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कर चले हम फिदा जान ओ तन साथियों…शहीद का शव पहुंचा तो आंसुओं, जयकारों और तिरंगों से पट गया पूरा गांव

शहीद रमेश कुमार राष्ट्रीय राइफल्स की 62 आरआर बटालियन में नायक पद पर तैनात थे. उन्‍होंने 2013 में फोर्स ज्वाइन की थी और रुड़की में प्रशिक्षण लिया था. उरी सेक्टर में देश की रक्षा करते हुए उन्होंने वीरगति पाई.

कर चले हम फिदा जान ओ तन साथियों…शहीद का शव पहुंचा तो आंसुओं, जयकारों और तिरंगों से पट गया पूरा गांव
  • बिहार के वैशाली जिले के मुरौवतपुर में शहीद CRPF जवान रमेश कुमार का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा पहुंचा था.
  • रमेश कुमार राष्ट्रीय राइफल्स की 62 RR बटालियन में नायक पद पर तैनात थे और उन्होंने 2013 में फोर्स ज्वाइन की थी.
  • अंतिम यात्रा में ग्रामीणों ने तिरंगे लहराते हुए जयकारे लगाए और शहीद की शहादत को याद रखने का संकल्प लिया.
वैशाली:

बिहार के वैशाली जिले के सहदेई बुजुर्ग के मुरौवतपुर गांव के लिए सोमवार का दिन कुछ अलग था, जब उरी में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए सीआरपीएफ जवान रमेश कुमार का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो पूरा इलाका आंसुओं, जयकारों और तिरंगों से भर उठा. हर गली, हर मोड़ पर लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े. मानो पूरा गांव अपने वीर सपूत को अंतिम सलाम देने के लिए ठहर गया हो. रमेश कुमार का सैन्‍य सम्‍मान के साथ अंतिम संस्‍कार कर दिया गया. 

शहीद रमेश कुमार, स्वर्गीय राम इकबाल राय और स्वर्गीय मंती देवी के सबसे छोटे पुत्र थे. राष्ट्रीय राइफल्स की 62 आरआर बटालियन में नायक पद पर तैनात रमेश ने 2013 में फोर्स ज्वाइन की थी और रुड़की में प्रशिक्षण लिया था. उरी सेक्टर में देश की रक्षा करते हुए उन्होंने वीरगति पाई और गांव का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया. 

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शहादत का समाचार मिलते ही मचा कोहराम 

शहादत की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया. पत्नी प्रियंका देवी, बड़े भाई विनोद राय और परिवार के अन्य सदस्य लगातार रो रहे थे. रमेश अपने पीछे 10 साल के बेटे ईशान और 8 साल की बेटी इशानी को अनमोल यादों के साथ छोड़ गए हैं.

ग्रामीणों ने बताया कि रमेश करीब छह महीने पहले ही अपनी भतीजी की शादी में घर आए थे. किसी ने नहीं सोचा था कि वह आखिरी बार उन्हें देख पाएंगे. 

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अंतिम यात्रा में दिखा गम और गर्व का संगम 

अंतिम यात्रा के दौरान माहौल गम और गर्व का अद्भुत मिश्रण था. हाथों में तिरंगा लहराते लोग भारत माता की जय और शहीद रमेश कुमार अमर रहें के नारे लगाते चल रहे थे. हर चेहरे पर दर्द था, लेकिन आंखों में गर्व की भी चमक थी. 

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शहीद रमेश कुमार की शहादत को लोग हमेशा याद रखेंगे. उनका बलिदान देश और आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा. 
 

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