नेपाल में हुई भीषण और मूसलाधार बारिश के बाद पड़ोसी देश की ओर से बिहार की तरफ तबाही का ऐसा सैलाब आया है जिसने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. दरअसल भारत-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकि नगर गंडक बैराज पर पानी के भयंकर दबाव को कम करने के लिए प्रशासन को सभी फाटकों को खोलना पड़ा है. इस समय गंडक नदी की उफनती लहरें उत्तर बिहार के सीमावर्ती जिलों के लोगों के लिए काल बन चुकी हैं.सारण और मुजफ्फरपुर में तटबंध टूट गए हैं और बाढ़ का पानी नेशनल हाईवे तक पहुंच गया है. गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, बगहा और सारण के इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं.

Bihar flood 2026: मुजफ्फरपुर के भी कुछ रिहायशी इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है.
नेपाल से फूटा 'जल बम', कई जिलों में बाढ़
नेपाल के में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण भारत-नेपाल सीमा पर स्थित गंडक बैराज का जलस्तर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था. गंडक बैराज के सभी गेटों को खोलना पड़ा है क्योंकि नेपाल की तरफ से अब तक लगभग 8.5 लाख क्यूसेक पानी भारत की तरफ छोड़ा गया है. हालांकि, राहत की बात यह है कि पिछले कुछ दिनों की तुलना में गुरुवार दोपहर पानी की रफ्तार में थोड़ी कमी देखी गई है, जब नेपाल की तरफ से करीब 1 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. लेकिन पहले ही छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी की वजह से नेपाल से सटे बिहार के सीमावर्ती जिलों में जलप्रलय की स्थिति बनी हुई है.
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Bihar flood 2026: सारण के कई निचले इलाके में बाढ़ के बाद हालात बिगड़ गए हैं. वहां के निवासियों ने ऊंची जगहों पर सड़क के किनारे पनाह ली है.
बिहार के इन 3 जिलों में सबसे ज्यादा तबाही
भौगोलिक रूप से देखें तो नेपाल के पहाड़ी इलाकों से बहने वाली दो प्रमुख नदियां यानी त्रिवेणी और नारायणी नदी जब भारतीय सीमा में प्रवेश करती हैं, तो ये मिलकर गंडक नदी का विशाल रूप ले लेती हैं. इस समय पूरे बिहार में गंडक नदी ही सबसे ज्यादा तबाही मचा रही है. इसके रौद्र रूप के कारण नेपाल सीमा से सटे जिलों जैसे कि बगहा, पश्चिमी और पूर्वी चंपारण, और गोपालगंज जिले में बाढ़ का प्रभाव सबसे भयानक देखा जा रहा है. इन जिलों के दर्जनों गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से पूरी तरह टूट गया है और लोग ऊंचे बांधों पर शरण लेने को मजबूर हैं.
सारण जिले में टूटा तटबंध, मकेर और अमनौर में घुसा बाढ़ का पानी
इस बीच सारण जिले से भी डराने वाली खबर सामने आ रही है. सारण जिले के मकेर प्रखंड में मुख्य तटबंध टूट जाने के बाद बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है. तटबंध टूटने के कारण मकेर प्रखंड की सभी पंचायतों और पड़ोसी अमनौर प्रखंड की कई पंचायतों में बाढ़ का पानी फैल गया है. पानी का तेज बहाव अब परसा प्रखंड की ओर बढ़ रहा है जिससे नए इलाकों पर खतरा मंडरा रहा है. बाढ़ का पानी कुछ स्थानों पर नेशनल हाईवे यानी एनएच-722 पर चढ़ गया है, जिससे वाहनों का आवागमन और संपर्क पूरी तरह बाधित हो गया है. प्रशासन के अनुसार, बुधवार शाम तक जिले की 18 पंचायतों के 48 गांवों की लगभग 24,725 आबादी और 4,220 परिवार इस बाढ़ से सीधे तौर पर प्रभावित हो चुके हैं.
तटबंधों पर 24 घंटे कड़ा पहरा
गंडक के इस भारी उफान के बाद बिहार सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह हाई अलर्ट पर हैं. बगहा से लेकर गोपालगंज तक गंडक नदी के तमाम तटबंधों यानी बांधों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है, क्योंकि पानी के लगातार थपेड़ों से कई जगहों पर रिसाव का खतरा मंडरा रहा है. संवेदनशील इलाकों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को नावों के साथ तैनात कर दिया गया है ताकि निचले इलाकों में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके. प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और नदी के किनारे जाने से बचें.
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