कोसी स्नातक विधान परिषद चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार डॉक्टर एनके यादव ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार नितेश यादव को 10,026 वोटो से हराया. डॉ. यादव को प्रथम वरीयता के 24,258 वोट मिले. वहीं नितेश यादव को 18,198 वोट और जनसुराज पार्टी के रजनीश रंजन को 15,536 वोट मिले. जीत के लिए कोटा वोट 32,201 कोई भी उम्मीदवार हासिल नहीं कर पाया. इसलिए द्वितीय वरीयता वाले वोटों के आधार पर बीजेपी के डॉ. यादव को विजयी घोषित किया गया. अहम बात यह रही कि पहली बार विधान परिषद चुनाव मैदान में उतरे जनसुराज ने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई हैं. वहीं कांग्रेस का प्रदर्शन सबसे खराब रहा. उसके प्रत्याशी मनोज कुमार जायसवाल केवल 2227 वोट ही हासिल कर सके. इस चुनाव में डाले गए कुल 73,278 वोटों में से 12 फीसदी से अधिक वोट रदद् घोषित किए गए. कोसी स्नातक क्षेत्र में कुल 1,34,073 मतदाता हैं. इस बार चुनाव में 15 प्रत्याशी मैदान में थे.
द्वितीय वरीयता के वोटों से हुआ हार-जीत का फैसला
नियमानुसार जीत के लिए कोटा वोट 32201 निर्धारित था. लेकिन किसी भी उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के आधार पर कोटा वोट हासिल नहीं हुआ. लिहाजा द्वितीय वरीयता के वोटों की गिनती शुरू हुई. द्वितीय वरीयता में बीजेपी के डॉक्टर एनके यादव को 7565, राजद के नितेश को 2879,जनसुराज के रजनीश को 720 और कांग्रेस के मनोज को 70 वोट मिले. इस प्रकार बीजेपी को 31823, राजद को 21797,जनसुराज को 16264 और कांग्रेस को 2297 वोट प्राप्त हुए. इसके बाद भी बीजेपी उम्मीदवार को कोटा वोट नहीं मिल सका. वे कोटा वोट से 378 वोट पीछे रह गए. अंततः सबसे अधिक वोट हासिल करने वाले बीजेपी उम्मीदवार डॉक्टर एनके यादव को विजयी घोषित किया गया.
इस सीट पर बीजेपी की तीसरी बार मिली जीत
चुनावी इतिहास ने खुद को दुहराया है. बीजेपी के डॉक्टर एनके यादव ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की है. उन्होंने 2020 के चुनाव में भी राजद उम्मीदवार नितेश यादव को 6901 वोटों से पराजित किया था. डॉ. यादव को तब 20,841 वोट और नितेश यादव को 13,940 वोट मिले थे. इस प्रकार राजद को पूर्व की तरह दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा. इस चुनाव में जनसुराज के उम्मीदवार रजनीश रंजन ने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई. उन्हें कुल 15,536 वोट मिले. वो तीसरे स्थान पर रहे. पहली बार चुनाव मैदान में उतरे जनसुराज को मिली इस उपलब्धि की अनदेखी नहीं की जा सकती है. हालांकि इसका श्रेय रजनीश रंजन से अधिक जनसुराज की प्रबंधन शैली को जाता है. जनसुराज ने पंचायत स्तर पर अपनी पहुंच बनाई और मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने में अपनी ताकत लगाई. इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया. जबकि राजद और कांग्रेस इस मामले में सिफर साबित हुए.
जनसुराज सने बीजेपी-राजद के वोटों में लगाई सेंध
चुनाव परिणाम बता रहा है कि इस चुनाव में जनसुराज बीजेपी-राजद के वोट बैंक में सेंध लगाने में सफल रहा. राजनीति के जानकारों के बिना किसी वोट बैंक के जनसुराज उम्मीदवार का 15 हजार से अधिक वोट हासिल करना इस सेंधमारी की पुष्टि करता है. चर्चा है कि बीजेपी के एक धड़े ने पार्टी प्रत्याशी की तुलना में जनसुराज प्रत्याशी के प्रति सहानुभति दिखाई. अधिकांश बीजेपी समर्थकों ने दूसरी वरीयता का वोट जनसुराज प्रत्याशी को देने का काम किया. इसी तरह राजद समर्थकों का एक धड़ा खासकर अल्पसंख्यक बहुल इलाके में जनसुराज को अपना समर्थन दिया. कोसी-सीमांचल इलाके में वोटिंग का यह ट्रेंड बीजेपी और राजद दोनों के लिए खतरे की घंटी की तरह है.
12 फीसदी से अधिक वोट हुआ रद्द
यह कोई आम चुनाव नहीं था. यह पढ़े-लिखे लोगों का चुनाव है. इसमें मतदाता की न्यूनतम योग्यता स्नातक है. बाबजूद कुल डाले गए वोटों में से 12.40 फीसद वोट रद्द घोषित किए गए. इस चुनाव में कुल 1.34 लाख मतदाता थे. इनमें से 73.27 हजार लोगों ने मतदाता किया था. इनमें से 9086 वोटों को रद्द कर दिया गया. माना जा रहा है कि अगर इतनी बड़ी संख्या में वोट रद्द नहीं हुए होते तो प्रथम वरीयता के वोटों के आधार पर ही चुनाव परिणाम आ जाता. दिलचस्प आंकड़ा यह है कि प्रमुख चारों दल के उम्मीदवारों को प्राप्त कुल वोट 60934 रहा. वहीं बाकी के 11 उम्मीदवारों को कुल 3467 वोट मिले, जो रद्द हुए 9086 वोटों के आधे से भी कम है.
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