इन दिनों तापसी पन्नू की फिल्म 'अस्सी' को लेकर खूब चर्चा हो रही है, लेकिन साल 2016 में आई पिंक ने उन्हें हिंदी सिनेमा में एक मजबूत और गंभीर अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया. कोर्टरूम ड्रामा के जरिए आई इस फिल्म ने सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर ही नहीं, बल्कि सहमति, महिलाओं के अधिकार और समाज की सोच पर भी गहरी बहस छेड़ दी थी.
निर्देशक अनिरुद्ध रॉय चौधरी की फिल्म 'पिंक' 2016 में रिलीज हुई थी. शूजीत सरकार फिल्म के निर्माता थे. फिल्म में अमिताभ बच्चन, तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हारी और अंद्रिया तारियांग जैसे कलाकार नजर आए. दिल्ली की पृष्ठभूमि पर बनी इस कोर्टरूम ड्रामा की खास बात यह रही कि सिर्फ कहानी और संवादों के दम पर फिल्म ने दर्शकों को बांधे रखा. फिल्म की शूटिंग दिल्ली में ही की गई थी, शूटिंग के बीच में अमिताभ के ट्वीट से लोगों को कुछ धमाकेदार सामने आने की आहट लग गई थी.
एक 'ना' जो बहस का मुद्दा बन गई
'पिंक' तीन कामकाजी लड़कियों की कहानी है. वे सब एक पार्टी के बाद हुई घटना में फंस जाती हैं और समाज व कानून की नजर में कठघरे में खड़ी कर दी जाती हैं. एक रिटायर्ड वकील उनके पक्ष में खड़ा होता है और अदालत में सहमति, चरित्र और महिला स्वतंत्रता से जुड़े सवाल उठाता है. पूरी कहानी कोर्टरूम में हुई बहसों के जरिए यह दिखाती है कि 'ना' का मतलब हर परिस्थिति में 'ना' ही होता है.
T 2171 -The image of the next one on shoot .. COLOURFUL !! pic.twitter.com/eJtYhVcOEM
— Amitabh Bachchan (@SrBachchan) March 11, 2016
फिल्म अपने संवादों के लिए आज तक याद की जाती है. अदालत में अमिताभ बच्चन का वह सीन, जहां वह कहते हैं कि उसे बोलने वाली लड़की कोई परिचित हो, फ्रेंड हो, गर्लफ्रेंड हो, कोई सेक्स वर्कर हो या आपकी अपनी बीवी ही क्यों न हो... No means No, आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार पलों में गिना जाता है. वहीं तापसी पन्नू ने मीनल के किरदार में डर, गुस्से और आत्मसम्मान के संघर्ष को बेहद सहजता से निभाया.फलक के किरदार में कोर्टरूम के अंदर 'मैंने उसे ना बोला लगातार ना बोला..' कहने वाली कीर्ति कुल्हारी के अभिनय को कई पुरस्कारों और सराहनाओं से नवाजा गया.
'पिंक' की लंबी विरासत
साल 2016 में रिलीज हुई 'पिंक' की सफलता इतनी बड़ी रही कि इसका तमिल रीमेक Nerkonda Paarvai (2019) और तेलुगु रीमेक Vakeel Saab (2021) में बना. अलग-अलग भाषाओं में 'No Means No' का संदेश आगे बढ़ा. वहीं 2024 में दिए एक इंटरव्यू में कीर्ति कुल्हारी ने फिल्म के प्रमोशन के दौरान खुद को साइडलाइन महसूस करने की बात कही थी, जिससे फिल्म से जुड़ी चर्चाएं फिर से सुर्खियों में आ गईं. हालांकि इस विवाद के बावजूद 'पिंक' की विरासत मजबूत बनी रही और आज भी सहमति, बराबरी और सामाजिक न्याय पर होने वाली चर्चाओं में यह फिल्म एक अहम संदर्भ के रूप में याद की जाती है.
(डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं, उससे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)