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This Article is From Jun 21, 2019

बिहार की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था सवालों के घेरे में, चौंकाने वाले तथ्य

बिहार इकॉनोमिक सर्वे 2018-19 के मुताबिक बिहार में प्रति 10 लाख लोगों पर 2012 में औसतन 109 हेल्थ सेंटर थे जो 2018 में घटकर 99 हो गए

बिहार में सात साल में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ने के बजाय घट गई हैं.
  • 7 साल में बिहार में 10 लाख लोगों पर औसत हेल्थ सेंटर 10 कम हो गए
  • सात वर्षों में स्वास्थ्य उप केंद्र की संख्या 9696 से बढ़कर 9949 हुई
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की संख्या में न के बराबर वृद्धि
नई दिल्ली:

बिहार में चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था सवालों के घेरे में है. अब और भी गंभीर और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं. मुजफ्फरपुर में लगातार हो रही बच्चों की मौत के बीच बिहार की खस्ताहाल स्वास्थ्य सेवा बिल्कुल उजागर है. अब नए तथ्य बता रहे हैं कि पिछले कुछ वर्षों में हालात बिगड़े ही हैं.

बिहार इकॉनोमिक सर्वे 2018-19 के मुताबिक बिहार में प्रति 10 लाख लोगों पर 2012 में औसतन 109 हेल्थ सेंटर थे जो 2016 में घटकर 100 हुए और फिर दो साल बाद और घट कर 2018 में 99 हो गए. यानी 7 साल में बिहार में 10 लाख लोगों पर औसत हेल्थ सेंटरों की संख्या 10 कम हो गई.

बीजेपी सांसद सुशील सिंह कहते हैं राज्य में आबादी में हो रही बढ़ोत्तरी के अनुपात में हेल्थ सेन्टरों की संख्या में बढ़ोत्तरी की जानी चाहिए थी. ये ऐसे वक्त पर हुआ जब इन वर्षों में बिहार की जनसंख्या में अच्छी बढ़ोत्तरी रजिस्टर की गई. यही हालत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की भी रही है जिनकी संख्या में ना के बराबर वृद्धि हुई है.

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2012-2018 के बीच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की संख्या में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई, वो 533 पर बने रहे. इन सात वर्षों में स्वास्थ्य उप केंद्र की संख्या 9696 से बढ़कर 9949 हो गई, यानी सिर्फ 2.54% की बढ़ोत्तरी. अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 1330 से 1379 हुए...यानी सिर्फ 3.6% की बढ़ोत्तरी. अगर सभी स्वास्थ्य केंद्र को देखें तो 2012-2018  के बीच इनकी संख्या 11,559 से 11,891 तक पहुंची. यानी इन साल वर्षों में इनकी संख्या में सिर्फ 2.6% का इज़ाफा हुआ.

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कांग्रेस नेता आनंद शर्मा कहते हैं, "ये मामला राज्य सरकार के अधीन आता है. राज्य सरकार को इसकी जवाबदेही लेनी होगी. ये हाल तब है जब चार साल में बिहार सरकार का स्वास्थ्य बजट 83 फ़ीसदी बढ़ा है. 2014-15 में स्वास्थ्य पर बिहार सरकार का कुल खर्च 3604 करोड़ था जो 2017-18 में ये बजट बढ़कर 6535 करोड़ रुपये हो गया.

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बिहार आर्थिक सर्वे से कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं. सबसे अहम सवाल ये है कि जब पिछले कुल साल में स्वास्थ्य सेक्टर पर खर्च बढ़ाया गया तो फिर हर दस लाख की आबादी पर उपलब्ध हेल्थ सेन्टरों की औसत संख्या पिछले 7 साल में क्यों घट गई.

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