- पुलिस अधिकारी पर जाति पूछकर व्यक्ति के पैर तोड़ने का आरोप
- पटना हाईकोर्ट ने दिए तुरंत एफआईआर दर्ज करने के आदेश
- कोर्ट ने कहा- 'नाजी जर्मनी' जैसी नहीं बन सकती पुलिस
पटना हाई कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए SHO के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं. आरोप है कि एसएचओ ने जाति का पता चलने पर पर एक व्यक्ति के तोड़ दिए थे. जस्टिस जितेंद्र कुमार ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को यह भी आदेश दिया कि वे बक्सर (आरा) के मुरार थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) से पूर्व SHO कमल नयन पांडे के खिलाफ FIR दर्ज करने के मामले में अनुपालन रिपोर्ट मांगें. इसके अलावा कोर्ट ने जांच को सीआईडी को सौंपने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि अगर नागरिकों के खिलाफ ऐसी बर्बरता को नहीं रोका गया तो पुलिस "नाजी जर्मनी की पुलिस" जैसी बन सकती है.
मामला 4 जुलाई 2024 का है. पीड़ित के मुताबिक, वह शौच के लिए जा रहा था, तभी SHO पांडे ने उसे बुलाया और उसके केस के बारे में पूछा. आरोप है कि उसकी जाति के बारे में पता चलने पर SHO ने उसके साथ मारपीट की. कुमार की याचिका के जवाब में, बक्सर के पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पीड़ित के पैर टूट गए थे, लेकिन ऐसा पुलिस ने नहीं किया था. अदालत को बताया गया कि बारिश के मौसम के कारण पीड़ित फिसल गया था.
कोर्ट ने क्या कहा?
हालांकि, कोर्ट ने कहा कि शिकायत से तत्कालीन SHO पांडे द्वारा संज्ञेय अपराध का प्रथम दृष्टया मामला बनता है. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में मुकदमा चलाने के लिए किसी मंजूरी की जरूरत नहीं थी. जज ने कहा, "इस स्टेज पर कोर्ट को आरोपों की सच्चाई की जांच नहीं करनी है, बल्कि यह देखना है कि क्या आरोपों के आधार पर पहली नजर में कोई संज्ञेय अपराध बनता है." कोर्ट ने आगे कहा कि यह हैरान करने वाली और परेशान करने वाली बात है कि SHO के खिलाफ FIR दर्ज करने की पीड़ित की गुहार को अधिकारियों ने अनसुना कर दिया, जबकि आरोपी के पुलिस अधिकारी होने के बावजूद, उस पर मुकदमा चलाने के लिए जरूरी कार्रवाई करना उनकी जिम्मेदारी थी.
जज ने कहा- याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकार का हुआ उल्लंघन
जज ने कहा, "आरोप के मुताबिक, याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकार का साफ उल्लंघन हुआ है. संविधान की धारा 21 के तहत मिले इस अधिकार के तहत तुरंत एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए. अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो देश के लोगों का न सिर्फ पुलिस पर, बल्कि रिट कोर्ट पर भी भरोसा उठ जाएगा." कोर्ट ने ये भी कहा, ''अगर ऐसे व्यवहार पर रोक नहीं लगाई गई और उसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो राष्ट्रीय पुलिस 'नाजी जर्मनी' की पुलिस जैसी बन सकती है.''
कोर्ट ने कहा- CBI को जांच सौंपने की मांग कर सकता है पीड़ित
कोर्ट ने पीड़ित मनीष कुमार की रिट याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया. मनीष ने कहा था कि पुलिस को लिखित शिकायत देने के बावजूद, संबंधित पुलिस स्टेशन ने कोई FIR दर्ज नहीं की. आरोप लगाया कि SHO पांडे ने बिना किसी वजह के उनके पैर तोड़ दिए, सिर्फ इसलिए क्योंकि वे एक खास जाति से थे. कोर्ट ने कहा कि FIR दर्ज होने के बाद अगर पीड़ित जांच से संतुष्ट नहीं है, तो वह जांच को सीबीआई को सौंपने की मांग कर सकता है.
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