- नीतीश कुमार ने किया पलटवार
- विपक्ष पर साधा निशाना
- घटना के सामने आते ही तेजी से हुई जांच
मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड के घटनाक्रम
29 जुलाई 2018: मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड में CBI ने आरोपी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया.
28 जुलाई को 2018: मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय रेप कांड में 42 में से 34 बच्चियों से रेप की पुष्टि हुई.
26 जुलाई 2018: बिहार सरकार ने मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में लड़कियों के यौन उत्पीड़न मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की.
25 जुलाई 2018: तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्षी दलों के नेता मुज़फ्फ़रपुर आये. सीबीआई जांच की मांग. रवि रोशन की पत्नी ने समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के पति पर गंभीर आरोप लगाये.
24 जुलाई 2018: लोकसभा में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर बिहार सरकार चाहे तो हम सीबीआाई जांच के लिए तैयार हैं.
23 जुलाई 2018: मुजफ्फरपुर बालिका गृह के परिसर में ज़मीन की खुदाई हुई, मगर शव का कोई अवशेष नहीं मिला. इसके अलावा इसी दिन संसद में भी यह मामला उठा.
20 जुलाई 2018: पॉक्सो कोर्ट ने बालिका गृह में मृत बच्ची के शव की खोज के लिए ज़मीन खोदने का आदेश दिया. इसके अलावा मेडिकल रिपोर्ट में भी बलात्कार की पुष्टि हुई.
19 जुलाई 2018: पटना में एक बच्ची ने बयान दिया कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में एक बच्ची की बलात्कार के बाद का हत्या कर दी गई. इसके बाद मामला और भी ज्यादा गरमा गया.
09 जुलाई 2018: मुजफ्फरपुर बालिका गृह में बच्चियों के साथ बलात्कार मामले में पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार से जवाब मांगा.
03 जुलाई 2018: सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर.
27 जून 2018: मुजफ्फरपुर बाल संरक्षण अधिकारी रवि रोशन को पुलिस ने गिरफ्तार किया.
25 जून 2018: बालिका गृह की 22 बच्चियों के बयान कोर्ट में दर्ज कराए गये. बच्चियों ने कोर्ट के समक्ष बताया कि उसे नशे की दवा खिला कर उसके साथ गलत काम किया जाता था.
15 जून 2018: मुजफ्फऱपुर जिले में तैनात समाज कल्याण के दो अधिकारी को निलंबित किया गया.
03 जून 2018: बालिका गृह के संरक्षक और मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर समेत आठ लोगों को गिरफ़्तार किया गया.
02 जून 2018: पुलिस ने मुख्य आरोपी और बालिका गृह के संचालक ब्रजेश ठाकुर समेत एनजीओ से जुड़े करीब 8 लोगों को थाने में बुलाकर पूछताछ शुरू की और बालिका गृह को सील किया गया.
31 मई, 2018: टिस की रिपोर्ट के मद्देनजर मुजफ्फरपुर बालिका गृह को खाली कराया गया और वहां की बच्चियों को पटना, मोकामा अन्य बालिका गृह में शिफ्ट किया गया. साथ ही पहली प्राथमिकी दर्ज की गई.
26 मई, 2018 : टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस की रिपोर्ट रिपोर्ट समाज कल्याण विभाग के निदेशक तक पहुंची.
फरवरी, 2018 : टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस यानी कि टिस टीम ने बिहार के बालिका आश्रय गृह पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट समाज कल्याण विभाग को सौंपी. इस टीम ने अनपी ऑडिट में पाया था कि बालिका गृह का रख रखाव सही नहीं है और रिपोर्ट में बच्चियों के साथ दुर्रव्यवहार की शिकायतें भी मिली थीं.
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