बिहार के मधेपुरा जिले के शंकरपुर थाना परिसर से एक बेहद दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. वहीं इस घटना के बाद थाने में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. दरअसल, यहां एक युवती ने कथित तौर पर थाना परिसर के शौचालय में खुद को आग लगाकर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, जिसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. गंभीर रूप से झुलसी युवती को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी नाजुक हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया. अब वह जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है.
सुरक्षा के लिए ही लाया गया था थाना
जानकारी के अनुसार, यह मामला पहले दर्ज एक दुष्कर्म प्रकरण से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें मुख्य आरोपी पहले से जेल में बंद है. सोमवार (25 मई) की सुबह युवती ने कथित रूप से अपने शरीर पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश की थी. सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और युवती को सुरक्षा के मद्देनजर अपने साथ थाने ले आई.
युवती आग की लपटों में घिरी
बताया जा रहा है कि थाने पहुंचने के बाद युवती ने शौचालय जाने की बात कही और महिला पुलिसकर्मी के साथ वहां गई. कुछ देर बाद उसकी चीख सुनाई दी. जब पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे तो युवती आग की लपटों में घिरी हुई थी. पुलिस ने तत्काल आग बुझाई और उसे अस्पताल पहुंचाया.
इस घटना के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं. अगर युवती पहले से मानसिक तनाव में थी और उसके शरीर पर ज्वलनशील पदार्थ होने की आशंका थी, तो सुरक्षा और निगरानी के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए? क्या थाने में अतिरिक्त सावधानी बरती गई थी? और आखिर ऐसी स्थिति बनने तक प्रशासनिक सतर्कता में कहां कमी रह गई?
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच की बात कह रही है, जबकि इस घटना ने थाना परिसर के भीतर सुरक्षा प्रोटोकॉल और संवेदनशील मामलों के प्रबंधन को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
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