Vaishali News: बिहार की सियासत में आज एक बड़ा 'मिथक' टूटने जा रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) पूरे एक दशक के लंबे इंतजार के बाद मंगलवार को खुद वैशाली महोत्सव (Vaishali Mahotsav) का उद्घाटन करेंगे. शाम 4 बजे जब सीएम का हेलिकॉप्टर वैशाली की धरती पर उतरेगा, तो यह सिर्फ एक सरकारी दौरा नहीं होगा, बल्कि उन तमाम सवालों का जवाब होगा जो पिछले 10 साल से पूछे जा रहे थे. आखिर क्यों नीतीश कुमार इस ऐतिहासिक धरती से दूरी बनाए हुए थे?
क्यों 10 साल तक वैशाली से दूर रहे नीतीश
इस महोत्सव से मुख्यमंत्री की 10 साल की दूरी के पीछे सबसे बड़ा कारण पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह का इस इलाके में जबरदस्त सियासी दबदबा माना जाता था. रघुवंश बाबू ताउम्र वैशाली में 'बुद्ध के अस्थि कलश' को वापस लाने की लड़ाई लड़ते रहे और नीतीश सरकार के लिए इस गढ़ को भेदना हमेशा से एक चुनौती रही. यही वजह थी कि मुख्यमंत्री खुद आने के बजाय अपने मंत्रियों को भेजकर औपचारिकता पूरी करते थे. लेकिन अब समीकरण बदल चुके हैं. वैशाली में एनडीए का कब्जा है और नीतीश कुमार अब खुद उस 'अस्थि कलश' की स्थापना कर रघुवंश बाबू की विरासत को अपने विकास एजेंडे से जोड़ रहे हैं.
500 जवानों के साये में पहुंचेगा भारी लाव-लश्कर

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मुख्यमंत्री के इस हाई-प्रोफाइल दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है. डीएम वर्षा सिंह और एसपी विक्रम सिहाग ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर साफ किया कि सुरक्षा में रत्ती भर की भी चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी. एसपी सिहाग ने बताया कि सुरक्षा के लिए 500 से अधिक अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं और पड़ोसी जिलों से भी कड़क पुलिस पदाधिकारियों को बुलाया गया है. सीएम सबसे पहले 550 करोड़ की लागत से बने भव्य 'बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय' पहुंचेंगे, जहां वे बुद्ध की प्रतिमाओं का अनावरण और संग्रहालय के नए द्वार का उद्घाटन करेंगे.
उदित नारायण और अनूप जलोटा के सुरों से सजेगी शाम
31 मार्च से 2 अप्रैल तक चलने वाला यह तीन दिवसीय राजकीय महोत्सव कलाकारों के जमावड़े के लिहाज से भी बेहद खास है. सीएम के उद्घाटन के बाद विश्व प्रसिद्ध गायक उदित नारायण, अनूप जलोटा और गायिका कल्पना पटवारी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे. डीएम वर्षा सिंह ने जिलेवासियों से इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में सहयोग की अपील की है. प्रशासन ने इसे एक 'मेगा इवेंट' के रूप में प्रमोट किया है ताकि वैशाली को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र (International Tourism Hub) के रूप में नई पहचान मिल सके.
क्या वैशाली बनेगा नीतीश का नया 'मास्टरस्ट्रोक'?
आज का यह दौरा सिर्फ फीता काटने तक सीमित नहीं है. 550 करोड़ का बुद्ध संग्रहालय और अस्थि कलश की स्थापना यह संदेश देने के लिए काफी है कि नीतीश सरकार अब वैशाली की कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे पर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. वैशाली के विकास का वो नया अध्याय आज से शुरू होने जा रहा है, जिसका इंतजार यहां के लोग पिछले एक दशक से कर रहे थे. अब देखना यह है कि नीतीश कुमार का यह 'वैशाली कार्ड' आने वाले चुनावों में क्या रंग लाता है.
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