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बिहार विधान परिषद उपचुनाव में RJD की जीत, JDU से छीनी सीट

बिहार विधान परिषद की भोजपुर-सह-बक्सर स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र सीट पर हुए उपचुनाव में मंगलवार को 97.96 प्रतिशत मतदान हुआ था. जिसका रिजल्ट आज आया है.

बिहार विधान परिषद उपचुनाव में RJD की जीत, JDU से छीनी सीट
  • बिहार विधान परिषद के भोजपुर-सह-बक्सर स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र में आरजेडी ने जेडीयू को पराजित किया है
  • यह सीट जेडीयू के राधाचरण साह के विधायक बनने के बाद खाली हुई थी और अब उनके बेटे को हरा दिया गया है
  • उपचुनाव में मतदान प्रतिशत 97.96 रहा और मतदान सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ
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बिहार में विधान परिषद उपचुनाव में आरजेडी को जीत मिली है. भोजपुर सह बक्सर स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र से आरजेडी उम्मीदवार सोनू राय ने जेडीयू उम्मीदवार कन्हैया प्रसाद को हराया है. यह सीट पहले जेडीयू के पास थी और एमएलसी राधाचरण साह के विधायक बनने के बाद खाली हुई थी. जेडीयू ने इस सीट पर राधाचरण साह के बेटे को उम्मीदवार बनाया था. नई सरकार बनने के बाद यह पहला चुनाव था, जिसमें राजद ने जीत दर्ज की है.

बिहार विधान परिषद की भोजपुर-सह-बक्सर स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र सीट पर हुए उपचुनाव में मंगलवार को 97.96 प्रतिशत मतदान हुआ था. यह सीट जनता दल (यूनाइटेड) के राधा चरण साह के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी. उन्होंने 2025 के विधानसभा चुनाव में संदेश विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज करने के बाद विधान परिषद सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया था.

भोजपुर - बक्सर स्थानीयता प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र के लिए हुए उपचुनाव में राजद ने जदयू से यह सीट छीन ली. यह सीट जदयू के विधान पार्षद राधाचरण साह के संदेश विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने जाने से खाली हुई थी. जदयू ने उन्हीं के बेटे कन्हैया प्रसाद को उम्मीदवार बनाया था. विधानसभा चुनाव और इसके बाद राज्यसभा चुनाव में NDA ने महागठबंधन को करारी शिकस्त दी थी. नई सरकार बनने के बाद यह NDA की पहली हार है.

आमतौर पर इस चुनाव को धनबल का चुनाव माना जाता है. कन्हैया प्रसाद इसमें बीस माने जाते हैं लेकिन यह उन्हें जीत नहीं दिला पाया. कन्हैया को अवैध बालू खनन और मनी लॉन्ड्रिंग के केस में ईडी ने सितंबर 2023 में गिरफ्तार किया था. वे 9 महीने जेल में रहे थे. वहीं सोनू राय के पिता लालदास राय भी इस सीट से MLC रह चुके थे. इस चुनाव में एनडीए के कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी राजद की जीत की बड़ी वजह बना. जदयू के बागी उम्मीदवार मनोज उपाध्याय ने इस मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया. 

बागी ने दे दिया झटका!

वे इस सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन पार्टी ने कन्हैया को उम्मीदवार बनाया. मनोज उपाध्याय ने इस मुद्दे को जोर शोर से उठाया. उन्होंने बार-बार कहा कि कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है. अगर कन्हैया चुनाव जीत गए तो यह उनकी पुश्तैनी सीट हो जाएगी. परिणामों के बाद भी उन्होंने यही दोहराया कि कार्यकर्ता की जीत हुई है, हम यही चाहते थे. सोनू राय अप्रैल 2028 तक इस पद पर बने रहेंगे। विधानसभा चुनाव और फिर राज्यसभा चुनाव में मिली हार के बाद राजद खेमे के लिए यह जीत काफी महत्वपूर्ण है.

10 सीटों के लिए अगले महीने होंगे चुनाव

विधान परिषद की 10 और सीटें खाली हो रही हैं. 9 MLC का कार्यकाल जून में समाप्त हो रहा है, वहीं एक सीट नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से खाली हुई है. इन सीटों में 9 सीटें NDA के खाते में जानी तय हैं. एक सीट राजद जीत सकता है. निशांत और दीपक प्रकाश का MLC बनना तय है। बाकी नामों के लिए सभी कैंप में लॉबिंग चल रही है.
 

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