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This Article is From Aug 15, 2025

पूर्णिया के झंडा चौक पर आधी रात को फहराया जाता है राष्ट्रीय झंडा, वजह जान हो जाएंगे हैरान

पूर्णिया के ऐतिहासिक झंडा चौक पर यह परंपरा वर्ष 1947 से निभाई जा रही है. जब आजादी की घोषणा हुई तब पहली बार 14 अगस्त, 1947 की मध्य रात्रि 12 बजकर 01 मिनट पर स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह और उनके साथियों ने मिलकर झंडा फहराया था.

पूर्णिया के झंडा चौक पर आधी रात को फहराया जाता है राष्ट्रीय झंडा, वजह जान हो जाएंगे हैरान
1947 में 14 अगस्त की रात्रि यहां झंडा फहराने वाले स्वतंत्रता सेनानी के वंशज ही यहां झंडा फहराते हैं.
  • पूर्णिया के झंडा चौक पर 79 वर्षों से हर 14 अगस्त की मध्यरात्रि को झंडा फहराने की परंपरा निभाई जा रही है.
  • यह परंपरा वर्ष 1947 में स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह और उनके साथियों द्वारा शुरू की गई थी.
  • झंडा फहराने की व्यवस्था स्वतंत्रता सेनानी के वंशज और स्थानीय दुकानदारों के सहयोग से होती रही है.
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पूर्णिया:

14 अगस्त की मध्य रात्रि पूर्णिया वासियों के लिए काफी महत्वपूर्ण है. पिछले 79 वर्षों से पूर्णिया शहर के ऐतिहासिक झंडा चौक पर पंजाब के अटारी-बाघा बॉर्डर की तर्ज पर आधी रात को झंडा फहराने की परंपरा चली आ रही है. इस वर्ष भी यहां रात्रि 12.01 मिनट पर झंडोत्तोलन कर इस अनूठी और ऐतिहासिक परम्परा को जिंदा रखा गया. यह आयोजन स्थानीय लोगों के सहयोग से होता रहा है. परंपरा के अनुसार वर्ष 1947 में 14 अगस्त की रात्रि यहां झंडा फहराने वाले स्वतंत्रता सेनानी के वंशज ही यहां झंडा फहराते रहे हैं. इस खास क्षण का गवाह बनने के लिए झंडा चौक पर शाम से ही लोग जुटना शुरू हो जाते हैं. दशकों से चली आ रही परम्परा के अनुसार यहां झंडो फहराने के बाद जलेबियां बांटी जाती है.

पूर्णिया के ऐतिहासिक झंडा चौक पर यह परंपरा वर्ष 1947 से निभाई जा रही है. जब आजादी की घोषणा हुई तब पहली बार 14 अगस्त, 1947 की मध्य रात्रि 12 बजकर 01 मिनट पर स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह और उनके साथियों ने मिलकर झंडा फहराया था. तब से यह परम्परा लगातार चली आ रही है और इस स्थान का नाम झंडा चौक हो गया. झंडा फहराने की सारी व्यवस्था स्वतंत्रता सेनानी के परिजनों द्वारा आसपास के दुकानदारों के सहयोग से की जाती रही है. इस संबंध में स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह के पौत्र विपुल सिंह बताते हैं कि जब देश आजाद हुआ तो सबसे पहले उनके दादा ने झंडोत्तोलन किया था. इसके बाद रामजतन साह, डा नर्सिंग प्रसाद सिंह, जयसिंह पटेल, महावीर सिंह, शमशूल हक, आनंद सिंह, सुदेश सिंह आदि द्वारा झंडोत्तोलन किया गया है.

राजकीय समारोह के दर्जे की होती रही है मांग

इस मौके पर हर वर्ष स्थानीय विधायक विजय खेमका और नगर निगम महापौर विभा कुमारी भी मौजूद होती हैं. महापौर विभा कुमारी ने घोषणा किया कि आगे नगर निगम ही इस समारोह की सारी जिम्मेदारी लेगा, जो अबतक स्थानीय लोग लेते रहे हैं.वहीं विधायक एवं महापौर ने राज्य सरकार से मांग किया कि इस कार्यक्रम को राजकीय समारोह का दर्जा प्रदान किया जाए. क्योंकि यह घटना स्वतंत्रता आंदोलन का अमिट हिस्सा है.

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