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This Article is From Jun 07, 2020

बिहार में Covid-19 के प्रकोप और लॉकडाउन के बीच सभी पार्टियों ने शुरू किया चुनाव प्रचार

कोविड-19 के प्रकोप के चलते समूचे बिहार पर लॉकडाउन लागू है, आने-जाने और बाजार खोलने जैसी जरूरतों पर तमाम तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं लेकिन राजीनितक घमासान जारी है.

बिहार में Covid-19 के प्रकोप और लॉकडाउन के बीच सभी पार्टियों ने शुरू किया चुनाव प्रचार
कोविड-19 के प्रकोप के बीच राज्य में सियासी चहलकदमी जारी है
पटना:

कोविड-19 के प्रकोप के चलते समूचे बिहार पर लॉकडाउन लागू है, आने-जाने और बाजार खोलने जैसी जरूरतों पर तमाम तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं लेकिन राजीनितक घमासान जारी है. राज्य में महामारी और लॉकडाउन के हालातों के बीच सभी पार्टियों ने चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है. प्रचार का बिगुल भी फूंका जा रहा है. सत्ताधारी बीजेपी- जेडीयू और विपक्ष राष्ट्रीय जनता दल ने अनौपचारिक तौर पर चुनावी अभियान की शुरुआत कर दी है. 

अमित शाह आज बिहार में डिजिटल रैली के जरिए चुनावी रैलियों का शंखनाद कर रहे हैं, उम्मीद जताई जा रही है कि उनकी इस वर्चुअल रैली में करीब एक लाख लोग शामिल होंगे. सूत्रों के अनुसार अमित शाह के भाषण में फोकस केंद्र की मोदी सरकार की 6 साल की उपलब्धियां होंगी. शाह आज फिर दोहराएंगे कि अक्टूबर और नवंबर में होने वाले चुनाव बीजेपी और जेडीयू नीतीश की अगुवाई में लड़ेंगे. 

अमित शाह की वर्चुअल रैली के शाम चार बेजे होनी है लेकिन इसके विरोध में राष्ट्रीय जनता दल ने सुबह से ही थाली पीटकर आभासी विरोध शुरू कर दिया था. पटना में अपने आवास के बाहर तेज प्रताप यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी प्रताप थाली बजाकर विरोध प्रदर्शन करते देखे गए. इस दौरान आरजेडी ने प्रवासी मजदूरों के मामले को मुख्यरुप से उठाया. जोकि विपक्ष की ओर से प्रमुख मुद्दों में से एक है. 

शनिवार को तेजस्वी यादव पार्टी दफ्तर पहुंचे और नीतीश कुमार से सवाल पूछने वाले कुछ पोस्टरों को कार्यकर्ताओं के संग मिलकर पार्टी दफ्तर की दीवारों पर चिपकाया. तो वहीं नीतीश कुमार, जिन्होंने पिछले 75 दिनों में एक भी प्रेस कांफ्रेंस नहीं आजकल पार्टी के कार्यकर्ताओं के संग वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संवाद कर रहे हैं जाहिर है चुनाव से पहले नीतीश पार्टी के एक एक कार्यकर्ता की नब्ज टटोलना चाहेंगे. 

वहीं दूसरी तरफ केंद्र में बीजेपी की साथी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी का मानना है कि प्रवासी मजदूरों के मामले ने नीतीश कुमार की सुशासन बाबू की छवि को चोट पहुंचाई है. राज्य में 8 हजार 500 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद मार्च में छात्रों को रोकना और प्रवासियों की ट्रेन यात्रा के भुगतान से इनकार करने की वजह से लोगों में उनके प्रति गुस्सा पैदा हो गया है. 

Video: अमित शाह की रैली के खिलाफ RJD का 'गरीब अधिकार दिवस'

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