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This Article is From Mar 17, 2015

संजय किशोर का स्ट्रेट ड्राइव : बांग्ला टाइगर्स सावधान, इस बार माफ़ नहीं करेंगे माही

Sanjay Kishore
  • Blogs,
  • Updated:
    मार्च 17, 2015 21:08 pm IST
    • Published On मार्च 17, 2015 20:07 pm IST
    • Last Updated On मार्च 17, 2015 21:08 pm IST

नई दिल्‍ली : जख़्म पुराना है। 8 साल होने को आए लेकिन घाव अब भी रह-रह कर टीस मारता है। उस टीम के 10 खिलाड़ी इस वर्ल्ड कप में नहीं हैं लेकिन एक इस बार भी है। सीने में अपमान की आग सुलगाए हुए।

साल 2007। पोर्ट ऑफ़ स्पेन। वर्ल्ड कप का आठवां मैच। 17 मार्च का ही दिन था। शायद भारतीय क्रिकेट का सबसे स्याह दिन। राहुल द्रविड़ की कप्तानी में भारतीय टीम को 5 विकेट से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। वो भी एक ऐसी टीम के हाथों जो बेहद नौसिखिया मानी जाती थी।

हबीबुल बशर की बांग्लादेश टीम से हार के बाद भारत को वर्ल्ड कप से बड़े बेआबरू हो कर बाहर होना पड़ा था। मगर इस बार होशियार बांग्ला टाइगर्स! उस टीम का एक खिलाड़ी अब भी डटा हुआ है। बदला लेने के लिए। वो और कोई टीम इंडिया के मौज़ूदा कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी हैं। उस दिन शून्य पर आउट होने वाले तीन बल्लेबाज़ों में वे भी शामिल थे।

मशरफ़े मुर्तजा के 4 विकेट और तमीम इक़बाल, मुश्फ़िकुर रहीम और शाक़िब-अल-हसन के अर्धशतकों ने भारत की हार की कहानी लिख दी। ये चारों खिलाड़ी इस बार भी खेल रहे हैं। लिहाज़ा बांग्लादेश को हराकर उस दर्द और अपमान बदला लेने का माक़ूल मौक़ा है। हालांकि इस बार भी बांग्लादेश को अपने इन 4 खिलाड़ियों के साथ-साथ महमूदुल्ला पर बड़ा भरोसा है। महमूदुल्ला ने लगातार दो शतक भी ठोके हैं। आईसीसी ऑलराउंडर की वर्ल्ड रैंकिंग में दूसरे नंबर पर चल रहे शाक़िब-अल-हसन का कहना है, 'मेरी टीम के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं हैं लिहाज़ा हमें कोई डर नहीं हैं। तीन जीत के बाद हमारे आत्मविश्वास में कोई कमी नहीं है।'

डर नहीं है लेकिन डरना ज़रूरी है। बंगाल टाइगर्स की ये तमाम तैयारियां गुरुवार को धरी की धरी रहने की पूरी संभावना है जब मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर 70 हजार भारतीय दर्शकों के बीच धोनी के धुरंधर अपने सातवें विजय अभियान पर उतरेंगे। वर्ल्ड कप से बस 3 कदम दूर टीम इंडिया ऐसी कोई ग़लती करने नहीं जा रही है जिससे पड़ोसी मुल्क को जरा भी मौक़ा मिलेगा। बांग्लादेश के साथ 28 मुक़ाबलों में भारत 3 बार हारा है। एक बार 2007 से पहले और एक बाद में। वैसे धोनी इतिहास दोहराने में यकीन नहीं करते। वे इतिहास लिखते हैं। गुरुवार एक ऐसा ही दिन होगा जब इतिहास लिखा जाएगा।

बल्लेबाज़ों ने तो कई बार जीत की पटकथा तैयार की है लेकिन इस वर्ल्ड कप में टीम की सबसे कमज़ोर कड़ी गेंदबाज़ी सबसे ताकतवर हथियार बनकर उभरी है। 6 मैचों में 60 विकेट। वर्ल्ड कप के पहले कोई कल्पना तक कर सकता था कि गेंदबाज़ ऐसा शानदार प्रदर्शन करेंगे। पाकिस्तान, दक्षिण अफ़्रीका, यूएई, वेस्टइंडीज़, आयरलैंड और ज़िंबाब्वे जैसी टीमें जब 50 ओवर तक नहीं टिक पायीं तो बांग्लादेश के लिए ऐसा सोचना कितना बेमानी है।

ख़ुद धोनी कहते हैं, 'मैं तब बेहतरीन (कप्तान) हूं जब गेंदबाज़ अच्छी गेंदबाज़ी करते हैं।' मोहम्मद शमी, उमेश यादव, मोहित शर्मा, रविन्द्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन उस टीम को तो कतई माफ़ नहीं करेंगे जिसने उनके कप्तान को इतने गहरे जख़्म दिए हैं।

वर्ल्ड कप के मैचों के बीच इतना अंतर है कि टीम इंडिया को अपने आराम और अभ्यास की योजना पर अमल करने का पूरा वक्त मिल रहा है। साथ ही इस दौरान विरोधी टीम के ख़िलाफ़ रणनीति बानने का मौक़ा भी। अभी तक भारतीय टीम ने हर टीम के लिए अलग-अलग रणनीति बनायी है। मुश्किल खड़ी करने वाले खिलाड़ियों के लिए खास योजनाएं बनाकर घेरा गया है। कप्तान और टीम मैनेजमेंट का हर दांव अब तक कामयाब रहा है।

बांग्लादेश के ख़िलाफ़ क्वॉर्टरफ़ाइनल मुक़ाबले को एकतरफा बनाने की पूरी तैयारी हो चुकी होगी। लय टीम इंडिया के साथ है। शिखर धवन, विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे और सुरेश रैना एक यादगार जीत तैयार करेंगे। रोहित शर्मा शायद इस बार ज़्यादा खतरनाक पारी खेल जाएं। टीम की पुरानी परेशानियां फ़िलहाल कालीन तले दब गयी हैं। 'तू चल मैं आया' वाली बात भी इस बार नहीं मिली है। ज़िंबाब्वे के ख़िलाफ़ टॉप ऑडर लड़खड़ाया तो नीचले मघ्य क्रम ने संभाल लिया या यों कहें कप्तान महेन्द्र सिंह सुपर फ़िनिशर की भूमिका में आ गए।

लब्बोलुआब ये है कि इस बार माफ़ नहीं करेंगे माही।

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