- 'लोगों को मोबाइल फोन की लत न लगे'
- 'रैली में भी 30 फीसदी लोग फोन में ही लगे रहते हैं'
- 'आमने-सामने की बातचीत में भी फोन बना बाधा'
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को स्मार्टफ़ोन पर लोगों का लगे रहना अच्छा नहीं लगता. ये बात नीतीश कुमार अब आये दिन सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलने से परहेज नहीं करते. शनिवार को पटना में एक कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने आईटी का महत्व गिनाते हुए कहा, 'आजकल जहां जइए वहां लोग फ़ोन पर दाएं बाएं करते हुए दिख जाते हैं.' नीतीश ने कहा कि लोगों का मोबाइल से चिपके रहना दिखाता है कि भविष्य में माता-पिता का स्वास्थ्य ख़राब होने पर लोग देखने की बजाय ये मैसेज डालेंगे कि जल्द माता-पिता के स्वस्थ होने की कामना करता हूं.
नीतीश ने इस संबंध में एक व्यक्तिगत अनुभव की चर्चा करते हुए कहा, 'अभी हाल ही में उनकी पार्टी से जुड़े एक नेता की मौत के बाद जब उन्होंने उनके बेटे को फ़ोन किया और पूछा कि उन्हें क्या हो गया था तो उसने बताया कि वॉट्सऐप पर उसने डाला था कि उनका स्वास्थ्य ख़राब चल रहा है. तब नीतीश ने सलाह दी कि मोबाइल फ़ोन लोगों की ज़रूरत में सहायक है ना की लोग उसके आदी हो जाएं.
नीतीश कुमार ने फिर की जातिगत जनगणना की वकालत...
दरअसल नीतीश कुमार को चिढ़ इस बात की है कि आजकल लोग जब आमने-सामने की बात करते हैं तो अधिकांश समय अपने आपको मोबाइल फ़ोन पर व्यस्त कर लेते हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव होने वाले हैं और जब चुनावी रैली भी होती है तो भीड़ में कम से कम 30 प्रतिशत ऐसे लोग होते हैं जो नेता का भाषण सुनने की बजाय मोबाइल फ़ोन पर ही व्यस्त रहते हैं.
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