विज्ञापन

बांकीपुर उपचुनाव रिजल्ट: गढ़ का भ्रम और भ्रम का गढ़!

सत्यकाम अभिषेक
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    अगस्त 04, 2026 11:33 am IST
    • Published On अगस्त 04, 2026 10:58 am IST
    • Last Updated On अगस्त 04, 2026 11:33 am IST
बांकीपुर उपचुनाव रिजल्ट: गढ़ का भ्रम और भ्रम का गढ़!

बचपन में अक्सर गांव में अपने बुजुर्गों से सुना करता था कि फलां का घर किले जैसा है. उसमें कोई घुस नहीं पाएगा. ये भी बताया जाता था कि उस घर की दीवार पता है कितनी मोटी है? 10-10 फीट मोटी दीवार. उस वक्त दसवीं क्लास में पढ़ता था. तो थोड़ा कौतुहल होता था. इतनी मोटी दीवार तो सच में कोई तोड़ नहीं पाएगा. बचपन की यादें धीरे-धीरे धूमल होती गईं. अब वो किलेनुमा घर खंडहर बन गया है. दीवारों को वक्त के थपेड़ों ने ऐसा झुलसाया है कि वो दीवार अब एक छोटी सी परत लग रही है. कभी उस घर को अपने ऊपर इतना गुमान रहा होगा. हम भी जब उसके सामने से गुजरते थे तो उसे उचक-उचक कर देखते थे. कभी शान से खड़ा रहने वाला वो घर अब अपने हालात पर आंसू बहा रहा होगा. उसकी मोटी दीवारों को वक्त ने ऐसा छिन्न-भिन्न कर दिया कि उस घर को किले होने का भ्रम ही टूट गया. बहरहाल, किले का किस्सा मैं आपको इसलिए सुना रहा है कि कई बार भ्रम आपको सच्चाई और हकीकत से दूर रखता है. ऐसी स्थिति में आप वास्तविकता की नाफरमानी करते हैं. आप खुद को सबसे ताकतवर समझते हैं. पर सच्चाई इससे इतर होती है. वक्त रूपी सच्चाई आपकी चूलें हिलाने की शुरुआत कर चुकी होती है और हवा का एक तेज झोंका आपकी मोटी दीवार को जमींदोज कर देती है. 

ध्वस्त हो गया किला 

कई बार लोगों को गढ़ होने का भ्रम हो जाता है. अब बिहार के बांकीपुर विधानसभा चुनाव को लीजिए. यहां भी सत्तारूढ़ दल को गढ़ का भ्रम था. लेकिन गढ़ का भ्रम होना और भ्रम का गढ़ होना अलग बात होती है. जनता रूपी हवा का झोंका और वक्त का सितम भ्रम की कमजोर होती दीवार को तोड़ देती है. कुछ ऐसा ही बांकीपुर में भी हुआ. किले की जर्जर दीवारों के पैबंद को ठीक करने की जगह यहां सत्तारूढ़ दल हवा के रुख के खिलाफ जाने की कोशिश कर रहा था. लेकिन किले हिल चुकी नींव को गिरने में ज्यादा वक्त नहीं लगता है. लगा भी नहीं. 31 साल से बीजेपी का गढ़ (किला) रहा बांकीपुर सीट ध्वस्त हो चुका है. अब वहां एक नया नेता आया है. सत्तारूढ़ दल का भ्रम वाला गढ़ टूट चुका है. अब नए नेता के सामने इस गढ़ में खुद को स्थापित करने की जिम्मेदारी होगी.

बांकीपुर में प्रशांत का परचम

बांकीपुर में प्रशांत का परचम

लालू यादव को भी लगा था झटका 

ऐसा नहीं है कि मौजूदा सत्तारूढ़ दल को ही गढ़ का भ्रम था. बिहार से सबसे ताकतवर और सामाजिक न्याय के मसीहा लालू यादव को भी ये भ्रम था. चाहे बात छपरा लोकसभा की हो या फिर मधेपुरा लोकसभा. मधेपुरा को तो यादव लैंड कहा जाता है. और बिहार में अभी भी यादवों के सर्वमान्य नेता लालू यादव हैं. पर उन्हें उस गढ़ में अपने स्वजातीय नेता शरद यादव से हार का सामना करना पड़ा था. 1999 के लोकसभा चुनाव में शरद यादव ने लालू यादव जैसे दिग्गज नेता को परास्त कर दिया. उस वक्त के राजनीतिक विश्लेषक भी इस घटना से अवाक हो गए थे. भला ये कैसे हो गया? लेकिन गढ़ होने का भ्रम यहां टूट गया था. दरअसल, भ्रम का गढ़ ध्वस्त हो गया था. ऐसे ही 2019 में छपरा लोकसभआ चुनाव में लालू यादव के करीबी संबंधी को हार का सामना करना पड़ा था. जबकि लालू यादव ने अपनी राजनीतिक शुरुआत ही यहां से की थी. उसके अगले चुनाव यानी 2024 के लोकसभा चुनाव में लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य को इस सीट से हार का स्वाद चखना पड़ा. यानी भ्रम का गढ़ यहां भी धाराशायी हो गया. 

यादव बहुल मधेपुरा सीट से लालू यादव को झेलनी पड़ी थी हार

यादव बहुल मधेपुरा सीट से लालू यादव को झेलनी पड़ी थी हार

नीतीश कुमार भी आए थे मुश्किल में 

बिहार की राजनीति में लालू यादव के बाद खास स्थान रखने वाले नीतीश कुमार को भी हरनौत से दो बार चुनाव हारना पड़ा था. 2014 में वो भी बीजेपी से अलग होकर चुनाव लड़े थे पर उन्हें भी मुश्किल का सामना करना पड़ा था. उनका गढ़ तो नहीं टूटा था लेकिन हां, उन्हें झटका जरूर लगा. विकास की राजनीति और सुशासन कुमार नाम से नवाजे गए नीतीश इन झटकों से उबरकर फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखे.

नीतीश कुमार को भी लग चुका है चुनावी झटका

नीतीश कुमार को भी लग चुका है चुनावी झटका

भ्रम का गढ़ टूट गया!

दरअसल, गढ़ का भ्रम ऐसा सपना है, जो नींद में आए तो ठीक लेकिन जगे में हुए आने लगे तो सतर्क होना जरूरी है. बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत और बीजेपी की हार में भी यही फर्क है. एक जगा हुआ आदमी सपना देख रहा था तो भ्रम का गढ़ टूटना ही था. दूसरा एक ऐसा शख्स था जिसे आपकी दीवारों की कमजोरी का पता था. तो उसने चोट वहीं की जहां सबसे ज्यादा नुकसान होना था. नुकसान तो हो ही गया. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की सीट ही बीजेपी ने गंवा दी. 31 साल से इस सीट पर बीजेपी का कब्जा था. लालू यादव के जमाने में भी कभी आरजेडी इसपर जीत नहीं पाई थी. 2025 के विधानसभा चुनाव में 202 सीटें जीतने वाली एनडीए के लिए ये भ्रम का गढ़ टूटने जैसा है. 

(डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Bankipur Assembly By-election, Prashant Kishor, Nitin Nabin, Bjp Vs Jan Suraj
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com