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'समय बताएगा...', OPEC से अलग हुआ UAE तो भारत को फायदा या नुकसान, जानिए क्‍या है सागर अदाणी का अनुमान

OPEC से UAE के अलग होने की संभावना के बीच सागर अदाणी ने कहा, 'नई दिल्ली और UAE के बीच घनिष्ठ राजनीतिक संबंध और गहरा विश्वास है, इसलिए यह बदलाव भारत के लिए 'नेट पॉजिटिव' है.

'समय बताएगा...', OPEC से अलग हुआ UAE तो भारत को फायदा या नुकसान, जानिए क्‍या है सागर अदाणी का अनुमान
Sagar Adani: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर भी सागर अदाणी ने अपनी राय रखी

Sagar Adani over Middle East Crisis and OPEC: मिडिल ईस्‍ट में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ईंधन (Global Fuel) की कमी की बढ़ती आशंकाओं के बीच, अदाणी ग्रीन एनर्जी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अदाणी (Sagar Adani) का कहना है कि बाजार की बदलती गतिशीलता और स्थानीय ऊर्जा पर बड़े पैमाने पर जोर, भारत को इस संकट से बचाएगा. जियो-पॉलिटिकल टेंशन और ओपेक (OPEC) तेल समूह के साथ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बदलते संबंधों को लेकर सागर अदाणी ने कहा कि ये बदलाव वास्तव में अस्थिर बाजारों को शांत करने में मदद कर सकता है.

सागर अदाणी ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा, 'समय ही बताएगा कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजारों को बाधित करेगा या, मेरी राय में, उन्हें स्थिर करेगा.'

उन्होंने आगे कहा कि चूंकि नई दिल्ली और UAE के बीच घनिष्ठ राजनीतिक संबंध और गहरा विश्वास है, इसलिए यह बदलाव भारत के लिए 'नेट पॉजिटिव' (कुल मिलाकर सकारात्मक) है. शेष विश्व के लिए, उन्हें उम्मीद है कि बदलती गतिशीलता 'केवल एक स्थिर शक्ति' के रूप में कार्य करेगी.

'पश्चिम एशिया में संघर्ष दुनिया के लिए ठीक नहीं'

ये टिप्पणियां हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों की सुरक्षा पर मंडरा रही गहरी चिंता के बीच आई हैं. अदाणी ने चेताया कि पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष 'दुनिया के लिए अच्छा नहीं है'. उन्होंने इसे अमेरिका, ईरान और अन्य मध्य पूर्वी देशों सहित इसमें शामिल सभी पक्षों के लिए 'हार-हार' (lose-lose) वाली स्थिति बताया.

कैसे झटकों से बचता रहेगा भारत, क्‍या है असली ताकत?

इन बाहरी झटकों को रोकने के लिए, सागर अदाणी ने कहा कि भारत का सीधा जवाब 'ऊर्जा लचीलापन' (Energy Resilience) है. युद्ध के कारण आसानी से बाधित होने वाले आयातित ईंधन पर निर्भर रहने के बजाय, देश तेजी से अपना स्वतंत्र पावर ग्रिड बना रहा है.

इस रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा एक विशाल हरित ऊर्जा स्थल (green energy site) है, जिसे अदाणी समूह विकसित कर रहा है. समूह भारत के सबसे बड़े नवीकरणीय पोर्टफोलियो का निर्माण कर रहा है, जिसका लक्ष्य वित्त वर्ष 2030 तक 50,000 मेगावाट (MW) क्षमता हासिल करना है.

वर्तमान में कंपनी के पास लगभग 20,000 मेगावाट हरित ऊर्जा क्षमता है और 2030 तक इसे 50 गीगावाट (GW) तक ले जाने की योजना है. यह विस्तार समूह की उस 100 बिलियन डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा, देश भर में फैली बिजली लाइनें और थर्मल प्लांट बनाए जाने हैं.

'जल्‍दी खत्‍म हो पश्चिम एशिया का संघर्ष'

अदाणी ने मध्य पूर्व संकट के तत्काल प्रभाव से अपने नागरिकों की रक्षा करने के लिए त्वरित कार्रवाई करने हेतु भारत सरकार की प्रशंसा की. उन्होंने उल्लेख किया कि मजबूत सरकारी नीतियों ने स्थानीय ऊर्जा विनिर्माण में तेजी ला दी है, जिसके परिणामस्वरूप पिछले वर्ष ही 55 गीगावाट हरित ऊर्जा ग्रिड से जुड़ी है.

अदाणी ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया को मध्य पूर्व संघर्ष के जल्द समाप्त होने की आवश्यकता है, लेकिन वे इस तूफान का सामना करने की भारत की रणनीति को लेकर आश्वस्त हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि सतर्क कूटनीति और घरेलू बिजली के बड़े पैमाने पर निर्माण के माध्यम से, देश 'इस संकट से और भी मजबूत होकर बाहर निकलेगा.'

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