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ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा ने UPSC में लहराया परचम, हासिल की 301वीं रैंक

आकांक्षा ने बताया कि पहले प्रयास में सफलता नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कमजोरियों को पहचानकर बेहतर तैयारी की. उसी का परिणाम है कि दूसरे प्रयास में ही उन्हें यह सफलता मिल गई.

ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा ने UPSC में लहराया परचम, हासिल की 301वीं रैंक
  • ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा ने UPSC परीक्षा में 301वीं रैंक हासिल कर भोजपुर जिले का नाम रोशन किया है
  • आकांक्षा ने सफलता का श्रेय परिवार, शिक्षकों और नियमित दस से बारह घंटे पढ़ाई करने को दिया है
  • उन्होंने बताया कि यूपीएससी में निरंतरता, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ असफलताओं से सीखना जरूरी होता है
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आरा (बिहार):

रणवीर सेना के प्रमुख रहे स्व. ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती और पूर्व मुखिया इंदु भूषण सिंह की सुपुत्री आकांक्षा सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रतिष्ठित परीक्षा में 301वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार के साथ-साथ पूरे भोजपुर जिले का नाम रोशन किया है. आकांक्षा सिंह की यह सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने यह उपलब्धि अपने दूसरे ही प्रयास में हासिल की है.

आकांक्षा सिंह की इस उपलब्धि के बाद उनके घर-परिवार, रिश्तेदारों और इलाके में खुशी का माहौल है. जैसे ही यूपीएससी के परिणाम की जानकारी मिली, परिवार के लोग और आसपास के लोग उन्हें बधाई देने के लिए उनके घर पहुंचने लगे.

मेहनत और अनुशासन से हासिल की सफलता

आकांक्षा सिंह ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार के सदस्यों और शिक्षकों को दिया है. उन्होंने बताया कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को पास करने के लिए उन्होंने नियमित रूप से प्रतिदिन 10 से 12 घंटे तक पढ़ाई की. उन्होंने कहा कि इस परीक्षा में सफलता पाने के लिए केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि निरंतरता, धैर्य और आत्मविश्वास भी बेहद जरूरी होता है. असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए.

उन्होंने बताया कि पहले प्रयास में सफलता नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कमजोरियों को पहचानकर बेहतर तैयारी की. उसी का परिणाम है कि दूसरे प्रयास में ही उन्हें यह सफलता मिल गई.

आकांक्षा का कहना है कि सही मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास से ही यूपीएससी जैसी परीक्षा में सफलता प्राप्त की जा सकती है. उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान अखबार पढ़ने, समसामयिक घटनाओं पर ध्यान देने और नियमित उत्तर लेखन अभ्यास को अपनी सफलता का प्रमुख आधार बताया.

परिवार का मिला पूरा सहयोग

आकांक्षा के पिता इंदु भूषण सिंह अपने क्षेत्र के पूर्व मुखिया रह चुके हैं. वहीं उनकी माता रिंकू देवी गृहिणी हैं। परिवार के सभी सदस्यों ने आकांक्षा को पढ़ाई के लिए हमेशा प्रेरित किया और हर परिस्थिति में उनका मनोबल बढ़ाया. परिवार के लोगों का कहना है कि आकांक्षा बचपन से ही पढ़ाई को लेकर गंभीर और अनुशासित रही हैं. उन्होंने कभी भी अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं भटकने दिया और लगातार मेहनत करती रहीं.

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24 वर्ष की उम्र में हासिल की बड़ी उपलब्धि

महज 24 वर्ष की उम्र में यूपीएससी में 301वीं रैंक हासिल करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. इतनी कम उम्र में इस प्रतिष्ठित परीक्षा को पास कर आकांक्षा सिंह ने यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो तो सफलता जरूर मिलती है.

परिवार की पृष्ठभूमि

आकांक्षा सिंह के दादा स्वर्गीय ब्रह्मेश्वर मुखिया बिहार की राजनीति और सामाजिक इतिहास में एक चर्चित नाम रहे हैं. बताया जाता है कि उन्होंने 6 जुलाई 1985 को रणवीर सेना का गठन किया था. हालांकि आकांक्षा सिंह की पहचान उनकी अपनी मेहनत और उपलब्धि से बनी है. परिवार के लोग भी मानते हैं कि उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है.

(आरा से सैयद मेराज की रिपोर्ट...)

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