बिहार में राज्यसभा के लिए हुए चुनाव में RJD के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह को हार का सामना करना पड़ा और NDA ने उपेन्द्र कुशवाहा को जितवा लिया. कुशवाहा की जीत का कारण ये रहा कि कांग्रेस के 3 और आरजेडी का एक विधायक वोट डालने आया ही नहीं. RJD को अपना उम्मीदवार जितवाने के लिए 41 वोटों की जरूरत थी. महागठबंधन के 35 वोट थे. उसे AIMIM के 5 और BSP के इकलौते विधायक के वोट की जरूरत थी. AIMIM ने पहले ना-ना करते हुए आखिरकार हां किया और RJD के पक्ष में वोट किया. बीएसपी के विधायक भी आरजेडी के साथ रहे, मगर कांग्रेस के 6 में से 3 विधायक वोट डालने ही नहीं आए. साथ ही RJD के भी एक विधायक फैसल रहमान गायब हो गए. यहां बता दूं कि फैसल रहमान के पिता मोतिउर रहमान को RJD ने राज्यसभा भी भेजा हुआ था.
कांग्रेस के 3 विधायक जिनके ना आने से RJD को हार का मुंह देखना पड़ा, वो हैं- मनोज विश्वास, मनोहर प्रसाद सिंह और सुरेन्द्र कुशवाहा. सुरेन्द्र कुशवाहा पहले उपेन्द्र कुशवाहा के साथ रह चुके हैं. इसलिए बिहार में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि कांग्रेस की वजह से एक बार फिर तेजस्वी यादव को हार का मुंह देखना पड़ा.
तेजस्वी ने काफी मेहनत कर AIMIM को मनाया था
इस राज्यसभा चुनाव के लिए तेजस्वी ने काफी मेहनत कर AIMIM को मनाया था. वो AIMIM के नेता अख्तरूल ईमान की इफ़्तार पार्टी में भी गए, जबकि बिहार चुनाव के वक्त ये दोनों एक-दूसरे के खिलाफ लड़े थे. इसी तरह तेजस्वी ने BSP के इकलौते विधायक को भी मनाया, जो महागठबंधन का हिस्सा भी नहीं थे. साथ ही IIP के IP गुप्ता को भी हमेशा अपने साथ रखा क्योंकि वो भी इकलौते विधायक थे. मगर कांग्रेस को एकजुट नहीं रख पाए.

पार्टी विधायकों को एकजुट करने में चूके कांग्रेस नेता
कांग्रेस को एकजुट रखने की ज़िम्मेदारी कांग्रेस के नेताओं की थी लेकिन वो अपने इस काम में बुरी तरह विफल रहे और ख़ामियाज़ा तेजस्वी यादव को झेलना पड़ा. कांग्रेस के 3 विधायक नाराज हैं ये बात पूरे बिहार को पता था केवल कांग्रेस पार्टी को छोड़कर. कांग्रेस ने शायद कभी कोशिश ही नहीं कि इन विधायकों की खोज खबर ली जाए, शायद उन्हें लगा कि उम्मीदवार RJD का खड़ा है उन्हें मेहनत करने की ज़रूरत क्या है?
विधानसभा चुनाव में भी दोनों दलों में दिखी थी गफलत
कुछ ऐसे ही हालात बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त देखने को मिला था, जब कांग्रेस ने आरजेडी के साथ सीटों के बंटवारे को इतना लंबा खिंचा कि अंतिम समय तक यह मालूम नहीं चला कि कौन सी पार्टी कौन सी सीट लड़ेगी. इसका नतीजा ये हुआ कि आधा दर्जन सीटों पर आरजेडी और कांग्रेस दोनों के उम्मीदवार चुनाव लड़े और हारे.

विधानसभा के बाद अब राज्यसभा में भी हार
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने वोट अधिकार यात्रा निकाल कर बिहार में महागठबंधन के पक्ष में जो हवा बनाई थी, वो सीटों के बंटवारे में हुई देरी और जिद की वजह से पूरी तरह गंवा दिया. जब कांग्रेस ने बिहार में टिकट बांटे तभी पार्टी दफ्तर में आंदोलन, प्रदर्शन और मारपीट हुई और कहा गया कि कांग्रेस में बीजेपी के स्लीपर सेल मौजूद है. अब इसका नतीजा राज्यसभा चुनाव में देखने को मिला.
बिहार चुनाव के दौरान जब तेजस्वी यादव को लगा कि वो महागठबंधन के साथियों की वजह से पिछड़ रहे हैं तो अपनी रणनीति बदली और अकेले यात्रा पर निकले, मगर तब तक देर हो चुकी थी. एनडीए ने महिलाओं तक पैसे पहुंचाए और तेजस्वी उसका जवाब नहीं दे पाए और हालत ये हुई कि जब नतीजे आए तो तेजस्वी केवल उतनी ही सीट ला पाए, जिससे कि वो नेता प्रतिपक्ष बन सके.
तेजस्वी सोच रहे होंगे- काश कांग्रेस विधायकों पर भी की होती मेहनत
आज तेजस्वी को यह जरूर अहसास हो रहा होगा कि काश उन्होंने कांग्रेस विधायकों पर भी उतनी ही मेहनत करते जितना उन्होंने AIMIM पर किया. बहरहाल जो भी हो कांग्रेस की वजह से तेजस्वी को एक बार फिर हार का मुंह देखना पड़ा है. वैसे RJD का भी एक विधायक वोट देने नहीं आया. मगर शायद ही उस पर कोई कार्रवाई हो क्योंकि यदि आप उसे पार्टी से निकाल भी देते हैं तो भी उसकी सदस्यता बरकरार रहेगी इसलिए ना तो कांग्रेस अपने विधायकों को पार्टी से निकालेगी और ना ही तेजस्वी अपने विधायक को.
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