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नेपाल की बाढ़ का असर अब बिहार पर, बीमारियों का बढ़ा खतरा; कोसी और गंडक से पहुंच रहा दूषित पानी

बिहार में गंडक और कोसी नदियों के बढ़ते जलस्तर के साथ दूषित मलबा, मृत जीव और गंदगी आने से जलजनित व संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है.

नेपाल की बाढ़ का असर अब बिहार पर, बीमारियों का बढ़ा खतरा; कोसी और गंडक से पहुंच रहा दूषित पानी
नेपाल में बाढ़ के बाद वहां का गंदा पानी अब बिहार में आ रहा है.

नेपाल में कुछ दिन पहले आई भीषण फ्लैश फ्लड ने कई जिलों में भारी तबाही मचा दी. पहाड़ी क्षेत्रों में आई बाढ़ ने गांव, सड़कें, पुल और अन्य ढांचों को नुकसान पहुंचाया. अब इस आपदा का असर भारत के बिहार राज्य में भी दिखाई देने लगा है. नेपाल की त्रिशूली नदी का पानी गंडक और कोसी नदियों के माध्यम से बिहार पहुंच रहा है, जिससे सीमावर्ती जिलों में स्वास्थ्य और कृषि को लेकर चिंता बढ़ गई है.

गंडक और कोसी का बढ़ता जलस्तर

उत्तर बिहार की प्रमुख नदियों गंडक और कोसी में जलस्तर लगातार बढ़ा हुआ है. कोसी नदी को लंबे समय से "बिहार का शोक" कहा जाता है क्योंकि यह अतीत में कई बार बड़े पैमाने पर तबाही का कारण बन चुकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल से आने वाला बाढ़ का पानी अपने साथ बड़ी मात्रा में गाद, कीचड़ और दूषित सामग्री लेकर आ रहा है.

नदियों में बहकर आ रहा है खतरनाक मलबा

नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद नदियों में भारी मात्रा में मलबा बहा है. इसके साथ पत्थर, पेड़ों के तने, गाद, मरी हुई मछलियां और अन्य अवशेष भी बिहार की ओर आ रहे हैं.

रिपोर्टों के अनुसार बाढ़ में बह गए वाहनों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं का मलबा भी नदी के प्रवाह में शामिल है. कई इलाकों से घरेलू सामान, बर्तन और एलपीजी सिलेंडर तक बहकर आने की सूचना है. सबसे बड़ी चिंता मानव शवों और मृत पशुओं के नदी में मिलने को लेकर है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.

इन बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित पानी के कारण डायरिया, हैजा और टाइफाइड जैसी बीमारियां फैल सकती हैं. हेपेटाइटिस ए और ई का खतरा भी बढ़ सकता है. वहीं जलजमाव वाले क्षेत्रों में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है. त्वचा और आंखों से जुड़ी बीमारियों का भी खतरा बना हुआ है.

आयरन की पुरानी समस्या बढ़ा सकती है संकट

बिहार के कई सीमावर्ती जिलों जैसे पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, किशनगंज, पूर्णिया और अररिया में भूजल में आर्सेनिक की समस्या पहले से मौजूद है. इसके अलावा किशनगंज, अररिया, सुपौल, मधुबनी, गोपालगंज और चंपारण क्षेत्र के कई जिलों में आयरन की मात्रा भी अधिक पाई जाती है. ऐसे में दूषित बाढ़ का पानी स्थानीय जल स्रोतों की समस्या को और गंभीर बना सकता है.

डॉक्टरों ने दी सतर्क रहने की सलाह

एनडीटीवी से बातचीत में डॉक्टर पीवी सिंह ने कहा कि प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना जरूरी है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सावधानी नहीं बरती गई तो जलजनित और संक्रामक बीमारियां लोगों के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं. उन्होंने साफ पानी, स्वच्छता और त्वरित स्वास्थ्य निगरानी को सबसे जरूरी कदम बताया.

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