- बिहार पुलिस ने अपराध नियंत्रण के लिए दो दिवसीय पुलिस सम्मेलन में सभी थानाध्यक्षों को शामिल किया.
- सम्मेलन में अपराध वृद्धि के कारणों की गहन जांच कर शिकायत दर्ज करने और कार्रवाई में सुधार पर जोर दिया गया.
- साइबर सुरक्षा पर विशेष सत्र आयोजित कर डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए संसाधन बढ़ाने की योजना बनाई गई.
बिहार में पिछले कुछ महीनों के दौरान हत्या, लूट, रंगदारी और जमीन विवाद जैसी आपराधिक घटनाओं में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए नई सरकार और राज्य पुलिस मुख्यालय पूरी तरह एक्शन मोड में है. इसी कड़ी में गृह मंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में पटना में दो दिवसीय 'बिहार पुलिस सम्मेलन' का आयोजन किया गया. इस बैठक की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें डीजीपी से लेकर राज्य के सभी थानाध्यक्ष एक साथ जुड़े. जहां वरीय पुलिस पदाधिकारी सीधे तौर पर सम्मेलन में मौजूद रहे, वहीं राज्यभर के थानाध्यक्ष ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए. यह पहली बार था जब बिहार की पूरी पुलिस व्यवस्था ने एक साथ एक मंच पर बैठकर कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति तैयार की.
बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य में अपराध नियंत्रण और गिरती कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाना था. पुलिस मुख्यालय ने जमीनी हकीकत जानने के लिए उन स्थानीय कारणों पर विस्तार से चर्चा की, जिनकी वजह से कुछ खास इलाकों में अपराध बढ़े हैं. गृह मंत्री और आला अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि थानों में शिकायतों को दर्ज करने में कोई कोताही न बरती जाए और संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो. साथ ही, रात्रि गश्त (नाइट पेट्रोलिंग) और क्षेत्रीय निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया, ताकि थानों की कार्यप्रणाली में एकरूपता आए और जनता को हर जगह समान रूप से न्याय मिल सके.
आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए सम्मेलन में साइबर सुरक्षा और 'टेक्निकल सर्विलांस' पर विशेष सत्र आयोजित किए गए. राज्य में बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और बैंक धोखाधड़ी के मामलों को देखते हुए साइबर थानों की क्षमता बढ़ाने और तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता पर गंभीर मंथन हुआ. अधिकारियों ने जिला स्तर पर टेक्निकल यूनिट्स को मज़बूत करने और सीसीटीवी व कॉल डिटेल्स जैसे डिजिटल डेटा के जरिए अपराधियों पर शिकंजा कसने की रणनीति साझा की. इस दौरान गोपनीयता (प्राइवेसी) के सम्मान और तकनीकी निगरानी के कानूनी दायरे में रहकर इस्तेमाल करने की हिदायत भी दी गई.
मैराथन बैठक में पुलिस की जवाबदेही तय करने पर सबसे कड़ा रुख अपनाया गया. सूत्रों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में अपराध की दर अधिक है और पुलिस की छवि धूमिल हुई है, वहां के अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा. वहीं, बेहतर कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों के लिए प्रोत्साहन और सम्मान की योजना भी बनाई गई है. इस दो दिवसीय मंथन का मूल उद्देश्य केवल प्रशासनिक सुधार ही नहीं, बल्कि आम जनता के बीच सुरक्षा का भाव पैदा करना और पुलिस-जन संवाद को बेहतर बनाना है. अब सारा दारोमदार इस बात पर है कि बैठक में लिए गए ये महत्वपूर्ण निर्णय जमीनी स्तर पर कितनी तत्परता से लागू होते हैं.
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