भाजपा ने बिहार विधान परिषद के उपचुनाव के लिए सूर्य कुमार शर्मा (अरविंद शर्मा) को अपना उम्मीदवार बनाया है. अरविंद शर्मा अभी बिहार बीजेपी मुख्यालय के प्रभारी हैं. यह सीट पूर्व में मंत्री मंगल पांडे के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी. अरविंंद शर्मा सीएम सम्राट चौधरी के खास बताए जा रहे हैं. उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के नाम भी चर्चा थी, लेकिन बीजेपी ने अपना उम्मीदवार उतारा है. महाराष्ट्र में उपचुनाव के लिए डॉ. प्रज्ञा राजीव सातव को पार्टी ने नामांकित किया है.
लंबे समय से संगठन से जुडे़
अरविंद शर्मा लंबे समय से संगठन से जुड़े हैं. अभी मुख्यालय प्रभारी के रूप में कार्य कर रहे हैं. संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. उन्होंने वरिष्ठ नेता नवीन सिन्हा के साथ भी लंबे समय तक काम किया है, और नितिन नवीन के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं.

महाराष्ट्र में 5 उम्मीदवारों की घोषणा
इसके अलावा महाराष्ट्र विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए पार्टी ने पांच उम्मीदवारों की घोषणा की है. इनमें सुनील विनायक कर्जतकर, माधवी नाईक, संजय नत्थूजी भेंडे, विवेक बिपिनदादा कोल्हे और प्रमोद शांताराम जठार शामिल हैं. भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने इन सभी नामों पर अपनी स्वीकृति दे दी है. ये उम्मीदवार आगामी चुनाव में पार्टी की ओर से विधान परिषद की सीटों पर चुनाव लड़ेंगे.
अनुभव और संगठनात्मक योगदान का रखा ध्यान
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन उम्मीदवारों का चयन अनुभव, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक योगदान को ध्यान में रखते हुए किया गया है. सूर्य कुमार शर्मा (अरविंद शर्मा) बिहार में पार्टी के लिए एक जाना-पहचाना चेहरा हैं, जबकि महाराष्ट्र में डॉ. प्रज्ञा राजीव सातव के अलावा अन्य उम्मीदवार भी विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक समूहों का प्रतिनिधित्व करते हैं.
विधान परिषद चुनावों में भाजपा इन सीटों पर मजबूत दावेदारी पेश करने की तैयारी में है. विशेषकर महाराष्ट्र में पांच द्विवार्षिक सीटों पर पार्टी पूर्ण ताकत के साथ उतरने जा रही है.
विधान परिषद की सीटें बहुत अहम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन उम्मीदवारों की घोषणा से भाजपा ने अपनी रणनीति को स्पष्ट संकेत दिया है. पार्टी इन चुनावों को न केवल सीटें जीतने बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी के रूप में भी देख रही है. बिहार और महाराष्ट्र दोनों राज्यों में विधान परिषद की ये सीटें काफी अहम मानी जा रही हैं. इन चुनावों के नतीजे न केवल ऊपरी सदन में भाजपा की ताकत को प्रभावित करेंगे, बल्कि दोनों राज्यों की राजनीति पर भी असर डालेंगे.
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