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हरिवंश OUT, बेटे निशांत की एंट्री... पढ़ें- कैसे बदल रही है नीतीश की पॉलिटिक्स

Bihar Politics: जेडीयू के मौजूदा राज्यसभा सांसद हरिवंश का नाम इस बार आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है. हरिवंश का ड्रॉप होना जेडीयू की बदलती प्राथमिकताओं की ओर इशारा करता है. माना जा रहा है कि पार्टी अब पुराने चेहरों की जगह नई रणनीति के तहत फैसले ले रही है.

हरिवंश OUT, बेटे निशांत की एंट्री... पढ़ें- कैसे बदल रही है नीतीश की पॉलिटिक्स
नीतीश कुमार की राजनीति में बदलाव के संकेत.
पटना:

बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है. इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को जनता दल यूनाइटेड से राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा लगातार बनी हुई है. सूत्रों के मुताबिक इसका औपचारिक ऐलान कभी भी हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो यह नीतीश कुमार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा.

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परिवारवाद के खिलाफ रहे हैं सीएम नीतीश

नीतीश कुमार लंबे समय से खुद को परिवारवाद से अलग रखने वाले नेता के तौर पर पेश करते रहे हैं. उन्होंने कई बार कहा कि उनकी राजनीति में परिवार के लिए कोई जगह नहीं है. परिवारवाद के मुद्दे पर वे लगातार विपक्ष, खासकर राजद, पर हमला करते रहे हैं. ऐसे में निशांत कुमार की राज्यसभा एंट्री से विपक्ष को यह कहने का मौका मिल सकता है कि नीतीश कुमार भी अब उसी राजनीति की ओर बढ़ रहे हैं, जिसका वे विरोध करते आए हैं.

बदल रही है नीतीश कुमार की पॉलिटिक्स

जेडीयू के भीतर इसे भविष्य की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है. पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार काफी समय से सक्रिय राजनीति में हैं और आने वाले समय को देखते हुए पार्टी को एक नया चेहरा तैयार करना जरूरी हो गया है. राज्यसभा को इसके लिए सुरक्षित मंच माना जा रहा है. निशांत कुमार अब तक सार्वजनिक राजनीति से दूर रहे हैं, इसलिए उनकी एंट्री को बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है.

सांसद हरिवंश का नाम राज्यसभा चुनाव से ड्रॉप

राज्यसभा सीटों को लेकर अन्य नामों पर भी सहमति बनती दिख रही है. जेडीयू की ओर से निशांत कुमार के अलावा रामनाथ ठाकुर का नाम लगभग तय माना जा रहा है. रामनाथ ठाकुर लंबे समय से पार्टी से जुड़े रहे हैं और संगठन औरसामाजिक संतुलन के लिहाज से उनकी दावेदारी मजबूत बताई जा रही है. बीजेपी कोटे से उपेंद्र कुशवाहा और शिवेश राम के नाम सामने आ रहे हैं. उपेंद्र कुशवाहा को पिछड़े वर्ग के बड़े चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि शिवेश राम का नाम दलित समाज के प्रतिनिधित्व के लिहाज से अहम माना जा रहा है.बीजेपी इन नामों के जरिए सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश कर रही है.

इस बीच जेडीयू के मौजूदा राज्यसभा सांसद हरिवंश का नाम इस बार आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है. हरिवंश का ड्रॉप होना जेडीयू की बदलती प्राथमिकताओं की ओर इशारा करता है. माना जा रहा है कि पार्टी अब पुराने चेहरों की जगह नई रणनीति के तहत फैसले ले रही है.

RJD के सामने सीट बचाने की चुनौती

महागठबंधन की स्थिति इस चुनाव में कमजोर मानी जा रही है, लेकिन वह एक सीट बचाने की कोशिश में है. राजद नेता तेजस्वी यादव का नाम जरूर चर्चा में है, लेकिन अभी कुछ भी तय नहीं है. महागठबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती संख्या का गणित है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि तेजस्वी यादव का राज्यसभा जाना पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्हें AIMIM का समर्थन मिलता है या नहीं. अगर AIMIM समर्थन देता है, तो महागठबंधन के लिए एक सीट निकालने की संभावना बन सकती है. लेकिन अगर AIMIM साथ नहीं आता, तो तेजस्वी यादव या किसी अन्य राजद उम्मीदवार के लिए जीत आसान नहीं होगी.

AIMIM की भूमिका इस चुनाव में बेहद अहम मानी जा रही है. सीमांचल क्षेत्र से जुड़े AIMIM के विधायक इस बार किंगमेकर की स्थिति में हैं. उनका रुख तय करेगा कि महागठबंधन राज्यसभा में अपनी मौजूदगी दर्ज करा पाता है या नहीं. कुल मिलाकर, बिहार की राज्यसभा सीटों का यह चुनाव सिर्फ सांसद चुनने तक सीमित नहीं है. यह नीतीश कुमार की राजनीति के अगले कदम, जेडीयू की भविष्य की रणनीति और विपक्ष की एकजुटता की असली परीक्षा भी है. आने वाले घंटों और दिनों में होने वाले फैसले बिहार की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं
 

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प्रभाकर कुमार
Contributing Editor
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