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This Article is From Aug 22, 2019

क्या तेजस्वी यादव की जिद के आगे झुक गए लालू यादव?

पार्टी के कई वरिष्ठ नेता ऐसे भी हैं जिनका मानना है कि तेजस्वी यादव ने लोक सभा चुनावों के बाद अपने आचरण से पार्टी के विधायक, कार्यकर्ता और नेताओं सभी को निराश ही किया है.  

क्या तेजस्वी यादव की जिद के आगे झुक गए लालू यादव?
कुछ नेता पार्टी में तेजस्वी यादव को कमान सौंपने का समर्थन कर रहे हैं.
पटना:

बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव पटना वापस आ गए हैं. तेजस्वी यादव, जो विपक्ष का नेता रहने के बावजूद एक महीने चले विधानसभा सत्र में मात्र दो दिन कुछ मिनट के लिए सिर्फ चेहरा दिखाने आए आखिरकार अपने पिता लालू यादव के कहने पर वापस आए हैं. पिता ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनकी इच्छा के मुताबिक़ पार्टी में उन्हें पिता के बाद जो भी महत्वपूर्ण पद होता है वो उन्हें संगठन के चुनाव के बाद दिया जाएगा. लालू यादव कि इस सहमति के बाद अब पार्टी के नेता जिनमें भाई वीरेंद्र जैसे कुछ वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं, मांग करने लगे हैं कि तेजस्वी यादव को अगर पार्टी का भी नेतृत्व दिया जाता है तो इससे राज्य के युवाओं के बीच एक अच्छा संदेश जाएगा. 

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फिलहाल ये मांग करने वाले भाई वीरेंद्र अकेले नहीं है. उनके अलावा बोध गया से निर्वाचित विधायक कुमार सरबजीत, जमुई से विधायक विजय प्रकाश भी अब सार्वजनिक रूप से इस मांग के समर्थन में सामने आए हैं. माना जा रहा है कि लालू यादव से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद ही ये लोग सार्वजनिक रूप से यह मांग कर रहे हैं कि पार्टी की कमान उन्हें सौंपने से पार्टी का भविष्य बेहतर होगा.  

हालांकि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता ऐसे भी हैं जिनका मानना है कि तेजस्वी यादव ने लोक सभा चुनावों के बाद अपने आचरण से पार्टी के विधायक, कार्यकर्ता और नेताओं सभी को निराश ही किया है.  इन नेताओं का कहना है कि भले ही लालू यादव से इमोशनल ब्लैकमेल कर कोई भी पद तेजस्वी यादव हासिल कर लें लेकिन सच्चाई यही है कि अब भी वर्तमान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दूर दूर तक विकल्प नहीं दिखता.

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इन नेताओं का तर्क है कि जो विपक्ष का नेता विधानसभा सत्र से ही ग़ायब रहे.  बाढ़ में लोगों को देखने ना जाए. चमकी बुखार जैसी महामारी के समय दिल्ली में घूमता रहे. उन तेजस्वी यादव से सोशल मीडिया पर तो राजनीति हो सकती है, लेकिन जमीन पर नहीं. अगर फिर भी वह चुनाव जीत जाएं तो ये अपने आप में बड़ी उपलब्धि होगी. 

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