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OPINION

जब वाजपेयी ने तोड़ी चुप्पी, कहानी उस दिन की जब भारत बना परमाणु शक्ति

11 मई 1998 की अनकही कहानी, जब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अचानक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर भारत के परमाणु शक्ति बनने की ऐतिहासिक घोषणा से पूरी दुनिया को चौंका दिया था.

जब वाजपेयी ने तोड़ी चुप्पी, कहानी उस दिन की जब भारत बना परमाणु शक्ति

11 मई 1998 की गर्म दोपहर, उस समय मैं न्यूज एजेंसी ANI के साथ विदेश मंत्रालय, पीएमओ और संसद को कवर करने वाले एक संवाददाता के तौर पर काम कर रहा था. मुझे प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यालय से एक फोन आया कि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अगले दो घंटों के भीतर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने वाले हैं. मुझसे कहा गया कि मैं अपनी कैमरा टीम के साथ तुरंत प्रधानमंत्री आवास, 7 RCR पहुंच जाऊं. मैं हैरान रह गया और सोचने लगा कि प्रधानमंत्री अचानक यह प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों कर रहे हैं?

मैं तुरंत अपने संपादक के केबिन में गया और उन्हें बताया कि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शाम लगभग 5 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने वाले हैं. उन्होंने मुझसे पहला सवाल यह पूछा, 'क्या जे. जयललिता वाजपेयी सरकार से अपना समर्थन वापस ले रही हैं?' यह खबर सत्ता के गलियारों में जोरों पर थी और राजनेताओं तथा मीडिया जगत में चर्चा का एक गर्म विषय बनी हुई थी. प्रधानमंत्री द्वारा खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की इस अचानक घोषणा ने पत्रकारों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए थे, क्योंकि वाजपेयी ऐसे नेता नहीं थे जो अचानक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए जाने जाते हों.

मैं अपने कैमरामैन के साथ तुरंत प्रधानमंत्री आवास पहुंचा. कई सुरक्षा जांचों से गुजरने के बाद, हमने प्रधानमंत्री आवास के लॉन में प्रवेश किया. वह दृश्य आज भी मेरे जहन में पूरी तरह से बसा हुआ है. हम वहां समय से पहले पहुंच गए थे. अधिकारी अभी भी वाजपेयी के लिए एक पोडियम लगा रहे थे ताकि वे खड़े होकर मीडिया को संबोधित कर सकें. यह मुझे कुछ अजीब लगा और तभी अचानक हमने प्रमोद महाजन को देखा. उस समय, वे प्रधानमंत्री वाजपेयी के सलाहकार थे और कुछ अधिकारियों को भारतीय ध्वज लाने का निर्देश दे रहे थे. मैं उनके पास गया और पूछा, 'प्रमोद जी, बड़ी खबर क्या है?' वे मुस्कुराए और बोले, 'बस थोड़ा इंतजार कीजिए, आपको यह खबर खुद उन्हीं से सुनने को मिलेगी.' 

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यह मुझे अजीब लगा क्योंकि प्रमोद महाजन पत्रकारों के बीच काफी लोकप्रिय थे और अक्सर कोई भी खबर आधिकारिक होने से पहले ही पत्रकारों को बता दिया करते थे. इसलिए मैं सोच रहा था कि आखिर वह इस बार कुछ क्यों नहीं बता रहे हैं. इस बीच, प्रेस कॉन्फ्रेंस की तैयारियां जोरों पर थीं और भी कई पत्रकार वहां पहुंचने लगे थे. यह सिलसिला कुछ देर तक चलता रहा और फिर मैंने देखा कि प्रधानमंत्री वाजपेयी के कुछ करीबी अधिकारी अंदर आ रहे हैं. मैंने उनसे पूछने की कोशिश की, 'यह सब किस बारे में है?' लेकिन उन्होंने भी एक शब्द नहीं कहा. वे बस मुस्कुरा दिए.

तिरंग झंडा और पोडियम पूरी तरह से तैयार थे और पूरा हॉल पत्रकारों से खचाखच भरा हुआ था. फिर हमने देखा कि प्रधानमंत्री वाजपेयी अपने आवास से बाहर निकले और धीरे-धीरे पोडियम की ओर बढ़ने लगे.

फिर वाजपेयी के सामने एक कागज रखा गया. उन्होंने उसे ठीक किया और हमें संबोधित करना शुरू किया, 'आज 3:45 बजे, भारत ने पोखरण रेंज में तीन भूमिगत परमाणु परीक्षण किए हैं.'

मेरे हाथ सुन्न पड़ गए. मुझे ऐसा लगा मानो समय ही थम गया हो. मैंने अपनी आंख के एक कोने से देखा कि वहां मौजूद अन्य पत्रकारों के चेहरों पर भी वैसी ही प्रतिक्रियाएं थीं. वहां एकदम सन्नाटा छा गया था. ऐसा लगा मानो मेरे आस-पास सब कुछ स्थिर हो गया हो. यहां तक ​​कि वे पक्षी भी, जिन्होंने वाजपेयी के बगीचे को अपना घर बना लिया था. जबकि आम दिनों में, वे बिना किसी डर के हमेशा चहचहाते रहते थे.

बयान देने के ठीक बाद, वाजपेयी वापस अपने आवास की ओर चल पड़े. मैं जल्दी से बाहर की ओर भागा ताकि अपना मोबाइल फोन ले सकूं, जो रिसेप्शन पर रखा था. हमें PMO के अंदर फोन ले जाने की इजाजत नहीं थी. मैंने अपना फोन उठाया और ऑफिस को यह खबर देने के लिए भागा कि भारत ने तीन परमाणु परीक्षण किए हैं. मैंने अभी-अभी खबर फ्लैश की ही थी कि मेरा फोन बंद हो गया. मैं अपने कैमरामैन के साथ अपनी कार की ओर भागा और कार में लगे वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल करके ऑफिस को पूरी जानकारी दी. मैंने उन्हें बताया कि उन्हें एक सैटेलाइट फीड बुक करनी होगी, ताकि हम वाजपेयी के उस बयान को प्रसारित कर सकें जिसमें उन्होंने भारतीय परमाणु परीक्षणों की घोषणा की थी. 

यह फीड हमें रॉयटर्स को देनी थी, जो उस समय ANI के पार्टनर थे. उन दिनों, लाइव टीवी प्रसारण बहुत ही दुर्लभ हुआ करता था और इसका इस्तेमाल बहुत कम किया जाता था. ऑफिस ने तुरंत कार्रवाई की और वाजपेयी के बयान देने के 25 मिनट से भी कम समय में मैं विदेश संचार निगम लिमिटेड पहुंच गया ताकि उस बयान को अपलिंक कर सकूं.  रॉयटर्स के ड्यूटी एडिटर ने मुझसे एक पल रुकने को कहा, क्योंकि BBC, CNN और दुनिया के कई और न्यूज नेटवर्क वाजपेयी की टिप्पणियों को लाइव दिखाना चाहते थे.

आज ठीक 28 साल हो गए हैं, लेकिन 11 मई 1998 के बारे में सोचकर आज भी मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं. एक सुस्त दिन से लेकर आज तक का सबसे चर्चित दिन. इन परीक्षणों के साथ, भारत ने घोषणा की कि वह एक परमाणु शक्ति है. एक ऐसा दर्जा जिसे दुनिया मानती है और जिसे बदला नहीं जा सकता.

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