- मधेपुरा के बीपी मंडल कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल में सिविल छात्रा खुशबू कुमारी की संदिग्ध स्थिति में मौत
- हॉस्टल प्रशासन बता रहा सुसाइड परिजनों ने इसे हत्या मानकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है
- मृतका के पिता ने कहा- खुशबू का किसी से कोई विवाद नहीं था, उसकी हत्या की गई
बिहार के मधेपुरा से एक ऐसी खबर आई है जिसने परिवार ही नहीं पूरे इलाके को झकझोर दिया है.यहां बीपी मंडल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के गर्ल्स हॉस्टल में सिविल ब्रांच की छात्रा खुशबू कुमारी की संदिग्ध हालत में मौत हो गई. हॉस्टल प्रशासन इसे सुसाइड बता रहा है जबकि परिवार का साफ आरोप है कि यह एक हत्या है. मृतका खुशबू का हॉस्टल के कमरे से शव मिलने के बाद परिजनों ने इस घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. अब पुलिस ने परिजनों के आवेदन के आधार पर जांच शुरू कर दी है. हर एंगल से जांच करने की बात कही गई है.
घटना 2 फरवरी की है. मधेपुरा के बीपी मंडल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के हॉस्टल में छात्रा का संदिग्ध हालत में शव कई सवाल खड़े कर रहा है. पिता और बाकी परिवार के लोगों ने इसे हत्या मानने से इनकार कर दिया है. पिता ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी बेटी की हत्या हुई है. पिता का कहना है कि खुशबू का किसी से कोई विवाद नहीं था. घटना से ठीक एक दिन पहले भी उनसे फोन पर बात हुई थी. आगे कहा कि उनकी लड़की बिल्कुल सामान्य, खुश और भविष्य की योजनाओं से भरी हुई थी.
पिता ने कांपते हुई आवाज में कहा कि बड़ी उम्मीदों से बेटी को पढ़ाया था. वही हमारे घर की हालत बदलने वाली थी.वह कभी तनाव में नहीं थी, आत्महत्या करने का सवाल ही नहीं उठता. परिजनों का दर्द यहीं खत्म नहीं होता.खुशबू के चाचा दुर्गा प्रसाद कहते हैं कि वह पढ़ाई के अलावा कुछ सोचती ही नहीं थी. चाचा दुर्गा प्रसाद ने आगे कहा कि छुट्टियों में भी किताबों से जुड़ी रहती थी.वह बहुत सपने लेकर इंजीनियरिंग करने आई थी. ऐसी लड़की खुदकुशी नहीं कर सकती. परिवार का कहना है कि गांव में खुशबू अकेली लड़की थी जिसने इंजीनियरिंग में नामांकन लिया था. वह सिर्फ अपने लिए नहीं, पूरे परिवार और समाज के लिए उम्मीद बन चुकी थी.
अब पुलिस ने परिजनों के आवेदन के आधार पर जांच शुरू कर दी है. हर एंगल से मामले की पड़ताल की बात कही जा रही है, लेकिन सवाल अब भी कायम है कि क्या यह आत्महत्या है या फिर एक होनहार छात्रा की सोची-समझी साजिश के तहत हत्या? परिजन दोषियों की गिरफ्तारी और सच्चाई सामने आने तक चैन से बैठने को तैयार नहीं हैं.
मधेपुरा से रमण कुमार की रिपोर्ट
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