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सुप्रीम कोर्ट में पीरियड्स लीव का मुद्दा तो यूट्यूब में पीरियड्स पर Silent Cycle

हिमांशु जोशी
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    मार्च 19, 2026 20:04 pm IST
    • Published On मार्च 19, 2026 20:04 pm IST
    • Last Updated On मार्च 19, 2026 20:04 pm IST
सुप्रीम कोर्ट में पीरियड्स लीव का मुद्दा तो यूट्यूब में पीरियड्स पर Silent Cycle

जब सुप्रीम कोर्ट में पीरियड्स लीव का मुद्दा उठा, उन्हीं दिनों यूट्यूब चैनल Pocket Films की शॉर्ट फिल्म Silent Cycle भी चर्चा में है. पंचायत वेब सीरीज में अपनी भूमिका के लिए चर्चित अभिनेत्री सुनीता रजवार इसमें मुख्य भूमिका में नजर आती हैं.

पीरियड्स से जुड़े सामाजिक नियमों पर सवाल

निर्देशक स्माही आनंद की शॉर्ट फिल्म Silent Cycle विशेष रूप से Women hygiene के मुद्दे को केंद्र में रखती है और यह दिखाती है कि मासिक धर्म के दिनों में महिलाओं को किन सामाजिक प्रतिबंधों और असहज परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है.

चार प्रमुख पात्रों के इर्द-गिर्द बुनी गई यह कहानी भारतीय समाज में लड़के-लड़कियों के बीच होने वाले भेदभाव से शुरू होती है और धीरे-धीरे पीरियड्स के दौरान महिलाओं पर थोपे गए एकतरफा नियमों और सामाजिक सोच को प्रभावी ढंग से सामने लाती है.

बचपन से बोया जाता है भेदभाव का बीज

'लड़का है वो और ये काम लड़कियों के होते हैं. घर का काम सीखोगी तो तुमको काम आएगा आगे, समझी' कहने वाली लता (सुनीता रजवार) ने फिल्म में एक खड़ूस दादी का किरदार निभाया है और अपने शानदार अभिनय से वह दर्शकों को इस शॉर्ट फिल्म से जोड़े रखती हैं. निर्देशक ने भी इस तरह के संवादों से फिल्म को सिर्फ 'उन दिनों' की बात तक सीमित न रखते हुए, हमारे समाज में बच्चों की परवरिश पर भी सवाल उठाए हैं. जैसे यह संवाद दिखाता है कि कैसे हम बचपन से बच्चों के अंदर लिंग असमानता का बीज बो देते हैं.

'शर्म' के सवाल से टकराती नई पीढ़ी

वृंदा बनी अक्षरा पड़वाल अपने पहले पीरियड्स आने पर जब अपनी दादी लता से गुस्से में कहती हैं कि ये देखो और सोचो कि इन दिनों में से कौन सी शर्म वाली चीज है, तो वह उन भारतीय लड़कियों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती हुई लगती हैं जो आज भी पीरियड्स के दौरान सैनेट्री पैड की जगह कपड़ों का इस्तेमाल करती हैं. इस बाल कलाकार ने भी अपने अभिनय से शॉर्ट फिल्म में प्रभाव डाला है.

सेक्स एजुकेशन की कमी पर भी टिप्पणी

'मुझे जब यह पहली बार हुआ था, मुझे इसके बारे में कुछ नहीं पता था' कहती लता हमारे समाज के उस गैप को सामने लाती है जो आज भी सेक्स एजुकेशन में कमी की वजह से भरा नहीं है और करीब दो हफ्ते में 38000 से ऊपर बार देखी गई यह शॉर्ट फिल्म महिलाओं से जुड़े इन अनकहे मुद्दों को बखूबी सामने लाने का प्रयास करती है.

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