भारत में ऑनलाइन शॉपिंग करने का तरीका अब पूरी तरह बदलने वाला है. हाल ही में हुए एक बड़े सर्वे में यह बात सामने आई है कि हर 10 में से 7 यूजर अगले एक साल के अंदर अपनी शॉपिंग के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई (AI) का इस्तेमाल करना चाहते हैं. नई दिल्ली में जुटे दुनियाभर के दिग्गजों ने भी इस बात पर मुहर लगाई है कि AI अब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि शॉपिंग का जरूरी हिस्सा बन गया है.
लोकलसर्किल्स के इस सर्वे में देश के 332 जिलों से करीब 75,000 लोगों ने अपनी राय दी है, जिससे पता चलता है कि अब लोग ज्यादा स्मार्ट तरीके से खरीदारी करना चाहते हैं.
सही सामान खोजने में बर्बाद होता है घंटों समय
ज्यादातर ऑनलाइन खरीदारों की सबसे बड़ी समस्या समय की बर्बादी है. सर्वे में शामिल 70% लोगों का मानना है कि हजारों सामानों के बीच अपने लिए सही प्रोडक्ट या सर्विस ढूंढना सबसे ज्यादा थका देने वाला काम है.
इसके अलावा आधे से ज्यादा लोग इस बात से भी परेशान रहते हैं कि उन्हें कम कीमत, फास्ट डिलीवरी और आसान रिटर्न पॉलिसी का सही बैलेंस नहीं मिल पाता. AI के आने से अब लोगों को उम्मीद है कि उन्हें अपनी पसंद के हिसाब से चुनिंदा सामान ही दिखाए जाएंगे, जिससे उनका कीमती समय बचेगा और उन्हें बेहतरीन डील मिल सकेगी.
असली और नकली प्रोडक्ट की पहचान करेगा AI
इंटरनेट पर सामान खरीदते समय लोग अक्सर इस बात को लेकर डरे रहते हैं कि जो वो देख रहे हैं वो असली है भी या नहीं. इसीलिए 68% ग्राहक अब AI का यूज यह चेक करने के लिए करना चाहते हैं कि प्रोडक्ट और उसे बेचने वाला दुकानदार कितना भरोसेमंद है. लोग अब सिर्फ फोटो देखकर संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि वे AI की मदद से रिव्यू और रेटिंग की असलियत भी जानना चाहते हैं ताकि वे किसी धोखाधड़ी का शिकार न हों. यह टेक्नोलॉजी लोगों को खरीदारी से पहले एक सिक्योरिटी देने का काम करेगी.
शॉपिंग ऐप्स के अंदर ही चाहिए AI फीचर
दिलचस्प बात यह है कि लोग शॉपिंग के लिए किसी अलग एआई प्लेटफॉर्म जैसे चैटजीपीटी या जेमिनी पर जाने के बजाय अपनी पसंदीदा शॉपिंग ऐप के अंदर ही AI फीचर चाहते हैं. हर दो में से एक ग्राहक का कहना है कि वे अमेजन, फ्लिपकार्ट या मिंत्रा जैसी ऐप्स के सर्च बार में ही बोलकर या फोटो डालकर सामान ढूंढना पसंद करेंगे. ग्राहकों को लगता है कि शॉपिंग ऐप्स के अंदर एआई होने से उनका काम ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा, क्योंकि उन्हें अलग-अलग टूल्स के बीच चक्कर नहीं काटना पड़ेगा.
डेटा सिक्योरिटी को लेकर लोगों के मन में डर
AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच लोग अपनी निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर भी काफी चिंतित हैं. सर्वे के मुताबिक, 70% से ज्यादा लोगों को डर है कि AI का इस्तेमाल करने से उनका डेटा चोरी हो सकता है या उसका गलत फायदा उठाया जा सकता है. इसके अलावा, लोग इस बात को लेकर भी कन्फ्यूजन में हैं कि कहीं AI उन्हें सिर्फ वही प्रोडक्ट तो नहीं दिखाएगा जिनके लिए उसे पैसे दिए गए हैं या जो स्पॉन्सर्ड हैं.
सर्वें में शामिल लोगों का साफ कहना है कि कंपनियों को AI के काम करने के तरीके में ट्रांसपेरेंसी लानी होगी ताकि लोगों का भरोसा बना रहे.
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