भारतीय संविधान की प्रस्तावना में उल्लेखित "हम भारत के लोग" अपने संविधान को आत्मर्पित करते है. भारत में जन्मे भारत की एकता, अखंडता के प्रति निष्ठा एवं भारतीय संविधान में आस्था रखने वाले नागरिकों से ही "हम भारत के लोग" का तात्पर्य है. चुनाव, प्रतिनिधित्व, नागरिक अधिकार और कानून का शासन लोकतंत्र का आधार है. भारत के प्रति समर्पित व्यस्क नागरिकों को ही भारत में सरकारें चुनने का अधिकार है. चुनाव के माध्यम से भारत में राज्य और केंद्र की सरकार को चुनने का अधिकार विदेशी घुसपैठियों को देना कैसे संभव हो सकता है. इसी कारण संविधान में मतदाता शुद्धिकरण की व्यवस्था है.
भारतीय संविधान लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 धारा 21(3) के अंतर्गत मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) करने का अधिकार चुनाव आयोग को देता है. जिसके अंतर्गत 13 बार मतदाता सूची के निरीक्षण का कार्य अभी तक चुनाव आयोग द्वारा किया गया है. यह प्रक्रिया 1952–56, 1957, 1961, 1965, 1966, 1983–84, 1987–89, 1992, 1993, 1995, 2002, 2003 और 2004 में हुई.
2025 में बिहार से शुरू हुआ यह 14वां विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) है . 2004 से 22 वर्षों के मध्य यह प्रक्रिया पहले ही पूर्ण होनी चाहिए थी, जो कि नहीं हुई थी.

वर्तमान में SIR के विरोध में आवाज उठाने वाले दलों की केंद्र एवं राज्यो में सरकारें रहते हुए भी अनेक बार मतदाता शुद्धिकरण की यह प्रक्रिया हुई है. संविधान का अनुच्छेद 326 मताधिकार को केवल "भारत के नागरिक" तक सीमित करता है, और अनुच्छेद 324 निर्वाचक नामावली की तैयारी तथा उसकी शुद्धता का दायित्व निर्वाचन आयोग को सौंपता है; यही मतदाता शुद्धिकरण की संवैधानिक व्यवस्था है.
प्रत्येक वैध भारतीय नागरिक को अपने मतदान का अधिकार मिले, एक मतदाता एक ही स्थान पर अपने मत का उपयोग करे, अवैध अथवा अनैतिक पद्धति से प्रवेश किए लोगों को भारत में सरकारे चुननें का अधिकार प्राप्त न हो... इन उद्देश्यों से संविधान के अंतर्गत धारा 324, 325, 326 का प्रावधान किया गया है. जो मतदाता सूची के निर्माण, संशोधन एवं व्यस्क मताधिकार की व्यवस्था करता है.
आजीविका के उद्देश्य से अनेक नागरिक अपने स्थान से दूसरे स्थान के लिए परिवर्जन करते हैं. जिसके कारण पूर्व स्थान पर मत रहने के बाद भी वह दूसरे स्थान पर अपना मत बनवाते हैं. 2011 की जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि लगभग 45 करोड़ लोगों ने देश में ही आन्तरिक प्रवास किया.
आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 के अनुसार 2001-2011 के मध्य प्रतिवर्ष औसत 50 से 65 लाख लोग प्रवासी हुए. विशेष गहन पुनरीक्षण के अंतर्गत बिहार प्रदेश में 7.01 लाख नाम दो स्थानों पर मतदाता थे. यह स्थिति देश के अन्य राज्यों में भी है. देश के कुल मतदाताओं में गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया होने के उपरांत कुल 13.30 करोड़ में से लगभग 2 करोड़ 80 लाख मृतक नाम मतदाता सूची में पाए गए है.
6.30 करोड़ ने अपना स्थान परिवर्तन कर दूसरे स्थान पर मतदाता सूची में नाम जुड़वा लिया था. 3 करोड़ मतदाताओं के बारे में जानकारी ही नहीं मिली है. यह वही मतदाता है जो भारत में वैध नागरिक न होते हुए भी भारत की सरकार को चुनने का कार्य कर रहे थे. 1.02 लाख मतदाताओं का नाम दो बार मतदाता सूची में था.
उन्होंने घुसपैठ एवं उग्रवाद का परस्पर संबंध तथा सीमा पर जनसांख्यिकी परिवर्तन का वर्णन करते हुए उसे राष्ट्रीय सुरक्षा एवं लोकतंत्र के लिए खतरा बताया था. 2016 में गृह राज्य मंत्री रहते समय किरेन रिजिजू ने संसद में बताया था कि लगभग 2 करोड़ से अधिक घुसपैठियें भारत में रह रहे है. अनुमान अनुसार कुछ लोग घुसपैठियों की संख्या 3 करोड़ तक संख्या बताते हैं.
पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा की जीत के बाद बांग्लादेशी घुसपैठियों ने स्वतः ही बांग्लादेश की ओर पलायन किया. उत्तर 24 परगना के हकीमपुर बॉर्डर पर जाते हुए इन घुसपैठियों ने मीडिया से स्वीकार किया था कि उनके बिचौलियों एवं सत्तालोलुप नेताओं द्वारा अवैध मतदाता पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड एवं राशन कार्ड बनवाए गए थे.
कलकत्ता एवं गुवाहाटी उच्च न्यायालयों में भी यह तथ्य आ चुके हैं. रोजगार के लिए परिवर्जन किए हुए मतदाता तो किसी भी पार्टी को अपने मत देने के लिए स्वतंत्र है. मृतक मत दे नहीं सकते है. विपक्ष द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध अवैध घुसपैठियों के समर्थन के लिए ही है ऐसा लगता है. क्योंकि यही उनके थोक मतदाता थे. क्या इनके बल पर ही वह चुनाव जीतते थे इस प्रश्न का उत्तर विपक्षी दलों को देश को देना चाहिए.
चुनाव आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण के समय एक संवैधानिक एवं व्यवस्थित प्रक्रिया को अपनाया जाता है. प्रदेश स्तर से प्रारंभ कर बूथ स्तर (SRO से BLO) तक सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति होती है.
इसी प्रकार राजनीतिक दलों से भी अपेक्षा रहती है कि वे भी विधानसभा स्तर से बूथ (BLA-1 एवं BLA-2) तक की नियुक्ति कर इस प्रक्रिया में सहयोग कर लोकतंत्र को मजबूत करें. फॉर्म 6-7-8 का उपयोग करते हुए मतदाता सूची के शुद्धिकरण का प्रयास करें. गलत नाम जुड़ने एवं कटने पर वह आपत्ति व्यक्त करें.

लेकिन कमजोर राजनीतिक दल समस्त बूथों पर अपने BLA-2 की नियुक्ति कर पाने में असमर्थ रहते हैं. अपनी कमजोरी छिपाने के लिए वह वोट चोरी का आरोप लगाते हैं. कांग्रेस बिहार प्रदेश में 77,895 बूथों में से केवल 17,000 बूथों पर एवं बंगाल में 85379 बूथों में से केवल 5797 पर ही अपने बूथ एजेंट नियुक्त कर पाई थी.
निर्वाचन आयोग के अनुसार कांग्रेस ने मतदाता सूची के संदर्भ में एक भी आपत्ति नहीं की. जिन राज्यों में एनडीए सरकार बनी वहां भी विपक्षी विधायक जीते ही हैं. हिमाचल, कर्नाटक, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु जैसे प्रदेशों में कांग्रेस अथवा विपक्षी दलों की सरकार भी बनी है. कांग्रेस के अनेक नेताओं ने SIR की प्रशंसा भी की है. तब संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग को आरोपित करना यह लोकतंत्र के प्रति जघन्य अपराध है.
देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 1952 में प्रथम चुनाव के बाद मतदाता सूची के शुद्धिकरण की आवश्यकता के लिए 12 फरवरी को पत्र लिखकर सचेत किया था कि “सबसे पहले मतदाता सूची का शुद्धिकरण किया जाए.” केरल के नेता रमेश चेन्नीथला ने आयोग को 4 लाख अवैध मतदाताओं की सूची देते समय कहा कि भौतिक सत्यापन एवं मतदाता सूची के गहन शुद्धि के बिना स्वतंत्र निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है. केरल में कांग्रेस अपनी विजय का श्रेय भी मतदाता पुनरीक्षण की प्रक्रिया को ही देती है .
केवल भारत में नहीं अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, स्वीडन, केन्या और ब्राजील जैसे देश भी बीच-बीच में अपनी मतदाता सूची के शुद्धिकरण का अभियान चलाते हैं . ब्रिटेन में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के अंतर्गत प्रति वर्ष प्रत्येक नागरिक को स्वयं पंजीकरण करवाना अनिवार्य है .
लेकिन कुछ देशविरोधी ताकतों द्वारा भारत को अस्थिर करने के अनेक प्रकार के प्रयास पिछले दिनों से हम देख ही रहे हैं. किसान आंदोलन, CAA आदि के नाम पर झूठा विमर्श फैलाया गया. फिर EVM, SIR के झूठे प्रोपगंडा से होते हुए ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हटाने एवं रिजीम चेंज तक की भाषा बोली जा रही है.
अराजकतावाद से उत्पन्न बांग्लादेश का हिंसक आंदोलन उनकी प्रेरणा है. सोशल मीडिया से निर्मित झूठा नैरेटिव उनके हथियार एवं कुछ विदेशी ताकतें उनकी सहयोगी है. इसी को बाबा साहब डॉ अंबेडकर ने अराजकतावाद कहा था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत गरीबी से मुक्त हो रहा है, ऐसे समय विपक्षी पार्टियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माता-पिता को भद्दी गालियां देकर नरेंद्र मोदी मुक्त भारत करना चाहती हैं. देश की विकासवादी एवं राष्ट्रीय शक्तियों से आह्वान है कि “वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः” का संकल्प लेकर देश की जनता को जागृत करें .
लेखक परिचयः शिवप्रकाश, भाजपा से जुड़े हैं. वो अभी भाजपा में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री हैं.
डिस्क्लेमरः यह लेखक का निजी विचार है. इससे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.