- NDTV के CEO राहुल कंवल ने बताया कि AI से न्यूजरूम की कार्यप्रणाली तेज, कुशल और प्रभावी बन रही है
- AI कंटेंट निर्माण को तेज करता है, लेकिन संपादकीय निर्णय और अंतिम जिम्मेदारी हमेशा मनुष्यों के पास ही रहती है
- Connected TV ने मीडिया उद्योग में नई संभावनाएं खोल दी हैं, जिससे दर्शक अपनी पसंद का कंटेंट चुन सकते हैं
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कनेक्टेड टीवी और दर्शकों की बदलती आदतें मीडिया इंडस्ट्री को तेजी से बदल रही हैं. इसी बदलाव पर आयोजित पैनल चर्चा 'द सीईओ पर्सपेक्टिव: रीइन्वेंटिंग मीडिया फॉर द एज ऑफ इनफिनिट कंटेंट' में NDTV के CEO और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल ने बताया कि AI न्यूजरूम की कार्यप्रणाली को ज्यादा तेज, कुशल और प्रभावी बना रहा है, लेकिन पत्रकारिता में इंसानों की भूमिका अब भी सबसे महत्वपूर्ण रहेगी.
AI ने कम किया आइडिया से एग्जीक्यूशन का समय
राहुल कंवल ने कहा कि AI की मदद से किसी आइडिया के जन्म लेने से लेकर उसे कंटेंट के रूप में तैयार करने और दर्शकों तक पहुंचाने के बीच का समय काफी कम हो गया है. उन्होंने कहा, 'एक आइडिया सोचने से लेकर उसे बनाने और एग्जीक्यूट करने में लगने वाला समय काफी कम हुआ है.'
उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में NDTV में हुए कई बदलावों के पीछे तकनीक और AI की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.
'सिर्फ AI से कुछ भी पब्लिश नहीं होता'
हालांकि उन्होंने साफ किया कि AI पत्रकारों की जगह नहीं ले सकता. उन्होंने कहा कि AI कंटेंट निर्माण को तेज कर सकता है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी और संपादकीय निर्णय इंसानों के हाथ में ही रहने चाहिए. सिर्फ AI से कुछ भी पब्लिश नहीं होता.
उन्होंने AI के जरिए तैयार किए गए कंटेंट, डीपफेक और गलत सूचनाओं के खतरे पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए NDTV हर प्रक्रिया के अंत में मानवीय निगरानी को अनिवार्य मानता है.
'इंसान ही इसका दिल है'
उनके अनुसार AI एक सहायक उपकरण है, निर्णय लेने वाला नहीं. उन्होंने कहा, 'इंसान ही इसका दिल है. AI इंसानों को बेहतर फैसले लेने और प्रक्रियाओं को अधिक कुशल बनाने में मदद करता है.'
उनके मुताबिक AI प्रोडक्शन टाइम कम करता है, कंटेंट को अलग-अलग दर्शकों के लिए अनुकूल बनाता है. इसके अलावा एक ही कंटेंट को कई फॉर्मेट में विस्तारित करने में मदद करता.
Connected TV खोल रहा नए अवसर
राहुल कंवल ने कहा कि Connected TV (CTV) मीडिया उद्योग को नई संभावनाएं दे रहा है. पारंपरिक टीवी में कार्यक्रमों को सीमित समय और स्लॉट के लिए प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है, लेकिन Connected TV दर्शकों को अपनी पसंद का कंटेंट चुनने की आजादी देता है.
उन्होंने कहा कि इससे NDTV को हेल्थकेयर, वेलनेस और एंटी-एजिंग पर फोकस करने वाले 'लाइफलाइन' और अपस्किलिंग पर फोकस करने वाले 'लॉन्चपैड' जैसे खास ऑफर डेवलप करने में मदद मिली है. ऑडियंस के साइज को लेकर चिंताओं के कारण ऐसे प्रोग्राम को ट्रेडिशनल तौर पर न्यूज चैनल पर ज्यादा जगह नहीं मिलती थी.
Gen Z के लिए नए फॉर्मेट
राहुल कंवल ने बताया कि NDTV माइक्रो के जरिए नए फॉर्मेट के साथ भी एक्सपेरिमेंट कर रहा है, यह माइक्रो-ड्रामा फॉर्मेट को न्यूज के हिसाब से बदलने की उसकी कोशिश है. इस पहल का मकसद न्यूज को उन प्लेटफॉर्म पर ऑडियंस तक पहुंचाना है जिनका वे पहले से इस्तेमाल कर रहे हैं, और इसे ऐसे फॉर्मेट और भाषा में पेश करना है जो युवा, खासकर Gen Z, कंज्यूमर्स को पसंद आए.
उन्होंने कहा कि मीडिया ऑर्गनाइजेशन्स को टेक्नोलॉजी, कम्युनिटीज और एंगेजमेंट में इन्वेस्ट करके कंज्यूमर्स के साथ 'सिचुएशनशिप' से सीधे रिश्ते की ओर बढ़ने की जरूरत है. इसका मकसद ऑडियंस को मुख्य रूप से सर्च और डिस्कवरी पर निर्भर रहने के बजाय सीधे मीडिया प्लेटफॉर्म पर लौटने के लिए प्रोत्साहित करना है.
'लेजी जर्नलिज्म" का दौर खत्म
उन्होंने कहा कि मीडिया संस्थानों को सिर्फ खबर दिखाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि अब 'लेजी जर्नलिज्म' की जगह एंटरप्रेन्योरियल जर्नलिज्म की जरूरत है, जहां मीडिया संस्थान अपने दर्शकों के साथ सीधा रिश्ता बनाएं.
रेटिंग्स पर क्या बोले?
BARC रेटिंग्स को लेकर राहुल कंवल ने कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद यह अभी भी प्रसारकों और विज्ञापनदाताओं के लिए साझा मानक बनी हुई है. उन्होंने कहा कि यदि विश्वसनीय रेटिंग प्रणाली नहीं होगी तो कंटेंट की खपत को मापना कठिन हो जाएगा और विज्ञापन बजट तेजी से पारंपरिक टीवी से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ओर जा सकता है.
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