विज्ञापन

गजब कलाकार! फर्जी ज्वाइनिंग, एक दिन भी ड्यूटी नहीं, सैलरी के लिए 20 साल तक लड़ता रहा कानूनी लड़ाई

मामले की सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मीनाक्षी मदन राय और जस्टिस सोनी श्रीवास्तव ने कहा कि धोखाधड़ी और न्याय कभी एक साथ नहीं रह सकते. उन्होंने साफ किया कि वह व्यक्ति सैलरी पाने का हकदार नहीं है क्योंकि उसकी शुरुआती नियुक्ति ही गलत तरीके से हुई थी.

गजब कलाकार! फर्जी ज्वाइनिंग, एक दिन भी ड्यूटी नहीं, सैलरी के लिए 20 साल तक लड़ता रहा कानूनी लड़ाई
पटना हाई कोर्ट.
  • बिहार में एक शख्स ने खुद को शिक्षा विभाग का चपरासी बताते हुए 20 साल से सैलरी नहीं मिलने का दावा किया था.
  • 20 साल की सैलरी पाने के लिए शख्स ने 20 साल लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी.
  • लेकिन जांच में उसका ज्वाईनिंग लेटर फर्जी निकला. यह भी बात साफ हुई कि इस शख्स ने एक ही दिन नौकरी नहीं की थी.
पटना:

बिहार से एक गजब ही मामला सामने आया है. यहां एक शख्स ने खुद को शिक्षा विभाग का चपरासी बताते हुए 20 साल से सैलरी नहीं मिलने का दावा किया. शख्स ने सैलरी के लिए 20 साल लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी. लेकिन जांच में उसका ज्वाईनिंग लेटर ही फर्जी निकला. जांच में यह भी बात साफ हुई कि इस शख्स ने एक ही दिन नौकरी नहीं की थी और ना ही कोई वेतन इसे कभी मिला था. 2006 से चल रही इस कानूनी लड़ाई को पटना हाई कोर्ट ने अब खत्म कर दिया है. हाई कोर्ट ने खुद को चपरासी बताकर सैलरी की मांग रहे शख्स की अपील को खारिज कर दिया है.

जज बोले- धोखाधड़ी और न्याय कभी एक साथ नहीं रह सकते

इस मामले की सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मीनाक्षी मदन राय और जस्टिस सोनी श्रीवास्तव ने कहा कि धोखाधड़ी और न्याय कभी एक साथ नहीं रह सकते. उन्होंने साफ किया कि वह व्यक्ति सैलरी पाने का हकदार नहीं है क्योंकि उसकी शुरुआती नियुक्ति ही गलत तरीके से हुई थी.

1998 में चपरासी के पद पर नियुक्ति का किया था दावा

दरअसल यह मामला कमलेश कुमार एक शख्स से जुड़ा है. कमलेश का दावा है कि जून 1998 में भोजपुर-सह-बक्सर के जिला शिक्षा अधिकारी ने उसे चपरासी के पद पर नियुक्त किया था. लेकिन उसे कभी सैलरी नहीं मिली. वह बकाया सैलरी मांग रहा था. लेकिन जांच में पाया गया कि उसका अपॉइंटमेंट लेटर फर्जी था और उसने असल में कभी सरकारी नौकरी जॉइन नहीं की थी या कोई सैलरी नहीं ली थी.

2006 से कानूनी लड़ाई लड़ रहा था कमलेश

कमलेश ने 2006 में सैलरी के भुगतान के लिए याचिका दायर की. इस याचिका का निपटारा कोर्ट ने जनवरी 2008 में किया और उसे वह राहत नहीं दी. निचली अदालत के इस फैसले को कमलेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी. हाई कोर्ट के सिंगल बेंच जज ने उसके दावे को खारिज कर दिया तो वह डबल बेंच में मामला लेकर पहुंचा था. अब हाई कोर्ट के डबल बेंच से कमलेश के दावे को खारिज कर दिया गया है. 

जांच में ज्वाईनिंग लेटर निकला था फर्जी

हाई कोर्ट ने कोर्ट के पिछले आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार के मानव संसाधन विकास विभाग के प्रधान सचिव ने खुद जांच की, इसकी रिपोर्ट 14 जुलाई, 2008 को सौंपी गई थी. जांच में यह साफ तौर पर पाया गया कि कमलेश का नियुक्ति पत्र ही जाली था और वह असल में कभी सरकारी नौकरी में शामिल नहीं हो पाया और न ही उसने कभी कोई वेतन लिया.

सिंगल बेंच जज ने पिछले साल खारिज किया था दावा

राज्य की ओर से पेश वकील आलोक रंजन ने कहा कि इस व्यक्ति के मामले में कोर्ट के पिछले आदेशों के तहत सही फैसला लिया गया था, क्योंकि उसने जांच रिपोर्ट को कभी चुनौती नहीं दी थी. उन्होंने कहा कि सिंगल जज ने 2025 में राहत देने से इनकार किया था क्योंकि जांच में यह पक्के तौर पर पाया गया था कि नियुक्ति पत्र नकली और जाली था, और वे निष्कर्ष अंतिम हो चुके थे.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Patna High Court, Patna High Court News, Bihar Govt Job, Bihar Govt Job News, Bihar Education Department
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com