राहकों के लिए राहत भरी खबर भी है. खबर ये कि महंगाई की मार कंपनी के पॉपुलर प्रोडक्ट आईफोन पर नहीं पड़ेगी.
कौन सा प्रोडक्ट कितना महंगा हुआ?
बढ़ी हुई कीमतों की बात करें तो एप्पल ने अपने एंट्री लेवल गैजेट्स से लेकर प्रो मॉडल्स के दाम बढ़ए हैं. मैकबुक नियो के लिए कंपनी ने इसकी शुरुआती कीमत 599 डॉलर से बढ़ाकर 699 डॉलर कर दी है. मैकबुक एयर की कीमत 1,099 डॉलर से बढ़कर 1,299 डॉलर हो गई है.
इसके साथ ही 14 इंज के मैकबुक प्रो यानी एंट्री लेवल मॉडल के लिए अब 1,699 डॉलर की जगह 1,999 डॉलर चुकाने होंगे. वहीं 11 इंच आईपैड प्रो टैबलेट अब 999 डॉलर से महंगा होकर 1,199 डॉलर का हो गया है. आईपैड एयर के मिड रेंज टैबलेट की कीमत 599 डॉलर से बढ़कर 749 डॉलर हो गई है.
एप्पल के होम डिवाइसेज भी हुए महंगे
महंगाई का झटका यही नहीं थमता. सिर्फ लैपटॉप और टैबलेट ही नहीं, बल्कि एप्पस के होम डिवाइसेज भी इस महंगाई के झटके से बच नहीं पाए हैं. स्टैंडर्ड होमपॉड अब 299 डॉलर की जगह 349 डॉलर का मिलेगा. वहीं, होमपॉड मिनी की कीमत 99 डॉलर से बढ़कर 129 डॉलर हो गई है. एप्पल टीवी का दाम 129 डॉलर से बढ़कर 199 डॉलर हो गया है.
एकदम से कंपनी ने क्यों बढ़ाईं कीमतें?
कंपनी ने कहा कि, एआई और डेटा सेंटर्स का विस्तार दुनियाभर के मार्केट में तेजी से हो रहा है. इसकी वजह से मेमोरी और स्टोरेज कंपनियों की डिमांड बढ़ी है. हमने इससे पहले कभी भी किसी पार्ट्स की कीमत इतनी तेजी से बढ़ते हुए नहीं देखी. अभी तक हम अपने ग्राहकों को इस झटके से लगातार बचा रहे थे. लेकिन अब स्थिति हद से बाहर जा चुकी है. हमें मजबूरी में ये कदम उठाना पड़ रहा है. मालूम हो कि कंपनी के सीईओ टिम कुक ने भी इससे पहले बढ़ी हुई कीमतों को लेकर इशारा दे दिया था.
टिम कुक के बाद 1 सितंबर से जॉन टर्नस एप्पल के नए सीईओ बनने जा रहे हैं. उनके सामने इस समस्या से निपटने की चुनौती सबसे बड़ी रहेगी. साथ ही इस कमी के चलते कंपनी के कई बड़े प्रोजेक्ट्स लटक भी सकते हैं.
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