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बिहार में सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक से बवाल, सरकार के फैसले के खिलाफ डॉक्टर संगठन एकजुट

डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर सरकार की सख्ती से मामला और गरमा सकता है. विपक्ष लगातार सरकार पर बिना बातचीत के फैसले थोपने का आरोप लगा ही रहा है. उधर डॉक्टर संगठन में भी सरकार के फैसले के खिलाफ एकजुट हो गए हैं.

बिहार में सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक से बवाल, सरकार के फैसले के खिलाफ डॉक्टर संगठन एकजुट
बिहार में सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक से बवाल

नई दिल्ली: बिहार सरकार द्वारा सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की तैयारी को लेकर राज्य में विवाद बढ़ता जा रहा है. सरकार के फैसले के खिलाफ अब डॉक्टर संगठन एकजुट होने लगे हैं. उनका कहना है कि इतने बड़े फैसले से पहले सरकार ने डॉक्टरों से कोई राय या बातचीत नहीं की. वहीं सरकार इसे सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है. सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के बेटे निशांत कुमार (Nishant Kumar) चाहते हैं कि इस फैसले को जल्द से जल्द लागू किया जाए. सरकार का मानना है कि अगर सरकारी डॉक्टर निजी क्लीनिक में समय देने के बजाय पूरी तरह सरकारी अस्पतालों में काम करेंगे तो मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा और अस्पतालों की स्थिति सुधरेगी. 

डॉक्टर बोले- अस्पताल में स्टाफ की कमी

दूसरी तरफ डॉक्टर संगठनों का कहना है कि सिर्फ निजी प्रैक्टिस बंद करने से स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं सुधरेगी. उनका कहना है कि बिहार में पहले से डॉक्टरों की भारी कमी है. कई सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ नहीं हैं. ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले डॉक्टरों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में बिना तैयारी के निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने से स्थिति और खराब हो सकती है.

डॉक्टरों का यह भी कहना है कि अस्पतालों में अभी भी कई जगह जरूरी मशीनों, दवाओं और सुविधाओं की कमी है. कई डॉक्टरों को सुरक्षा और रहने की अच्छी व्यवस्था तक नहीं मिलती. उनका कहना है कि पहले इन समस्याओं को दूर किया जाना चाहिए. बिहार में सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस का मुद्दा काफी पुराना है. लंबे समय से यह शिकायत होती रही है कि कई डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में कम समय देते हैं और निजी क्लीनिक में ज्यादा व्यस्त रहते हैं.

शिकायत के बाद सख्ती के मूड में सरकार

इससे गरीब मरीजों को परेशानी होती है और उन्हें इलाज के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है. इसी वजह से पहले भी कई बार सरकार ने निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की कोशिश की थी, लेकिन डॉक्टर संगठनों के विरोध और दूसरी मुश्किलों की वजह से फैसला पूरी तरह लागू नहीं हो सका. देश के कई राज्यों में सरकारी डॉक्टरों के लिए अलग व्यवस्था है. कुछ राज्यों में निजी प्रैक्टिस पूरी तरह बंद है और डॉक्टरों को इसके बदले अतिरिक्त भत्ता दिया जाता है.

वहीं कुछ राज्यों में सीमित निजी प्रैक्टिस की अनुमति है. बिहार में अब तक इस मामले में सख्ती नहीं रही है. हाल के दिनों में सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था और डॉक्टरों की मौजूदगी को लेकर कई शिकायतें सामने आई थीं. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में सुधार की प्रक्रिया तेज की. माना जा रहा है कि उसी के तहत निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की तैयारी की जा रही है. 

अब इस मुद्दे ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है. विपक्ष सरकार पर बिना बातचीत फैसला लेने का आरोप लगा रहा है. वहीं सरकार का कहना है कि यह फैसला आम लोगों को बेहतर इलाज देने के लिए जरूरी है. फिलहाल सरकार और डॉक्टर संगठनों के बीच तनातनी बनी हुई है. डॉक्टर संगठन बातचीत के जरिए समाधान चाहते हैं, जबकि सरकार सख्ती के संकेत दे रही है. आने वाले दिनों में यह मामला और गरमा सकता है.

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