Bihar News: बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार भले ही हर दिन नए फरमान जारी कर रही हो, लेकिन जहानाबाद जिले में जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. सदर प्रखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय, अंबेडकर नगर में शिक्षकों की ऐसी मनमानी सामने आई है जिसने पूरे महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है. यहां स्कूल की पढ़ाई बच्चों के भविष्य पर नहीं, बल्कि गुरुजी के मूड पर टिकी है.
मिड-डे मील खिलाते ही जड़ दिया ताला
सड़क पर सन्नाटा और स्कूल के गेट पर लटका यह ताला किसी रविवार की छुट्टी का नहीं, बल्कि एक भरे-पूरे कार्य दिवस का है. शुक्रवार को सुबह स्कूल तो खुला, लेकिन तैनात चार शिक्षकों में से केवल एक शिक्षिका ही ड्यूटी पर पहुंचीं. रस्म अदायगी के लिए बच्चों को बुलाया गया और मिड-डे मील का खाना खिलाया गया. जैसे ही बच्चों ने खाना खत्म किया, उन्हें 'ट्रेनिंग' का बहाना बनाकर घर भेज दिया गया और शिक्षकों ने खुद स्कूल में ताला जड़कर घर की राह पकड़ ली. बच्चों का कहना है कि उन्हें जबरन छुट्टी देकर बाहर निकाल दिया गया.
मोबाइल में डूबे गुरुजी, डस्टर से पिटाई का खौफ
स्थानीय अभिभावकों ने जो आरोप लगाए हैं, वे और भी ज्यादा गंभीर हैं. मोहल्ले वालों का कहना है कि स्कूल में रहने के दौरान भी शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के बजाय अपने मोबाइल फोन में डूबे रहते हैं. अगर कोई मासूम बच्चा अपनी जिज्ञासा लेकर शिक्षकों के पास जाता है या क्लास में शोर होता है, तो उसे समझाने के बजाय कुर्सी पर बैठे-बैठे ही डस्टर फेंककर मारा जाता है. यही वजह है कि अब डर के मारे अभिभावक अपने बच्चों को यहां भेजने से कतराने लगे हैं और स्कूल में बच्चों की संख्या लगातार घटती जा रही है.
डीएम ने लिया एक्शन, मास्टर साहब को नोटिस
शिक्षकों की इस मनमानी और लापरवाही की गूंज अब जिला प्रशासन के गलियारों तक पहुंच चुकी है. जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है. जैसे ही मामला उनके संज्ञान में आया, उन्होंने तुरंत जिला शिक्षा पदाधिकारी से पूरी रिपोर्ट तलब कर ली है. शुरुआती जांच में दोषी पाए जाने पर विद्यालय के हेडमास्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.
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