शहाबुद्दीन (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
राजद नेता शहाबुद्दीन के मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा कि अगर निचली अदालत ने शहाबुद्दीन को बहस के लिए वकील मुहैया कराया था तो उस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देने की जरूरत क्या थी?
अगर शहाबुद्दीन अदालत से लीगल ऐड मांग रहा था तो उसको देने में हर्ज़ क्या था? इस पर बिहार सरकार ने कहा शहाबुद्दीन को लीगल ऐड की जरूरत नहीं थी और सरकार लीगल ऐड का खर्चा नहीं उठाना चाहती थी क्योंकि शहाबुद्दीन अपने लिए किसी वकील को बहस के लिए नियुक्त करने में सक्षम हैं.
दरअसल सेशन कोर्ट ने शहाबुद्दीन को उसके खिलाफ लंबित मामलों में बहस के लिए लीगल ऐड के जरिए वकील उपलब्ध कराया था जिसको बिहार सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. और हाई कोर्ट ने सेशन कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी. इसके बाद उसके खिलाफ सभी मामलों पर रोक लग गई थी.
वहीं बिहार सरकार ने फिर कहा शहाबुद्दीन को बिहार से ट्रांसफर न किया जाए और न ही केस को. वहीं शहाबुद्दीन की तरफ से कहा गया कि वह पिछले 11 साल से जेल में है ऐसे में उसके पास पैसे नहीं कि वह बहस के लिए वकील रख सके.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि जिस तरफ पप्पू यादव को बिहार की जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में ट्रांसफर किया गया था और मामले की सुनवाई बिहार में ही हो रही थी उसी तरह शहाबुद्दीन को बिहार से तिहाड़ जेल ट्रांसफर कर मामले की सुनवाई बिहार में ही की जा सकती है और अगर जरूरत होगी तो शहाबुद्दीन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया जो मामले हाई कोर्ट के सामने लंबित हैं उनमें दखल नहीं देंगे लेकिन शहाबुद्दीन को बिहार से तिहाड़ जेल ट्रांसफर किया जाए या नहीं इस पर विचार जरूर करेंगे. जो मामले निचली अदालत में लंबित हैं उनको दिल्ली ट्रांसफर किया जाए या नहीं, या फिर शहाबुदीन को तिहाड़ ट्रांसफर कर निचली अदालत में सुनवाई जारी रखेंगे. अगर जरूरत होगी हो शहाबुद्दीन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया जा सकेगा.
मामले की सुनवाई बुधवार भी जारी रहेगी. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चुटकी लेते हुए यह भी कहा कि क्या वाकई शहाबुद्दीन के पास बहस के लिए वकील करने के पैसे नहीं हैं. वरिष्ठ वकील जो उनके लिए सुप्रीम कोर्ट में बहस कर रहे हैं क्या वे एमिकस हैं. तब वरिष्ठ अधिवक्ता नाफड़े ने कहा शहाबुद्दीन के लिए कोई पेश होने को तैयार नहीं है इसलिए उन्होंने यह केस लिया है.
बिहार के राजद नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ मामलों को दिल्ली ट्रांसफर करने को लेकर कोर्ट ने अहम सुनवाई की. सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा था कि क्यों न सारे केस दिल्ली ट्रांसफर कर दिए जाएं? क्यों न शहाबुद्दीन को भी सीवान से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया जाए? यह मामला भारतीय अपराध शास्त्र में गवाहों की सुरक्षा और फेयर ट्रायल के कांसेप्ट की असली परीक्षा है.
बिहार के सीवान में पत्रकार राजदेव हत्या मामले में उनकी पत्नी आशा रंजन द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. इसी के साथ तीन बेटों को गवां चुके चंदा बाबू की ओर से अर्जी दाखिल की गई है. याचिका में केस को दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की गई है. साथ ही आरोपी को शरण देने के मामले में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव और राजद नेता शहाबुद्दीन पर आरोपी को शरण देने के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है.
अगर शहाबुद्दीन अदालत से लीगल ऐड मांग रहा था तो उसको देने में हर्ज़ क्या था? इस पर बिहार सरकार ने कहा शहाबुद्दीन को लीगल ऐड की जरूरत नहीं थी और सरकार लीगल ऐड का खर्चा नहीं उठाना चाहती थी क्योंकि शहाबुद्दीन अपने लिए किसी वकील को बहस के लिए नियुक्त करने में सक्षम हैं.
दरअसल सेशन कोर्ट ने शहाबुद्दीन को उसके खिलाफ लंबित मामलों में बहस के लिए लीगल ऐड के जरिए वकील उपलब्ध कराया था जिसको बिहार सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. और हाई कोर्ट ने सेशन कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी. इसके बाद उसके खिलाफ सभी मामलों पर रोक लग गई थी.
वहीं बिहार सरकार ने फिर कहा शहाबुद्दीन को बिहार से ट्रांसफर न किया जाए और न ही केस को. वहीं शहाबुद्दीन की तरफ से कहा गया कि वह पिछले 11 साल से जेल में है ऐसे में उसके पास पैसे नहीं कि वह बहस के लिए वकील रख सके.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि जिस तरफ पप्पू यादव को बिहार की जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में ट्रांसफर किया गया था और मामले की सुनवाई बिहार में ही हो रही थी उसी तरह शहाबुद्दीन को बिहार से तिहाड़ जेल ट्रांसफर कर मामले की सुनवाई बिहार में ही की जा सकती है और अगर जरूरत होगी तो शहाबुद्दीन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया जो मामले हाई कोर्ट के सामने लंबित हैं उनमें दखल नहीं देंगे लेकिन शहाबुद्दीन को बिहार से तिहाड़ जेल ट्रांसफर किया जाए या नहीं इस पर विचार जरूर करेंगे. जो मामले निचली अदालत में लंबित हैं उनको दिल्ली ट्रांसफर किया जाए या नहीं, या फिर शहाबुदीन को तिहाड़ ट्रांसफर कर निचली अदालत में सुनवाई जारी रखेंगे. अगर जरूरत होगी हो शहाबुद्दीन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया जा सकेगा.
मामले की सुनवाई बुधवार भी जारी रहेगी. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चुटकी लेते हुए यह भी कहा कि क्या वाकई शहाबुद्दीन के पास बहस के लिए वकील करने के पैसे नहीं हैं. वरिष्ठ वकील जो उनके लिए सुप्रीम कोर्ट में बहस कर रहे हैं क्या वे एमिकस हैं. तब वरिष्ठ अधिवक्ता नाफड़े ने कहा शहाबुद्दीन के लिए कोई पेश होने को तैयार नहीं है इसलिए उन्होंने यह केस लिया है.
बिहार के राजद नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ मामलों को दिल्ली ट्रांसफर करने को लेकर कोर्ट ने अहम सुनवाई की. सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा था कि क्यों न सारे केस दिल्ली ट्रांसफर कर दिए जाएं? क्यों न शहाबुद्दीन को भी सीवान से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया जाए? यह मामला भारतीय अपराध शास्त्र में गवाहों की सुरक्षा और फेयर ट्रायल के कांसेप्ट की असली परीक्षा है.
बिहार के सीवान में पत्रकार राजदेव हत्या मामले में उनकी पत्नी आशा रंजन द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. इसी के साथ तीन बेटों को गवां चुके चंदा बाबू की ओर से अर्जी दाखिल की गई है. याचिका में केस को दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की गई है. साथ ही आरोपी को शरण देने के मामले में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव और राजद नेता शहाबुद्दीन पर आरोपी को शरण देने के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है.
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