Bihar : CM कर रहे मेडिकल व्‍यवस्‍था में बेहतरी का दावा लेकिन राज्‍य का एकमात्र डेंटल कॉलेज खस्‍ताहाल

इस अस्पताल में प्रिंसिपल के अलावा सारे डॉक्टर संविदा पर वर्षों से काम करने को मजबूर हैं. इस कॉलेज में 100 छात्रों की पढ़ाई की मंज़ूरी मिली हुई है लेकिन यहां अभी बस 40 छात्र हैं क्योंकि विभाग में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं और न कोई व्यवस्‍था.

पटना :

Bihar: बिहार (Bihar)के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) का दावा है कि उन्होंने मेडिकल व्यवस्था और शिक्षा के क्षेत्र में कई ऐसे फ़ैसले लिए जो पहले नहीं लिए गए लेकिन इसके बावजूद सच्चाई यही है कि बिहार सरकार के एकमात्र डेंटल कॉलेज के सारे शिक्षक कांट्रेक्‍ट पर हैं. पटना का ये डेंटल कॉलेज सुबह खुलता है और शाम को बंद हो जाता है.पटना डेंटल कॉलेज के सर्जरी विभाग के ऑपरेशन थिएटर की हालत वर्षों से खस्ता है- यहां सर्जरी ठप है. नर्स सुप्रिया भारती बताती हैं, 'यहां काम नहीं होता हैं.दीवार में फ़ंगस लगा हुआ है.'

इस अस्पताल में प्रिंसिपल के अलावा सारे डॉक्टर संविदा पर वर्षों से काम करने को मजबूर हैं. इस कॉलेज में 100 छात्रों की पढ़ाई की मंज़ूरी मिली हुई है लेकिन यहां अभी बस 40 छात्र हैं क्योंकि विभाग में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं और न कोई व्यवस्‍था. प्रधानाध्यापक डॉक्टर रानी कुमारी गुप्ता बताती हैं, 'बिहार सरकार में रेगुलर अपॉइंटमेंट नहीं हुआ हैं लेकिन प्रक्रिया चल रही है. ये सही हैं नॉन टीचिंग में सब लोग संविदा पर नहीं हैं. जो डॉक्टर सालों से काम कर रहे हैं उनका अपना रोना है कि इतना पुराना कॉलेज होने के बावजूद यहाँ पीजी की पढ़ाई सभी विभागों में नहीं हो रही.


डॉक्टर रितेश राज कहते हैं, 'मैं 11 साल से हूं.परेशानियां इतनी है कि  पहले ऑटो रिन्‍युअल नहीं था अब हो गया' डॉक्टर अंशु बताती हैं, 'कमी यह है कि यहां  PG की पढ़ाई शुरू होनी चाहिए, यहां के बच्चों को बाहर के स्टेट में अड्मिशन नहीं मिलता.' दूसरी ओर, वहीं राज्य सरकार का कहना हैं कि नियमावली ना होने के कारण नियमित नियुक्ति अब तक रुकी हुई थी. बिहार के स्वास्थ्य मंत्री  मंगल पांडेय ने कहा, 'देखिए हमारे प्रिन्सिपल रेगुलर हैं.'मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नीति आयोग को नसीहत देने की जगह अपने संस्थानों का हाल सुधारें तो राज्य का भी भला हो और उसकी छवि भी बेहतर हो.

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